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BJP का नई टीम पर दांव…7 मोर्चों के प्रभारियों का किया ऐलान, संगठन के अलग-अलग हिस्सों को चुनावी मशीनरी की तरह कर रही एक्टिव

BJP का नई टीम पर दांव…7 मोर्चों के प्रभारियों का किया ऐलान, संगठन के अलग-अलग हिस्सों को चुनावी मशीनरी की तरह कर रही एक्टिव

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन को चुनावी तैयारियों की दिशा में आगे बढ़ाते हुए अपने 7 प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा कर दी है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद हुई इन नियुक्तियों को संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। युवा, महिला, किसान, अनुसूचित जाति, ओबीसी, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक मोर्चों के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का संकेत दिया है।

नई व्यवस्था में अनुभवी नेताओं के साथ ऐसे चेहरों को भी जिम्मेदारी मिली है, जिनका संगठन और चुनावी राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। युवा मोर्चे का प्रभार उत्तर प्रदेश के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को दिया गया है, जबकि राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को अनुसूचित जनजाति (ST) मोर्चे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला मोर्चे की कमान वरिष्ठ नेता डी. पुरंदेश्वरी को दी गई है।

सात मोर्चे, सात चेहरे और अलग-अलग सामाजिक लक्ष्य
बीजेपी ने युवा मोर्चे के लिए हरीश द्विवेदी, महिला मोर्चे के लिए डी. पुरंदेश्वरी, अनुसूचित जाति मोर्चे के लिए संजय भाटिया, ओबीसी मोर्चे के लिए बैजयंत पांडा, किसान मोर्चे के लिए लाल सिंह आर्या, एसटी मोर्चे के लिए सतीश पूनिया और अल्पसंख्यक मोर्चे के लिए गजेंद्र पटेल को जिम्मेदारी दी है।

इन नियुक्तियों का महत्व केवल पदों के बंटवारे तक सीमित नहीं है। ये मोर्चे बीजेपी के लिए अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए इनके प्रभारियों का चयन संगठन के साथ-साथ चुनावी रणनीति के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। इन नेताओं को संबंधित मोर्चों की कार्यकारिणी तैयार करने, राज्यों में प्रभारियों की नियुक्ति और प्रदेश स्तर पर संगठन को सक्रिय करने में मदद करनी होगी। पार्टी ने सभी प्रभारियों को संबंधित राष्ट्रीय अध्यक्षों के साथ समन्वय करके काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे की जिम्मेदारी क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश के बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। वह 2014 और 2019 में बस्ती से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं और बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव की भूमिका भी निभा चुके हैं। युवा मोर्चे की जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है जब राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाता लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

सोशल मीडिया से लेकर बूथ स्तर तक युवा कार्यकर्ताओं की सक्रियता चुनावी अभियान का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में हरीश द्विवेदी के सामने संगठन के युवा नेटवर्क को और सक्रिय करने की चुनौती होगी। बीजेपी की रणनीति में युवा मोर्चा सिर्फ छात्र और युवा राजनीति तक नहीं सीमित है, बल्कि इसके साथ डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया नैरेटिव और नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने में भी इसकी भूमिका बढ़ी है।

ST मोर्चे पर सतीश पूनिया
राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को ST मोर्चे की जिम्मेदारी देना भी संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पूनिया आमेर से विधायक रह चुके हैं और राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। आदिवासी क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना बीजेपी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में सतीश पूनिया जैसे अनुभवी नेता को ST मोर्चे की जिम्मेदारी देकर पार्टी संगठन को राज्यों तक मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

महिला और OBC मोर्चे पर अनुभवी चेहरों पर भरोसा
डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। आंध्र प्रदेश की वरिष्ठ बीजेपी नेता पुरंदेश्वरी कांग्रेस में भी रह चुकी हैं और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। वह दो बार लोकसभा सदस्य भी रही हैं और बीजेपी की आंध्र प्रदेश इकाई की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वहीं ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी बैजयंत पांडा को मिली है। ओडिशा से लोकसभा सांसद पांडा बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। इससे पहले वह बीजेडी के साथ राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों के सदस्य रह चुके हैं।

