लाल सागर (Red Sea) में समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। यमन के तट के निकट भारतीय ध्वज वाले एक कारोबारी जहाज पर कथित तौर पर हूती विद्रोहियों ने हमला कर दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विस्फोटकों से भरी एक आत्मघाती नाव जहाज से टकरा गई, जिससे जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और वह समुद्र में डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी 13 भारतीय नागरिकों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया और उनकी जान बच गई।
भारत सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति
घटना के बाद भारत सरकार ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। साथ ही यमन के संबंधित अधिकारियों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जा रही है।
लाल सागर में बढ़ता खतरा
पिछले कुछ महीनों से लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए संवेदनशील क्षेत्र बने हुए हैं। इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में किसी भी हमले का असर केवल एक जहाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग कंपनियों की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ता है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी अनिश्चितता
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। अब तक बातचीत की तारीख और स्थान तय नहीं हुआ है। कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के रूप में सामने आए हैं और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराने की कोशिशें जारी हैं।
ईरान की नई रणनीति पर बढ़ी चर्चा
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय समुद्री व्यापार मार्गों, तेल आपूर्ति और रणनीतिक शिपिंग रूट्स पर दबाव बनाकर अपने विरोधियों पर आर्थिक और रणनीतिक असर डालने की नीति पर काम कर रहा है। इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे एक MQ-9 रीपर ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि ड्रोन किस देश का था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
शिपिंग कंपनियों ने बदला समुद्री मार्ग
हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अब लाल सागर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री रास्ता अपनाने लगी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, छह सऊदी सुपरटैंकरों ने भी सुरक्षा कारणों से अपना मार्ग बदल दिया है। इससे न केवल यात्रा की अवधि बढ़ रही है, बल्कि परिवहन लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या बढ़ेगा समुद्री सुरक्षा पर वैश्विक फोकस?
भारतीय जहाज पर हुआ यह हमला एक बार फिर संकेत देता है कि लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार गहराती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक शक्तियों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

