लखनऊ। देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर शुक्रवार को कर्मचारियों की एक दिवसीय हड़ताल का असर देखने को मिला। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के कई प्रमुख बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी आंदोलन में शामिल हुए। लखनऊ में भी बैंक कर्मचारियों ने हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक के बाहर प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। यूनियन का दावा है कि करीब 99 प्रतिशत कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल हैं।
हड़ताल की वजह से बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज प्रभावित रहा। हालांकि डिजिटल बैंकिंग, UPI और ATM जैसी सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की संभावना जताई गई है। कर्मचारियों ने साफ किया है कि यह आंदोलन केवल एक दिन की हड़ताल तक सीमित नहीं रहेगा। यदि उनकी मांगों पर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो सितंबर के अंत में दोबारा तीन दिन की हड़ताल और इसके बाद अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
5 डे वर्किंग सबसे बड़ी मांग, दो साल पुराने समझौते का हवाला
बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन काम यानी 5 डे वर्किंग लागू करने की है। यूनियन नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार और बैंक कर्मचारियों के बीच करीब दो साल पहले सहमति बन चुकी थी, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रदेश अध्यक्ष एसके संतानी के मुताबिक, कर्मचारियों की मांग है कि शनिवार और रविवार को अवकाश की व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि बैंक कर्मचारी काम के घंटों को लेकर जरूरी बदलाव के लिए तैयार हैं, लेकिन सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था होनी चाहिए।
यूनियन का तर्क है कि भारतीय रिजर्व बैंक और एलआईसी जैसे संस्थानों में पांच दिन काम की व्यवस्था पहले से लागू है। ऐसे में बैंक कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि इससे उन्हें परिवार और निजी जीवन के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और काम करने की क्षमता तथा गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है।
15 साल पुरानी मांग, अब आंदोलन तेज करने की तैयारी
यूपी बैंक संगठन के जनरल सेक्रेटरी बीके सेंगर ने कहा कि 5 डे वर्किंग की मांग अचानक नहीं उठी है, बल्कि यह पिछले करीब 15 वर्षों से कर्मचारियों के बीच प्रमुख मुद्दा रही है। उनके मुताबिक करीब ढाई साल पहले सरकार के साथ हुए समझौते में भी इस मुद्दे को शामिल किया गया था, लेकिन इसके बावजूद इसे लागू नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी लगातार अपनी मांग सरकार के सामने रखते रहे हैं। अब आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है। सेंगर के मुताबिक मौजूदा हड़ताल के बाद 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिन की हड़ताल प्रस्तावित है। यदि इसके बाद भी मांगों पर सहमति नहीं बनी तो अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण कर्मचारियों की एक दिन की सैलरी कट सकती है, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
PLI में समान व्यवस्था की मांग
बैंक कर्मचारियों की दूसरी बड़ी मांग प्रोडक्टिविटी लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI को लेकर है। यूनियनों ने आरोप लगाया है कि मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रोडक्टिविटी इंसेंटिव को लेकर अलग-अलग बैंकों में अलग व्यवस्था होने से कर्मचारियों में असंतोष है।
यूनियन चाहती है कि सभी बैंक कर्मचारियों के लिए एक कॉमन PLI सिस्टम तैयार किया जाए। इसके लिए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के साथ बातचीत कर समान व्यवस्था तय करने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियां व्यापक हैं। इसलिए इंसेंटिव की व्यवस्था भी ऐसी होनी चाहिए, जिसमें कर्मचारियों के बीच किसी तरह का भेदभाव महसूस न हो।
द्विपक्षीय समझौते से जुड़े लंबित मुद्दे भी उठाए
हड़ताल की तीसरी प्रमुख मांग द्विपक्षीय समझौते से जुड़े लंबित रीजनल मुद्दों के समाधान की है। यूनियन के मुताबिक इन मुद्दों पर कई स्तरों पर बातचीत होती रही है, लेकिन अभी तक ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों से जुड़े विषयों को लेकर लगातार आंदोलन की स्थिति न बने। यूनियन ने सरकार और संबंधित पक्षों से इस मामले में गंभीरता से बातचीत करने की मांग की है।
अरुण मिश्रा बोले- जब समझौता हो चुका तो लागू क्यों नहीं?
बैंक कर्मचारी अरुण मिश्रा ने 5 डे वर्किंग की मांग को कर्मचारियों के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि जब इस मुद्दे पर करीब दो साल पहले समझौता हो चुका है तो उसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अपनी मांग के लिए एक दिन की तनख्वाह गंवाकर हड़ताल करनी पड़ रही है।
उनका कहना है कि बैंक कर्मचारियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो रोजाना दूर-दराज के इलाकों से अपने कार्यस्थल तक पहुंचते हैं। पांच दिन काम की व्यवस्था होने से उन्हें परिवार और निजी जीवन के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बैंक कर्मचारी काम के समय में आवश्यक बदलाव के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि 5 डे वर्किंग लागू होने से केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि बैंक ग्राहकों को भी बेहतर सेवाएं देने में मदद मिल सकती है।
विजय सिंह ने सरकार पर लगाया हठधर्मिता का आरोप
बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी विजय सिंह ने सरकार पर कर्मचारियों की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 5 डे वर्किंग को लेकर पहले ही समझौता हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद उसे लागू नहीं किया जा रहा।
विजय सिंह के मुताबिक बैंकिंग क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी काम करती हैं, जिनमें कई कर्मचारी दूर-दराज के क्षेत्रों से आती-जाती हैं। ऐसे में पांच दिन की कार्य व्यवस्था उनके लिए भी राहत देने वाली हो सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए पहले हुए समझौते को लागू किया जाए।
28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल की तैयारी
बैंक यूनियनों ने मौजूदा आंदोलन के बाद भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। कर्मचारियों के मुताबिक यदि सरकार ने तीनों प्रमुख मांगों पर जल्द कोई समाधान नहीं निकाला तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिन की हड़ताल की जाएगी।
इसके बाद भी अगर मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। यानी आने वाले दिनों में बैंकिंग सेवाओं पर आंदोलन का असर और बढ़ सकता है।
बैंक सेवाओं पर क्या पड़ेगा असर?
एक दिवसीय हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में कैश जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, बैंक काउंटर सेवाओं और अन्य नियमित कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि डिजिटल बैंकिंग, UPI और ATM जैसी सेवाओं के चलते ग्राहकों को कुछ वैकल्पिक सुविधाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। उनका दावा है कि जिन मुद्दों पर पहले सहमति बन चुकी है, उनके क्रियान्वयन के लिए भी आंदोलन की स्थिति बनना चिंता का विषय है।
फिलहाल बैंक यूनियनों और सरकार के बीच आगे होने वाली बातचीत पर कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों की नजर रहेगी। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकला तो सितंबर के अंत की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल और अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन बैंकिंग सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

