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Mother of All Bombs क्या है? ईरान के अहम ठिकानों पर हमले की तैयारी में अमेरिका, जानिए MOAB की ताकत

Mother of All Bombs क्या है? ईरान के अहम ठिकानों पर हमले की तैयारी में अमेरिका, जानिए MOAB की ताकत

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान के विकल्पों पर विचार कर रहा है। संभावित निशाने में बिजली उत्पादन केंद्रों और परमाणु ठिकानों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों के नाम सामने आ रहे हैं। इसी बीच दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बमों में शामिल Mother of All Bombs (MOAB) का नाम भी सुर्खियों में है। हालांकि, इस बम के इस्तेमाल को लेकर अभी किसी अंतिम फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या है Mother of All Bombs और क्यों है इसकी चर्चा?
अमेरिका के इस विशाल बम का आधिकारिक नाम GBU-43/B Massive Ordnance Air Blast है। इसे संक्षेप में MOAB कहा जाता है। इसका वजन करीब 9,800 किलोग्राम है और इसे पारंपरिक विस्फोटक हथियारों की श्रेणी में रखा जाता है। यानी यह परमाणु बम नहीं है, बल्कि इसकी ताकत एक बड़े विस्फोट और उससे पैदा होने वाली दबाव तरंग पर निर्भर करती है।

इस हथियार को खास तौर पर बड़े क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। इसके विस्फोट से आसपास की इमारतों, सैन्य ठिकानों और दूसरे ढांचों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। हालांकि, वास्तविक नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि बम कहां गिरता है, वहां किस तरह की संरचनाएं मौजूद हैं और विस्फोट के समय परिस्थितियां कैसी हैं।

ईरान में किन ठिकानों पर हो सकता है हमला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की संभावित सैन्य रणनीति में ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। बिजली उत्पादन केंद्र किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन के लिए बेहद अहम होते हैं। वहीं, परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को लेकर अमेरिका लंबे समय से अपनी चिंताएं जाहिर करता रहा है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि MOAB को ईरान के किसी खास परमाणु ठिकाने को नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किए जाने की खबर अभी एक संभावित परिदृश्य है, जिसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। MOAB मुख्य रूप से सतह के ऊपर या उसके आसपास बड़े क्षेत्र में विस्फोटक प्रभाव पैदा करने के लिए जाना जाता है। जमीन के काफी नीचे बने मजबूत बंकरों को नष्ट करने के लिए दूसरे प्रकार के विशेष बंकर-भेदी हथियार अधिक उपयुक्त हो सकते हैं।

क्या ट्रंप ने हमले को मंजूरी दे दी है?
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी प्रशासन संभावित सैन्य कार्रवाई के विभिन्न विकल्पों पर विचार कर सकता है। हालांकि, किसी योजना पर चर्चा होना और उसे लागू करने की आधिकारिक मंजूरी मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल MOAB के इस्तेमाल को लेकर अंतिम आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति का प्रमुख मुद्दा यह रहा है कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। इसी उद्देश्य को लेकर अमेरिका कूटनीतिक दबाव और सैन्य विकल्पों पर चर्चा करता रहा है। लेकिन किसी नए अभियान का फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा, संभावित जवाबी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करेगा।

पहली बार कब इस्तेमाल हुआ था MOAB?
GBU-43/B को इराक युद्ध के दौर में विकसित किया गया था, लेकिन इसका पहला वास्तविक युद्धक इस्तेमाल अप्रैल 2017 में अफगानिस्तान में हुआ। अमेरिकी सेना ने इस बम को इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के खिलाफ एक गुफा और सुरंगों वाले इलाके में गिराया था। उस समय यह हमला दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया था।

इस बम की खासियत इसका विशाल आकार और विस्फोटक क्षमता है। फिर भी इसे परमाणु हथियारों के बराबर मानना सही नहीं होगा। परमाणु विस्फोट के प्रभाव कहीं अधिक व्यापक हो सकते हैं और उनमें विकिरण का खतरा भी शामिल होता है।

ईरान-अमेरिका संघर्ष में कितना अहम होगा यह हथियार?
अगर अमेरिका भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी नए सैन्य अभियान का फैसला करता है, तो MOAB जैसे हथियार का नाम चर्चा में आना स्वाभाविक है। लेकिन केवल किसी शक्तिशाली बम की मौजूदगी से यह तय नहीं होता कि युद्ध का रुख बदल जाएगा। सैन्य कार्रवाई के नतीजे, जवाबी हमले की आशंका, क्षेत्रीय स्थिरता और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।

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