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अरुणाचल के टक्सिंग में चीन की PLA की कथित घुसपैठ का दावा, PPA रिपोर्ट ने उठाए सीमा सुरक्षा पर सवाल

अरुणाचल के टक्सिंग में चीन की PLA की कथित घुसपैठ का दावा, PPA रिपोर्ट ने उठाए सीमा सुरक्षा पर सवाल

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग इलाके को लेकर एक बार फिर चीन की गतिविधियों पर सवाल खड़े हुए हैं। पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत-चीन सीमा के नजदीक कुछ इलाकों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की गतिविधियां सामने आई हैं। पार्टी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत बताई है।

टक्सिंग इलाके को लेकर PPA ने क्या कहा?
PPA की रिपोर्ट के मुताबिक, टक्सिंग सर्कल और इसके आसपास के कुछ सीमा बिंदुओं पर चीनी गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। पार्टी का दावा है कि शेरा-5 और नांगा पहाड़ जैसे इलाकों में स्थानीय लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमा क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम के कारण नियमित निगरानी और गश्त अपने आप में बड़ी चुनौती है। PPA ने सरकार से सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण तेज करने, स्थायी सुरक्षा बेस विकसित करने और संचार सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग की है।

फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने स्थानीय लोगों और जवानों से की बातचीत
PPA की कमेटी का कहना है कि उसने टक्सिंग, माज़ा और गैलेमो के स्थानीय निवासियों के अलावा इलाके में तैनात रक्षा अधिकारियों और सेना के जवानों से भी बातचीत की। रिपोर्ट के अनुसार, खराब मौसम और भारी बारिश के कारण कई इलाकों में नियमित गश्त सीमित रहती है, जबकि अप्रैल से अक्टूबर के बीच पेट्रोलिंग अपेक्षाकृत अधिक होती है।

कमेटी ने शेरा-5 से जुड़ी एक पुरानी घटना का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट में एक स्थानीय युवक के हवाले से दावा किया गया कि वहां भारतीय गश्ती दल और चीनी PLA के जवानों का आमना-सामना हुआ था। इसके बाद भारतीय जवानों के वहां से हटने और फिर चीनी सैनिकों की कथित वापसी का दावा रिपोर्ट में किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

सेना और राज्य सरकार का अलग रुख
PPA के आरोपों के बीच भारतीय सेना और अरुणाचल प्रदेश सरकार का रुख अलग रहा है। भारतीय सेना पहले ही अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA द्वारा हालिया कब्जे या नए कैंप स्थापित करने से जुड़ी रिपोर्टों को “गलत और बिना आधार” बताया है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी हालिया चीनी घुसपैठ के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि भारतीय सेना सीमा क्षेत्र की सुरक्षा कर रही है। इसलिए फिलहाल टक्सिंग को लेकर सामने आया मामला PPA के दावों और सरकारी/सैन्य खंडन के बीच का है।

चीन के नाम बदलने पर भी विवाद
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद केवल सीमा गतिविधियों तक सीमित नहीं है। चीन लंबे समय से राज्य के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करता रहा है और उन्हें अलग नाम से संबोधित करता है। भारत की ओर से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक स्थानों के आधिकारिक नाम तय किए जाने पर भी चीन ने आपत्ति जताई है। ऐसे घटनाक्रमों के बीच टक्सिंग जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संचार और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की मांग लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।

सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की मांग
PPA ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि सीमावर्ती इलाकों में मजबूत सड़क नेटवर्क, बेहतर संचार व्यवस्था और सुरक्षा बलों के लिए स्थायी ढांचे की जरूरत है। पार्टी का तर्क है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर स्थानीय लोगों के लिए भी जरूरी है साथ ही इससे सीमा की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी बनेगी।

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