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रिश्वत लेते पकड़े गए रेलवे इंजीनियर को 4 साल की सजा, CBI अदालत ने लगाया 10 हजार रुपये जुर्माना

रिश्वत लेते पकड़े गए रेलवे इंजीनियर को 4 साल की सजा, CBI अदालत ने लगाया 10 हजार रुपये जुर्माना

गाजियाबाद। रिश्वतखोरी के एक मामले में गाजियाबाद की सीबीआई अदालत ने रेलवे के तत्कालीन सीनियर सेक्शन इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल), ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (TRD) सुख देव शर्मा को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामला करीब एक दशक पुराना है, जिसमें रेलवे से जुड़ी अनुमति देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था।

70 हजार रुपये रिश्वत मांगने का था आरोप
सीबीआई के मुताबिक, मामले की शुरुआत 1 जनवरी 2016 को हुई थी। आरोप था कि सुख देव शर्मा ने मुंबई की एक निजी कंपनी के पांच ट्रेलर/वाहनों को आगरा में रेल गेट पथोल के पास रेलवे ट्रैक पार कराने की अनुमति देने के बदले शिकायतकर्ता से 70 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई और उसी दिन ट्रैप ऑपरेशन किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस दौरान आरोपी को शिकायतकर्ता से 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। सीबीआई ने इसे कथित तौर पर मांगी गई कुल रिश्वत की पहली किस्त बताया था।

शिकायत के बाद CBI ने बिछाया था जाल
सीबीआई की कार्रवाई के बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच एजेंसी ने आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने के बाद 23 फरवरी 2016 को आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत ने 21 मार्च 2016 को आरोप तय किए और मामले की न्यायिक सुनवाई आगे बढ़ी। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य और अन्य दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए गए। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में दोषी माना।

करीब 10 साल बाद आया अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 10 सितंबर 2026 को गाजियाबाद की सीबीआई अदालत ने सुख देव शर्मा को चार साल की सजा सुनाई। अदालत ने कारावास के साथ 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। सीबीआई के अनुसार, मामला सरकारी पद पर रहते हुए आधिकारिक जिम्मेदारी से जुड़ी अनुमति देने के बदले कथित तौर पर अवैध रकम मांगने और स्वीकार करने का था।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का संदेश
सीबीआई ने अदालत के फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण माना है। एजेंसी का कहना है कि सरकारी पद का इस्तेमाल किसी वैध सरकारी प्रक्रिया के बदले निजी लाभ हासिल करने के लिए नहीं किया जा सकता। करीब दस साल पुराने इस मामले में आए फैसले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका को सामने रखा है। रेलवे से जुड़े आधिकारिक काम के बदले रिश्वत लेने के आरोप में दोषी ठहराए गए अधिकारी को अब चार वर्ष की सजा भुगतनी होगी।

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