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Crude Oil में 1.6% की गिरावट, कमजोर मांग ने बढ़ाई चिंता; क्या और सस्ता होगा क्रूड?

Crude Oil में 1.6% की गिरावट, कमजोर मांग ने बढ़ाई चिंता; क्या और सस्ता होगा क्रूड?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर एक बार फिर दबाव देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर ईंधन की मांग कमजोर रहने की आशंका और अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने कीमतों को नीचे खींचा। गुरुवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.5 फीसदी, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 1.6 फीसदी तक फिसल गया। हालांकि, बाजार में फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं दिख रही है कि कच्चा तेल लगातार और बड़ी गिरावट के साथ नीचे चला जाए। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता कीमतों के लिए अब भी बड़ा सहारा बनी हुई है।

ब्रेंट और WTI में कितनी आई गिरावट?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.29 डॉलर की गिरावट के साथ 87.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इसी तरह अमेरिकी WTI क्रूड करीब 1.30 डॉलर टूटकर 81.97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। कीमतों में यह नरमी ऐसे समय आई है जब बाजार पहले से ही वैश्विक मांग को लेकर सतर्क है। निवेशक यह आंकलन कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों और ईंधन की खपत का रुख कैसा रहेगा।

कमजोर मांग ने बढ़ाया दबाव
कच्चे तेल के बाजार में सबसे बड़ी चिंता इस समय मांग को लेकर है। प्रमुख ऊर्जा संस्थाओं ने वैश्विक ऑयल कंजम्पशन को लेकर अपने अनुमान में कटौती की है। ओपेक ने अपनी ताजा मासिक रिपोर्ट में 2026 के लिए वैश्विक तेल मांग में बढ़ोतरी का अनुमान घटाकर करीब 5.80 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया है।

वहीं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने इस साल तेल की खपत में लगभग 16 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी का अनुमान लगाया है। इससे पहले एजेंसी का अनुमान करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट का था।

मांग के इन कमजोर अनुमानों का सीधा असर तेल बाजार की धारणा पर पड़ा है। जब बाजार को भविष्य में खपत कम रहने का संकेत मिलता है तो कीमतों पर स्वाभाविक रूप से दबाव बढ़ता है।

अमेरिका में बढ़ गया कच्चे तेल का स्टॉक
कीमतों में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह अमेरिका से सामने आया इन्वेंट्री डेटा है। अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA के मुताबिक, एक्सपोर्ट में कमी के बीच अमेरिकी कच्चे तेल के वाणिज्यिक भंडार में पिछले सप्ताह अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई।

7 अगस्त को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी क्रूड स्टॉक करीब 1.74 करोड़ बैरल बढ़कर 42.44 करोड़ बैरल पर पहुंच गया। यह 5 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। खास बात यह रही कि बाजार इस तरह की बढ़ोतरी के लिए तैयार नहीं था।

रॉयटर्स के सर्वे में विशेषज्ञों ने उल्टा करीब 14 लाख बैरल की गिरावट का अनुमान लगाया था। यानी वास्तविक आंकड़ा बाजार की उम्मीद से बिल्कुल अलग रहा और इससे तेल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।

क्या आगे और सस्ता होगा कच्चा तेल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हालिया गिरावट के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में और बड़ी नरमी देखने को मिलेगी? इसका जवाब फिलहाल सीधा नहीं है। एक तरफ कमजोर मांग और बढ़ता अमेरिकी स्टॉक कीमतों को नीचे खींच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी तनाव सप्लाई को लेकर जोखिम बनाए हुए है।

अमेरिका और ईरान के बीच किसी संभावित समझौते को लेकर भी अभी स्पष्टता नहीं है। यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कीमतों में बड़ी गिरावट पर रोक लग सकती है।

होर्मुज पर नजर क्यों?
पश्चिम एशिया का तेल बाजार में महत्व समझने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद अहम है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल उत्पादन में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। वहीं होर्मुज से रोजाना करीब 1.4 से 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल और लगभग 50 से 60 लाख बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती है।

यही वजह है कि इस इलाके में किसी भी बड़े व्यवधान की आशंका अंतरराष्ट्रीय बाजार को तुरंत प्रभावित करती है। इसके अलावा क्षेत्र में बड़े स्टोरेज टर्मिनल, गैस उत्पादन केंद्र और रिफाइनरियां भी मौजूद हैं। ऐसे में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सप्लाई चेन प्रभावित होने का जोखिम बना रहता है।

OMCs के लिए महंगा तेल बढ़ा सकता है दबाव
कच्चे तेल की कीमतों का असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहता। भारत जैसी बड़ी तेल आयातक अर्थव्यवस्था में कीमतों का प्रभाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMCs पर भी पड़ता है।

ऊंची क्रूड कीमतें पहले से दबाव झेल रही कंपनियों की लागत और मार्जिन पर असर डाल सकती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो OMCs पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है।

दूसरी तरफ, कच्चे तेल के उत्पादन से जुड़ी अपस्ट्रीम कंपनियों को ऊंची कीमतों से फायदा मिल सकता है। हालांकि, उत्पादन और वॉल्यूम में बड़े संरचनात्मक बदलाव नहीं होने की स्थिति में इस सेक्टर से बहुत मजबूत ग्रोथ की उम्मीद करना भी आसान नहीं है।

फिलहाल बाजार के सामने दो विपरीत संकेत
कच्चे तेल की मौजूदा चाल को देखें तो बाजार में दो विपरीत तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। कमजोर मांग और बढ़ता अमेरिकी स्टॉक कीमतों को नीचे खींच रहे हैं, जबकि पश्चिम एशिया का तनाव और सप्लाई बाधित होने का खतरा क्रूड को ज्यादा गिरने से रोक सकता है।

इसलिए फिलहाल कच्चे तेल में हल्की नरमी जारी रह सकती है, लेकिन बड़ी और लगातार गिरावट के लिए भू-राजनीतिक जोखिमों का कम होना जरूरी होगा। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी इन्वेंट्री आंकड़ों, वैश्विक मांग के नए अनुमानों और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की दिशा पर रहेगी। इन्हीं संकेतों से तय होगा कि क्रूड की अगली चाल नीचे जाती है या फिर कीमतें दोबारा मजबूती पकड़ती हैं।

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