पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका ने इजराइल समेत क्षेत्र के कई देशों में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान 10 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य मालवाहक विमान दक्षिणी इजराइल के एयरबेस पर पहुंचे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना के शीर्ष कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के साथ अहम बैठक की। इस घटनाक्रम के बाद ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक अमेरिका की ओर से ईरान पर नए हमले का कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इजराइल पहुंचे अमेरिकी सैन्य विमान
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में अमेरिका के कई सैन्य मालवाहक विमानों ने दक्षिणी इजराइल के नेवातिम और ओवदा एयरबेस पर लैंडिंग की है। विमान ट्रैकिंग डेटा पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें से अधिकतर विमान टेक्सास स्थित बिग्स आर्मी एयरफील्ड से रवाना हुए थे।
इन विमानों के जरिए किस तरह का सैन्य सामान पहुंचाया गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में तेजी को संभावित संघर्ष की तैयारी और हवाई सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
अमेरिका की गतिविधियां केवल इजराइल तक सीमित नहीं हैं। सऊदी अरब, कतर, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी कई विमान पहुंचे हैं। इसके अलावा, अमेरिका टेक्सास से पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की एक बैटरी पश्चिम एशिया भेज रहा है। यह प्रणाली दुश्मन की ओर से दागी जाने वाली मिसाइलों को हवा में रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
ट्रम्प और अमेरिकी सैन्य कमांडर की मुलाकात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में एडमिरल ब्रैड कूपर से मुलाकात की। कूपर पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना की कमान संभालते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा हुई।
बैठक में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन भी शामिल थे। इस स्तर पर सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में पहले से ही अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ सीमित लेकिन तेज सैन्य अभियान के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। संभावित लक्ष्यों में ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठान, परमाणु केंद्र और मिसाइल व ड्रोन से जुड़े भंडार शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह फिलहाल रिपोर्ट में सामने आया संभावित विकल्प है, किसी घोषित सैन्य अभियान की पुष्टि नहीं। ट्रम्प के पास सैन्य कार्रवाई को टालने का विकल्प भी मौजूद है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।
चुनाव के बाद हमले की अटकलें क्यों तेज हुईं?
ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई की चर्चाएं ऐसे समय तेज हुई हैं, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजराइल चुनाव के बाद ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
ऊर्जा प्रतिष्ठानों और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने जैसी कार्रवाई का जिक्र इस बात की ओर संकेत करता है कि संभावित अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना हो सकता है। हालांकि, ऐसे किसी भी हमले से क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक होने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रम्प प्रशासन किसी सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देगा या कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देगा। सैन्य तैनाती में बढ़ोतरी अपने आप में हमले की पुष्टि नहीं करती।
ईरान पर अमेरिकी और इजराइली चुनावों में दखल के आरोप
इस तनाव के बीच ईरान पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप भी सामने आए हैं। ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर इजराइल के चुनाव को प्रभावित करने और अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में दखल देने की तैयारी करने के आरोप लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि इसके लिए एजेंटों की भर्ती और अमेरिकी चुनाव प्रणाली को निशाना बनाने वाले साइबर समूह तैयार करने की कोशिश की गई। एक अधिकारी के मुताबिक, ईरान ऐसी गतिविधियों को अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष का हिस्सा मानता है और दोनों देशों के नागरिकों के बीच मतभेद बढ़ाना चाहता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनसे जुड़े ठोस सबूतों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं है। इजराइल में भी चुनावी प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका को लेकर जांच की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने गुरुवार को सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
शांति वार्ता की कोशिशें भी जारी, ईरान ने रखीं शर्तें
सैन्य हलचल के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ईरान ने गुरुवार को बताया कि उसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक पत्र मिला है, लेकिन उस पर अभी जवाब नहीं दिया गया है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र का उद्देश्य दोनों देशों के बीच शांति वार्ता दोबारा शुरू करने का रास्ता तलाशना था। दूसरी ओर, ट्रम्प ने पत्र के उद्देश्य को लेकर अलग जानकारी दी। उनके मुताबिक, वेंस ने ईरान से शांति वार्ता के लिए नहीं, बल्कि मेडिकल सामान और दूसरी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े मामले पर संपर्क किया था। ट्रम्प ने कहा कि ईरान की इस मांग पर उन्होंने मदद की अनुमति दे दी। ईरान ने अमेरिका के सामने रखी गई अपनी सात शर्तों को पूरा करने की मांग भी दोहराई है।
होर्मुज स्ट्रेट के पास तीन टैंकरों में धमाके
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में तीन टैंकर समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों से टकरा गए, जिसके बाद उनमें धमाके हुए और आग लग गई।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, ये टैंकर होर्मुज के दक्षिण में ऐसे समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जिसका इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी। ईरानी पक्ष ने दावा किया कि जहाजों ने अपने रडार और नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए थे और नौसेना की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह की सैन्य या समुद्री बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और जहाजरानी पर पड़ सकता है।
क्या पश्चिम एशिया में फिर बड़ा संघर्ष शुरू होगा?
अमेरिकी सैन्य विमानों की बढ़ती आवाजाही, पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की तैनाती और ट्रंप की शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक ने ईरान को लेकर नई अटकलों को हवा दी है। दूसरी तरफ, संभावित शांति वार्ता और मेडिकल सहायता से जुड़े संपर्क यह भी दिखाते हैं कि कूटनीतिक विकल्प अभी खुले हो सकते हैं।