ओबीसी सामाजिक समीकरणों में बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण वर्ग है। ऐसे में इस मोर्चे की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी नेता को देना संगठन के लिए खास मायने रखता है।

किसान और SC मोर्चे पर भी बड़ा फोकस
किसान मोर्चे का प्रभार मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता लाल सिंह आर्या को सौंपा गया है। वह गोहद से कई बार विधायक रह चुके हैं और शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा वह बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

SC मोर्चे की जिम्मेदारी संजय भाटिया को दी गई है। करनाल से 2019 में लोकसभा सांसद रहे भाटिया बीजेपी हरियाणा के प्रदेश महासचिव रह चुके हैं और वर्ष 2026 में हरियाणा से राज्यसभा के लिए चुने गए।

वहीं अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के खरगोन से लोकसभा सांसद गजेंद्र पटेल को मिली है। पटेल 2019 और 2024 में खरगोन से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।

मध्य प्रदेश को मिला खास प्रतिनिधित्व
सात मोर्चा प्रभारियों में मध्य प्रदेश के दो नेताओं – लाल सिंह आर्या और गजेंद्र पटेल को जगह मिली है। यह तथ्य भी संगठनात्मक दृष्टि से ध्यान खींचता है। मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए मजबूत संगठनात्मक आधार वाला राज्य है और वहां के नेताओं को राष्ट्रीय जिम्मेदारी देना पार्टी के भरोसे को दर्शाता है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के नेताओं को जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने क्षेत्रीय अनुभव को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ने की कोशिश की है।

राष्ट्रीय संगठन में भी बड़े बदलाव
मोर्चा प्रभारियों की घोषणा बीजेपी की व्यापक संगठनात्मक पुनर्रचना का हिस्सा है। इससे पहले पार्टी ने प्रमुख मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों का भी ऐलान किया था। युवा मोर्चे की कमान गुजरात के लोकसभा सांसद डॉ. हेमांग जोशी को, महिला मोर्चे की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ की रूप कुमारी चौधरी को, किसान मोर्चे का नेतृत्व मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बंसीलाल गुर्जर को और ओबीसी मोर्चे की कमान अमरपाल मौर्य को दी गई। इसी तरह शिवेश कुमार राम को SC मोर्चा, मन्नालाल रावत को ST मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

स्मृति ईरानी की वापसी से संगठन को नया संदेश
नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महासचिव के साथ उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है, जबकि सुनील बंसल भी राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका में बने हुए हैं। बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव संगठन की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। तरुण चुघ को केंद्रीय कार्यालय का प्रभारी बनाया गया है, जबकि संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव और संबित पात्रा को नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी मिली है।

चुनावी मोड में बीजेपी का संगठन
इन नियुक्तियों को अगर व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जाए तो बीजेपी का लक्ष्य संगठन को दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय राज्यों और बूथ स्तर तक सक्रिय करना दिखाई देता है, साथ ही हर वर्ग के वोटरों को साधने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के लिए बने मोर्चों को सक्रिय करके कई स्तरों पर राजनीतिक संवाद बढ़ाना चाहती है।

युवा मतदाताओं के लिए डिजिटल और जमीनी नेटवर्क, किसानों के लिए संगठनात्मक पहुंच, OBC और SC समुदायों में सामाजिक संपर्क, महिलाओं के बीच संवाद और आदिवासी क्षेत्रों में संगठन विस्तार इन सभी मोर्चों को एक साथ मजबूत करने की कोशिश इस नई व्यवस्था में दिखाई दे रही है। हम कह सकते हैं बीजेपी ने पदों का बंटवारा करके संगठन के अलग-अलग हिस्सों को चुनावी मशीनरी की तरह सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब इन प्रभारियों की असली परीक्षा राज्यों में टीम तैयार करने और उसे बूथ स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने में होगी।

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