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Chamoli Tunnel Accident: चमोली सुरंग हादसे ने मचाई तबाही, 7 मजदूरों की मौत; 3 अब भी लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Chamoli Tunnel Accident: चमोली सुरंग हादसे ने मचाई तबाही, 7 मजदूरों की मौत; 3 अब भी लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम हुए हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। सुरंग के भीतर अचानक मलबा, पानी और पत्थरों का तेज बहाव घुसने से वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 3 श्रमिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं 19 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें कई घायल हैं।

हादसे के बाद से ही सुरंग के भीतर फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, आईटीबीपी, सेना और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर जुटी हैं। सुरंग के अंदर मौजूद मलबे और पानी के कारण बचाव दल को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

गुरुवार शाम अचानक बदले हालात
जानकारी के मुताबिक हादसा गुरुवार शाम करीब 6 से पौने सात बजे के बीच हुआ। उस समय विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में मजदूर काम कर रहे थे। सुरंग के भीतर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ सुरंग के एक हिस्से में भूस्खलन हुआ।

कुछ ही पलों में मलबे के साथ पानी और बड़े पत्थर सुरंग के भीतर तेजी से आने लगे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। सुरंग की बिजली भी गुल हो गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

बताया गया कि हादसे के समय करीब 29 मजदूर परियोजना स्थल पर मौजूद थे। इनमें से कुछ मजदूरों ने खुद को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और कुछ ने बाहर निकलने की कोशिश में दूसरों की मदद की। बचाव दल के पहुंचने के बाद कई मजदूरों को सुरंग से बाहर निकाला गया।

कुछ मिनटों तक पानी में फंसा रहा मजदूर
हादसे से बचकर निकले मजदूरों ने उस भयावह स्थिति के बारे में बताया, जिसने रेस्क्यू ऑपरेशन की मुश्किलों को भी सामने ला दिया। एक घायल मजदूर ने बताया कि अचानक पानी भरने के बाद वह करीब तीन मिनट तक पानी में फंसा रहा। उसके ऊपर भारी पाइपलाइन आ गई थी, जिसकी वजह से वह बाहर नहीं निकल पा रहा था।

मजदूर के मुताबिक पाइप का वजन इतना अधिक था कि कई लोगों के प्रयास के बावजूद उसे हटाना आसान नहीं था। उसने बताया कि एक समय उसे खुद यह देखने के लिए अपने शरीर को टटोला कि वह जिंदा है या नहीं। इसके बाद उसने मदद के लिए जोर-जोर से आवाज लगाई। काफी मशक्कत के बाद उसकी जान बच सकी।

एक अन्य मजदूर जगेश्वर ने बताया कि हादसे से पहले अचानक तेज आवाज सुनाई दी और उसके बाद सुरंग की बिजली चली गई। वहीं सुनील नाम के मजदूर के अनुसार, करीब 150 मीटर दूर अचानक भारी भूस्खलन हुआ और मलबा, पानी तथा पत्थर तेजी से सुरंग की ओर बढ़े।

7 मजदूरों की मौत, तीन की तलाश जारी
रेस्क्यू अभियान के दौरान अब तक सात मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में प्रदीप पंवार (35), मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुवनेश्वर शामिल हैं। इनमें कुछ मजदूर उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड से संबंधित बताए गए हैं।

हादसे के बाद तीन मजदूरों का अब तक पता नहीं चल सका है। लापता श्रमिकों में लुकास टोपनों निवासी झारखंड, चेतन पोयाम निवासी छत्तीसगढ़ और देवनाथ निवासी छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इनके परिजन लगातार अपने प्रियजनों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

12 घायल मजदूर अस्पताल में भर्ती
हादसे में घायल हुए मजदूरों को उपचार के लिए गोपेश्वर जिला अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया। घायलों में छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों से आए श्रमिक शामिल हैं।

घायलों में सुनील दीवान, हारबील गुड़िया, निस्तर भिंगरा, विनोद रावना, दीना बेगरा, खेला राम बिसरा, सुबेक सिंह, तिलक राज, पैन सिंह, रोहित पांडे समेत अन्य मजदूर शामिल बताए गए हैं। कुछ घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी भी दी गई है।

मौके पर पहुंची राहत-बचाव की पूरी टीम
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव एजेंसियां सक्रिय हो गईं। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव अभियान की कमान संभाली। पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें सुरंग में फंसे मजदूरों तक पहुंचने और मलबा हटाने में जुटी हैं।

सुरंग के भीतर लगातार पानी और मलबा आने के कारण बचाव कार्य आसान नहीं है। भारी पत्थरों और निर्माण सामग्री को हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि लापता मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

सीएम ने लिया जायजा, घायलों से भी मिले
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की जानकारी मिलते ही अधिकारियों से लगातार अपडेट लिया। इसके बाद वह पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री सुरंग के अंदर भी गए और टीएचडीसी के अधिकारियों से हादसे की स्थिति तथा राहत-बचाव कार्य की जानकारी ली।

उन्होंने रेस्क्यू अभियान की प्रगति की समीक्षा करने के बाद जिला अस्पताल पहुंचकर घायल मजदूरों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में पूरी ताकत लगाने और अभियान को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

परिवारों की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर
चमोली की इस घटना ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके अपने सुरंग में काम कर रहे थे। सात परिवारों में मातम पसरा है, जबकि तीन लापता मजदूरों के परिजन अब भी किसी अच्छी खबर की उम्मीद कर रहे हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के अंदर मौजूद मलबे और पानी को हटाकर लापता तीन श्रमिकों तक पहुंचना है। प्रशासन और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान इसी अभियान पर है। हर गुजरते घंटे के साथ परिवारों की बेचैनी बढ़ रही है और सभी की निगाहें रेस्क्यू टीमों की अगली सफलता पर टिकी हैं।

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