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रूस के निझनेकाम्स्क में ड्रोन अटैक से दहला तेल केंद्र, 13 की मौत; रूस-यूक्रेन युद्ध में बढ़ता ड्रोन खतरा

रूस के निझनेकाम्स्क में ड्रोन अटैक से दहला तेल केंद्र, 13 की मौत; रूस-यूक्रेन युद्ध में बढ़ता ड्रोन खतरा

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ सीमा और मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है। हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचने वाले ड्रोन इस संघर्ष का नया हथियार बन चुके हैं और अब दोनों देशों के शहर, औद्योगिक प्रतिष्ठान और ऊर्जा ढांचा इनके निशाने पर हैं। सोमवार को रूस के तातारस्तान क्षेत्र के निझनेकाम्स्क में हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले ने इस खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमले में 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 75 लोग घायल हुए। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल बताया गया है। यह हमला रूस के भीतर हुए सबसे घातक यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक माना जा रहा है।

तेल रिफाइनरी बनी हमले का प्रमुख निशाना
निझनेकाम्स्क रूस का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और पेट्रोकेमिकल केंद्र है। यहां स्थित TANECO तेल रिफाइनरी देश के प्रमुख ऊर्जा प्रतिष्ठानों में शामिल है। यूक्रेनी सेना ने हमले में इसी रिफाइनरी को निशाना बनाने की बात कही है। हमले के बाद वहां आग लगने की खबर सामने आई।

हालांकि, हमले से हुए औद्योगिक नुकसान का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है। रूसी अधिकारियों ने ड्रोन हमले की पुष्टि की है, जबकि यूक्रेन ने इसे रूस की ऊर्जा और औद्योगिक क्षमता को कमजोर करने की अपनी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है।

हमले ने फिर दिखाया ड्रोन युद्ध का खतरनाक चेहरा
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। पहले जहां ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों और अग्रिम मोर्चों पर किया जाता था, वहीं अब तेल रिफाइनरी, बिजली व्यवस्था, औद्योगिक संयंत्र और लॉजिस्टिक सुविधाएं भी निशाने पर आ रही हैं। यूक्रेन की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रूस के ऊर्जा और सैन्य सप्लाई नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। लंबी दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन अब रूस के अंदर काफी दूर स्थित ठिकानों तक पहुंच रहे हैं। इससे रूस के लिए अपने विशाल क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

जंग का सबसे बड़ा खामियाजा आम लोगों को
ड्रोन हमलों की बढ़ती संख्या ने इस युद्ध का मानवीय पहलू और भयावह कर दिया है। निझनेकाम्स्क में हुए हमले में भी बड़ी संख्या में आम लोगों के हताहत होने की खबर है। इससे साफ है कि युद्ध में इस्तेमाल होने वाली तकनीक जितनी आधुनिक हो रही है, उसका खतरा उतनी ही तेजी से नागरिक इलाकों तक पहुंच रहा है।

दूसरी तरफ यूक्रेन भी लगातार रूसी हमलों का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में यूक्रेन में नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में लगभग 1,400 नागरिक मारे गए और करीब 8,000 घायल हुए।

रूस भी जवाबी हमलों में पीछे नहीं
यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में रूस लगातार मिसाइलों और ड्रोन से यूक्रेनी शहरों तथा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता रहा है। इस तरह दोनों देशों के बीच हमलों का एक ऐसा चक्र बन गया है, जिसमें ऊर्जा प्रतिष्ठान और औद्योगिक ढांचा लगातार प्रभावित हो रहा है। इसका असर सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहता। बिजली, ईंधन, परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने से आम नागरिकों की जिंदगी भी मुश्किल होती है।

छोटे ड्रोन बने बड़ी चुनौती
इस युद्ध की सबसे चिंताजनक तस्वीर छोटे FPV ड्रोन के इस्तेमाल से सामने आई है। ये ड्रोन अपेक्षाकृत छोटे होते हैं, लेकिन इन्हें बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य तक पहुंचाया जा सकता है। अग्रिम मोर्चे के आसपास इनका इस्तेमाल सैनिकों, वाहनों और अन्य ठिकानों पर हमलों के लिए किया जा रहा है। ऐसे ड्रोन का पीछा करना और उन्हें समय रहते रोकना बेहद मुश्किल होता है। यही वजह है कि आधुनिक युद्ध में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य हथियारों के सामने गंभीर चुनौती बन चुके हैं।

मिसाइलों के साथ बढ़ी एयर डिफेंस की चुनौती
ड्रोन के अलावा रूस और यूक्रेन दोनों लंबी दूरी की मिसाइलों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। यूक्रेन के लिए रूसी मिसाइल हमलों को रोकना विशेष चुनौती है, क्योंकि इसके लिए अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत पड़ती है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की लंबे समय से पश्चिमी देशों से अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों की मांग करते रहे हैं। उनका जोर खास तौर पर अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम पर रहा है।

कोशिशों के बावजूद नहीं थम रही जंग
रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत और कूटनीतिक प्रयास होते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। राजनीतिक स्तर पर बातचीत की उम्मीदों के बीच जमीन और आसमान में हमले लगातार जारी हैं। निझनेकाम्स्क का हमला बताता है कि युद्ध का दायरा अब भी कितना व्यापक है। रूस के भीतर हजारों किलोमीटर दूर स्थित ऊर्जा प्रतिष्ठान भी ड्रोन की पहुंच में हैं, जबकि यूक्रेनी शहर रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहे हैं।

चार साल से अधिक समय से जारी यह युद्ध अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है, जहां मोर्चे की सीमा और शहरों की सीमा के बीच फर्क लगातार कम होता जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता यही है कि आधुनिक हथियारों की इस दौड़ में आम नागरिक कब तक इसकी कीमत चुकाते रहेंगे।

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