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इस बार 8 या 9 नवंबर कब मनाई जाएगी छोटी और बड़ी दिवाली, जानें पूजा का शुभ संयोग और नरक चतुर्दशी की कथा

इस बार 8 या 9 नवंबर कब मनाई जाएगी छोटी और बड़ी दिवाली, जानें पूजा का शुभ संयोग और नरक चतुर्दशी की कथा

दिवाली 2026 की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बार छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली अलग-अलग दिनों में नहीं, बल्कि एक ही दिन मनाए जाने की बात सामने आ रही है। इसकी वजह कार्तिक मास की चतुर्दशी और अमावस्या तिथि का विशेष संयोग है। आमतौर पर नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली और लक्ष्मी पूजन वाली बड़ी दिवाली अलग-अलग दिन मनाई जाती हैं, लेकिन इस बार तिथियों के मेल से दोनों पर्व 8 नवंबर को मनाए जाने का विधान बताया जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस बार दिवाली की सही तारीख क्या है और पूजा के लिए कौन-सा दिन महत्वपूर्ण रहेगा।

कब मनाई जाएगी छोटी दिवाली 2026?
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने, शरीर पर उबटन लगाने और दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

पंडित राकेश झा के अनुसार, इस साल तिथियों का संयोग कुछ अलग बन रहा है। चतुर्दशी तिथि और उससे जुड़े स्नान के विधान को ध्यान में रखते हुए 8 नवंबर को छोटी दिवाली मनाने की बात कही गई है। इसी वजह से इस बार नरक चतुर्दशी और दीपावली एक ही दिन पड़ने का संयोग बन रहा है।

8 नवंबर को ही होगा बड़ी दिवाली का पूजन
बड़ी दिवाली यानी दीपावली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन प्रदोष काल में अमावस्या तिथि रहने पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है। पंडित राकेश झा के मुताबिक, इस बार 8 नवंबर को अमावस्या तिथि सुबह 11 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी, जो 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी।

चूंकि 8 नवंबर की शाम प्रदोष काल में अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन करना शास्त्र सम्मत बताया गया है। इस आधार पर 8 नवंबर 2026 को ही बड़ी दिवाली मनाई जाएगी। इस तरह छोटी और बड़ी दिवाली दोनों एक ही दिन मनाने का संयोग बन रहा है।

क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली का संबंध राक्षस नरकासुर के वध से जुड़ा है। कथा के मुताबिक, नरकासुर ने अपनी शक्तियों के बल पर 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से देवता, ऋषि और आम लोग परेशान थे। आखिरकार सभी ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी।

इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर बंदी बनाई गई स्त्रियों को मुक्त कराया। मान्यता है कि नरकासुर के अंत की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। चूंकि यह घटना चतुर्दशी तिथि से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाने लगा। इस बार दिवाली से जुड़ी तिथियों का विशेष संयोग होने के कारण 8 नवंबर का दिन धार्मिक रूप से खास माना जा रहा है।

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