नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की अमेरिकी योजना को फिलहाल रोकने के फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत समेत पांच देशों को प्रस्तावित शुल्कों से छूट देने का ऐलान किया है। इस फैसले से भारत के ऊर्जा आयात, व्यापारिक हितों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी स्थिति पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, यह राहत स्थायी होगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप प्रशासन की ओर से लिया गया यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका और कई देशों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी सरकार रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए उसके साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी कर रही थी। अब इस दिशा में फिलहाल राहत मिलने से भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक रणनीति पर काम करने के लिए कुछ और समय मिल सकता है।
100 से 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की थी तैयारी
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को और सख्त बनाने की योजना के तहत भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान सामने आया था। प्रस्तावित व्यवस्था में संबंधित देशों पर 100 से 500 फीसदी तक शुल्क लगाया जा सकता था। इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई को सीमित करना और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों पर दबाव बढ़ाना था।
इस कानून को आगे बढ़ाने में दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की अहम भूमिका बताई गई थी। प्रस्तावित प्रावधान लागू होने की स्थिति में रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले देशों के लिए अमेरिका के साथ व्यापार करना महंगा हो सकता था। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार में भी अनिश्चितता बढ़ने की आशंका थी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों और उसकी उपलब्धता का असर देश की अर्थव्यवस्था पर सीधे पड़ता है। रूस से मिलने वाला तेल भारत की ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण विकल्पों में शामिल है। चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बताया जाता है।
अगर अमेरिका की ओर से भारी टैरिफ लागू किए जाते, तो भारत के सामने ऊर्जा आयात और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ सकती थी। शुल्कों से राहत मिलने पर इस दबाव में फिलहाल कमी आ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को हर तरह के अमेरिकी व्यापारिक प्रतिबंधों से पूरी तरह छूट मिल गई है। इसका वास्तविक असर संबंधित आदेश और उसकी शर्तों पर निर्भर करेगा।
भारत के अलावा इन देशों को भी राहत
ट्रंप के फैसले से भारत के साथ चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को भी राहत मिलने की बात कही गई है। इन देशों के लिए रूस से ऊर्जा खरीद पर प्रस्तावित शुल्कों का मुद्दा आर्थिक और रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम फिलहाल इन देशों पर संभावित आर्थिक दबाव को कम कर सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश में राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए संबंधित प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने से छूट देने की बात कही है। इस संबंध में कांग्रेस को प्रमाण-पत्र सौंपे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
रूस-अमेरिका संबंधों के बीच आया फैसला
यह घटनाक्रम रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की बदलती कूटनीतिक रणनीति के बीच सामने आया है। ट्रंप पहले भी रूस और यूक्रेन, दोनों से युद्ध समाप्त करने की अपील कर चुके हैं। हालांकि, युद्ध रोकने की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी रहने से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अनिश्चितता बनी हुई है।
रूस से जुड़े शुल्कों पर फिलहाल नरमी को अमेरिका की व्यापक रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। फिर भी, केवल इस फैसले के आधार पर रूस और अमेरिका के संबंधों में स्थायी सुधार का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
क्या भविष्य में फिर लागू हो सकता है टैरिफ?
भारत के लिए राहत की खबर के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह छूट कितने समय तक जारी रहेगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शुल्कों को लागू करने पर रोक अस्थायी हो सकती है। भविष्य में परिस्थितियों और अमेरिकी सरकार के आकलन के आधार पर टैरिफ लगाने का फैसला दोबारा सामने आ सकता है।
ग्राहम एक्ट का उद्देश्य रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसके प्रावधानों के तहत बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदने वाले देशों को निशाना बनाया जा सकता है, जबकि कुछ सीमित आयात करने वाले देशों के लिए छूट का प्रावधान भी बताया गया है।

