• info@thevaarta.com

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में यूपी का दबदबा, 8 चेहरों को जिम्मेदारी; 2027 के लिए OBC- अल्पसंख्यक के जरिये सोशल इंजीनियरिंग का संगठन प्लान

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में यूपी का दबदबा, 8 चेहरों को जिम्मेदारी; 2027 के लिए OBC- अल्पसंख्यक के जरिये सोशल इंजीनियरिंग का संगठन प्लान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय टीम में यूपी को खास तवज्जो दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में यूपी से 8 नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। इनमें स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री, रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री, डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है।

इसके अलावा अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष और कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है। यानी भाजपा ने यूपी को केवल राष्ट्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व नहीं दिया, बल्कि 2027 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग सामाजिक वर्गों के नेताओं को जिम्मेदारी दी है। यूपी से अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान मिली है। यूपी के कुल 8 चेहरों की मौजूदगी और दो अहम मोर्चों की कमान यूपी के नेताओं को मिलना 2027 के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

8 चेहरे, अलग-अलग सामाजिक समीकरण
भाजपा की नई टीम में यूपी के चेहरों का चयन देखें तो इसमें सामाजिक संतुलन साफ दिखाई देता है। स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर भाजपा ने अपने बड़े महिला और आक्रामक चुनावी चेहरे को फिर केंद्रीय संगठन में सक्रिय किया है। अमेठी से 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह केंद्रीय संगठन से बाहर थीं। अब उनकी वापसी को यूपी में पार्टी के चुनावी अभियान के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाना ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं डॉ. भोला सिंह को राष्ट्रीय मंत्री बनाकर दलित प्रतिनिधित्व को जगह दी गई है। रेखा वर्मा, संगीता यादव और अमरपाल मौर्य के जरिए ओबीसी वोटबैंक पर फोकस दिखाई देता है। खासतौर पर अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चे की राष्ट्रीय कमान देना सीधे तौर पर पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

PDA के जवाब में BJP का सोशल इंजीनियरिंग कार्ड
2024 लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए-पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक नैरेटिव से भाजपा को यूपी में नुकसान हुआ था। भाजपा की लोकसभा सीटें 2019 की 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई थीं। नई टीम में ओबीसी, दलित और मुस्लिम चेहरों को प्रमुख जिम्मेदारियां देकर भाजपा उसी चुनौती का राजनीतिक जवाब तैयार करती दिख रही है।

खास बात यह है कि कुंवर बासित अली, जो अभी तक यूपी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष थे, अब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष बनाए गए हैं। इसके साथ ही प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखना भी मुस्लिम प्रतिनिधित्व की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

यूपी में महिला वोट पर भी नजर
नई टीम में यूपी से तीन महिला चेहरे हैं, स्मृति ईरानी, रेखा वर्मा और संगीता यादव। यानी भाजपा ने महिला प्रतिनिधित्व को भी चुनावी रणनीति के साथ जोड़ा है। खासकर महिला मतदाताओं के बीच केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को लेकर संपर्क बढ़ाने में इन चेहरों की भूमिका हो सकती है।

विनोद तावड़े की यूपी में एंट्री से प्लान और साफ
राष्ट्रीय टीम के गठन के अगले ही चरण में विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। तावड़े को संगठन और चुनावी मैनेजमेंट का लंबा अनुभव है। अब राष्ट्रीय टीम में यूपी के 8 चेहरे और राज्य में तावड़े जैसे अनुभवी संगठनकर्ता की तैनाती को एक साथ देखें तो भाजपा का चुनावी प्लान काफी हद तक स्पष्ट होता है। दिल्ली में यूपी की आवाज मजबूत करना और लखनऊ में संगठन को चुनावी मोड में लाना।

यूपी को इतना महत्व क्यों?
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें और 80 लोकसभा सीटें हैं। भाजपा के लिए यूपी केवल 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं है, बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव की जमीन भी यहीं से तैयार होगी। यही वजह है कि राष्ट्रीय संगठन में यूपी को मजबूत प्रतिनिधित्व दिया गया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन जुलाई में अपने पहले यूपी दौरे के दौरान भी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, पार्टी पदाधिकारियों, सरकार और सहयोगी दलों के साथ समन्वय पर जोर दे चुके हैं। पार्टी ने प्रदेश की नई टीम में भी बड़े स्तर पर बदलाव किया है।

अब BJP का 2027 प्लान क्या है?

1. बूथ मजबूत करो – 2024 के लोकसभा चुनाव में जिन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी कमजोर रही, वहां बूथ स्तर पर संगठन को फिर सक्रिय करना।

2. PDA का जवाब सोशल इंजीनियरिंग से – ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, महिला और अल्पसंख्यक चेहरों को संगठन में जगह देकर अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाना।

3. OBC वोट पर विशेष फोकस – अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चे की कमान देकर यूपी समेत पूरे देश में पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने का संदेश।

4. मुस्लिम वोट में सेंध की कोशिश – बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष और तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखना पसमांदा और अन्य मुस्लिम समूहों तक पहुंच बनाने की रणनीति का संकेत है।

5. महिला वोट बैंक को साधना – स्मृति ईरानी की वापसी के साथ रेखा वर्मा और संगीता यादव को राष्ट्रीय जिम्मेदारी देकर महिला मतदाताओं के बीच संगठनात्मक अभियान मजबूत करने की कोशिश।

6. 2027 के बाद 2029 – भाजपा के लिए यूपी में 2027 की सरकार बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही 2029 में लोकसभा की 80 सीटों के लिए मजबूत आधार तैयार करना भी है। नई राष्ट्रीय टीम को आगामी विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

BJP ने दिल्ली में बनाया यूपी का चुनावी कमांड सेंटर
राजनीतिक जानकार मानते है कि भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम को सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल मानना मुश्किल है। स्मृति ईरानी की वापसी, हरीश द्विवेदी को महामंत्री, रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को उपाध्यक्ष, भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री तथा अमरपाल मौर्य और बासित अली को राष्ट्रीय मोर्चों की कमान, इन नियुक्तियों में यूपी के जातीय और सामाजिक समीकरणों को तैयार किया गया है।

Related Articles

Leave a Reply