भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नई मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की घोषणा करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। इस निर्णय का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो होम लोन, कार लोन या अन्य बैंक ऋण की EMI में कटौती की उम्मीद कर रहे थे। ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से फिलहाल कर्ज की मासिक किस्तों में राहत मिलने की संभावना टल गई है।
महंगाई पर RBI की नजर, फिलहाल सतर्क रुख
मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हाल के महीनों में महंगाई का दबाव अनुमान से कुछ कम जरूर रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। उनके अनुसार खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतें अभी भी महंगाई को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारक बने हुए हैं। हालांकि, इन बढ़ी हुई लागतों का असर अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर सीमित दिखाई दे रहा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की संभावना
आरबीआई का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही तक खुदरा महंगाई में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके पीछे मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में संभावित तेजी है। हालांकि इसके बाद महंगाई के धीरे-धीरे नियंत्रित होने की उम्मीद भी जताई गई है। केंद्रीय बैंक ने पूरे वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत रखा है, जो पहले के अनुमान से थोड़ा कम है।
वैश्विक परिस्थितियां भी बनी हुई हैं चुनौती
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसे कारक हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और अल-नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियां महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। यदि खाद्य उत्पादन प्रभावित होता है या ऊर्जा की कीमतों में तेजी आती है तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत की उम्मीद
गवर्नर ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर पड़ सकता है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलाव और विविधता से इस दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे उत्पादन गतिविधियों को गति मिलने और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।
GDP ग्रोथ अनुमान में सुधार, अर्थव्यवस्था पर भरोसा बरकरार
महंगाई को लेकर सतर्क रहने के बावजूद आरबीआई ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर भरोसा जताया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.6 प्रतिशत था। खासतौर पर दूसरी तिमाही के विकास अनुमान में सुधार किया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि फिलहाल बैंकों के लिए ब्याज दरें घटाने का दबाव नहीं बनेगा। ऐसे में होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों की EMI में तत्काल कोई कमी आने की संभावना नहीं है। हालांकि, बढ़ा हुआ GDP अनुमान यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रण में रहती है, तो भविष्य की मौद्रिक नीतियों में ब्याज दरों को लेकर राहत मिलने की उम्मीद फिर से बन सकती है।

