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साल 1961 में एक परिवार से शुरू हुआ बंटवारा, 2026 में देश के बंटवारे तक पहुँच रहा है…”बंटवारा 1947″

साल 1961 में एक परिवार से शुरू हुआ बंटवारा, 2026 में देश के बंटवारे तक पहुँच रहा है…”बंटवारा 1947″

बॉलीवुड में कई ऐसे फिल्मी टाइटल रहे हैं, जिन्हें अलग-अलग दौर में दोबारा पर्दे पर इस्तेमाल किया गया। लेकिन ‘बंटवारा’ नाम की कहानी कुछ ज्यादा ही दिलचस्प है। करीब छह दशक के सिनेमाई सफर में इसी टाइटल ने तीन अलग-अलग कहानियों को अपने भीतर समेटा है। कभी यह परिवार के टूटने की कहानी बना, कभी दोस्ती और दुश्मनी के बीच खड़ी सामाजिक दरार का प्रतीक और अब इसी नाम के साथ 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी बड़े पर्दे पर दिखाई देने वाली है।

इस वजह से ‘बंटवारा’ एक फिल्मी नाम नहीं रह गया, यह समय के साथ बदलती सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों का आईना भी बन गया है।

1961: जब कहानी थी परिवार के बंटने की
‘बंटवारा’ नाम पहली बार 1961 में बड़े पर्दे पर नजर आया था। निर्देशक करुणेश ठाकुर की इस फिल्म में बलराज साहनी, प्रदीप कुमार, निरूपा रॉय और शशिकला जैसे कलाकार दिखाई दिए थे। कहानी एक संयुक्त परिवार के भीतर संपत्ति और रिश्तों को लेकर पैदा होने वाले तनाव पर आधारित थी।

फिल्म ने पारिवारिक रिश्तों के टूटने और संपत्ति के बंटवारे जैसे गंभीर विषय को पर्दे पर उतारने की कोशिश की। हालांकि, मजबूत कलाकारों और संगीत के बावजूद यह फिल्म दर्शकों के बीच अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाई। धीमी कहानी और कमजोर पटकथा को इसकी असफलता की प्रमुख वजहों में गिना गया और बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म सफल नहीं हो सकी। यानी ‘बंटवारा’ नाम के साथ बॉलीवुड का पहला प्रयोग यादगार शुरुआत नहीं कर पाया।

1989: वही नाम, लेकिन इस बार कहानी बदली और किस्मत भी
करीब 28 साल बाद बॉलीवुड ने इसी टाइटल को फिर से आजमाया। इस बार कमान संभाली निर्देशक जेपी दत्ता ने। 1989 में रिलीज हुई ‘बंटवारा’ में धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, डिंपल कपाड़िया, अमृता सिंह, पूनम ढिल्लों और अमरीश पुरी जैसे बड़े सितारे एक साथ नजर आए।

इस बार कहानी परिवार की चारदीवारी से निकलकर राजस्थान के ग्रामीण परिवेश तक पहुंच गई। फिल्म में जमींदारी व्यवस्था, डकैतों का प्रभाव और करीबी रिश्तों के बीच पैदा होने वाली दुश्मनी को केंद्र में रखा गया था।

जेपी दत्ता की दमदार प्रस्तुति और मल्टी-स्टारकास्ट ने फिल्म को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। जिस ‘बंटवारा’ नाम वाली पहली फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर असफलता मिली थी, उसी नाम की दूसरी फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया। इस तरह एक ही टाइटल के साथ जुड़ी किस्मत की कहानी ने नया मोड़ ले लिया।

2026: ‘बंटवारा’ मतलब होगा देश का विभाजन
अब करीब 37 साल बाद ‘बंटवारा’ नाम एक बार फिर सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रहा है। इस बार कहानी का दायरा पहले की दोनों फिल्मों से कहीं बड़ा है। ‘बंटवारा 1947’ के जरिए 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी और उसके दौरान आम लोगों की जिंदगी पर पड़े असर को पर्दे पर लाने की कोशिश की गई है।

फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और इसमें सनी देओल, प्रीति जिंटा तथा शबाना आजमी जैसे अनुभवी कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म को 14 अगस्त 2026 को रिलीज करने की तैयारी है, यानी स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले इसे दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।

एक नाम, बदलता भारत और बदलती कहानियां
‘बंटवारा’ की तीन फिल्मों को अगर एक साथ देखा जाए तो इनमें एक दिलचस्प समानता दिखाई देती है। 1961 में बंटवारा परिवार के भीतर था, 1989 में सामाजिक रिश्तों और दोस्ती की दरार कहानी का हिस्सा बनी और 2026 में वही शब्द देश के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्याय की ओर इशारा करेगा।

यही बदलाव इस टाइटल को खास बनाता है। छह दशक से ज्यादा समय में भारतीय सिनेमा की कहानी, समाज और दर्शकों की सोच काफी बदल चुकी है, लेकिन ‘बंटवारा’ शब्द का भाव आज भी उतना ही प्रभावशाली है।

इस बार देखना दिलचस्प होगा कि 2026 में रिलीज होने वाली ‘बंटवारा 1947’ इस ऐतिहासिक विषय को किस नजरिए से प्रस्तुत करती है और क्या यह फिल्म भी इस टाइटल की किस्मत को एक नया अध्याय दे पाएगी। 14 अगस्त की रिलीज के बाद ही यह साफ होगा कि ‘बंटवारा’ का तीसरा सिनेमाई सफर दर्शकों के दिल तक कितना पहुंच पाता है।

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