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BRICS में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, चीन के सामने भारत की चिंताएं साफ; PM मोदी ने दिए ‘3 म्यूचुअल्स’ का मंत्र

BRICS में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, चीन के सामने भारत की चिंताएं साफ; PM मोदी ने दिए ‘3 म्यूचुअल्स’ का मंत्र

भारत और चीन के रिश्तों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा। नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे की मूल चिंताओं और हितों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता को अहम आधार बताया।

मोदी-जिनपिंग मुलाकात में क्या हुई बात?
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात BRICS सम्मेलन से इतर हुई थी। शी जिनपिंग 12 सितंबर को भारत पहुंचे थे। गलवान घाटी में वर्ष 2020 में हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बातचीत से जुड़ी जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की चिंताओं का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, दोनों पक्षों को एक-दूसरे की ‘कोर कंसर्न्स’ यानी मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

भारत की ओर से रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए जिन तीन सिद्धांतों पर जोर दिया गया, उन्हें ‘3 म्यूचुअल्स’ कहा गया है। इनमें Mutual Respect यानी आपसी सम्मान, Mutual Interest यानी आपसी हित और Mutual Sensitivity यानी आपसी संवेदनशीलता शामिल हैं।

तिब्बत और ताइवान को लेकर चीन ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी चीन की ओर से जारी किए गए एक अलग विवरण के बाद सामने आई। चीन के मुताबिक, बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने तिब्बत और ताइवान के मुद्दे पर भारत की मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं होने की बात कही थी।

चीनी पक्ष के अनुसार, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत अपनी जमीन का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देता। भारत की ओर से पहले भी यह रुख सामने आता रहा है कि उसकी धरती से किसी दूसरे देश के खिलाफ गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

ताइवान पर भारत की नीति क्या है?
भारत की चीन नीति में ताइवान का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। भारत ने करीब 16 साल पहले सार्वजनिक बयानों में ‘वन चाइना पॉलिसी’ का नियमित रूप से उल्लेख करना बंद कर दिया था। हालांकि, ताइवान को लेकर भारत की आधिकारिक स्थिति में मूल रूप से बदलाव नहीं हुआ है।

‘वन चाइना पॉलिसी’ के तहत चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और दुनिया में एक ही संप्रभु चीन होने की बात करता है। भारत चीन के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए रखते हुए ताइवान के साथ भी व्यापार, निवेश, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में अनौपचारिक संबंध रखता है।

भारत सरकार का कहना है कि ताइवान को लेकर उसका रुख स्पष्ट और निरंतर है। यानी भारत ताइवान के साथ व्यावहारिक क्षेत्रों में संपर्क बनाए रखता है, लेकिन इसे चीन के साथ औपचारिक राजनयिक संबंधों के समान दर्जा नहीं देता।

तिब्बत पर भारत का रुख भी स्पष्ट
तिब्बत के मामले में भारत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को चीन का हिस्सा मानता है। भारत की यह स्थिति नई नहीं है। वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान भारत और चीन के बीच संबंधों एवं सहयोग को लेकर हुए समझौते में भारत की ओर से यह बात कही गई थी कि उसकी जमीन का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यही वजह है कि तिब्बत और ताइवान जैसे मुद्दों पर भारत का रुख चीन के साथ रिश्तों में लगातार संवेदनशील विषय बना हुआ है।

BRICS सम्मेलन में जुटे कई बड़े नेता
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन की थीम ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रही।

सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई देशों के प्रमुख नेता शामिल हुए।

BRICS बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों ने एक साझा घोषणा स्वीकार की, जिसमें बिना किसी देश का नाम लिए संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई। घोषणा में वर्ष 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की भी निंदा की गई। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी।

भारत-चीन रिश्तों में आगे की राह
मोदी और जिनपिंग की बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया जारी है। सीमा विवाद और 2020 की गलवान घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा था। BRICS के मंच पर हुई यह बातचीत से भारत अपने हितों और चिंताओं को स्पष्ट रखते हुए चीन के साथ संबंधों में संवाद को भी महत्व दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बताए गए ‘तीन म्यूचुअल्स’ – आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।

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