पणजी। मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में लगातार हो रही देरी को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नाराजगी जताई है। बुधवार को पणजी में छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान गडकरी ने कहा कि इस परियोजना में देरी को लेकर उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि जिस काम को वर्ष 2016 तक पूरा हो जाना चाहिए था, वह करीब 15 साल बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है।
देरी पर गडकरी ने जताई नाराजगी
गडकरी ने कहा कि मुंबई-गोवा हाईवे का चौड़ीकरण लंबे समय से चल रहा है और इसमें कई स्तरों पर देरी हुई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाईवे का काम पूरा होने के बाद वह इसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि वह ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, जिनकी वजह से सड़क परियोजनाओं की गति और गुणवत्ता प्रभावित होती है। उनका यह बयान निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की जवाबदेही को लेकर सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। गडकरी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में खराब गुणवत्ता के काम के लिए 103 ठेकेदारों और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इन पर जुर्माना भी लगाया गया है।
2011 में शुरू हुआ था चौड़ीकरण का काम
मुंबई-गोवा हाईवे को दो लेन से चार लेन में बदलने की परियोजना वर्ष 2011 में शुरू हुई थी। पनवेल से पणजी तक इस मार्ग का चौड़ीकरण अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है। शुरुआती योजना के मुताबिक इसे 2016 तक पूरा किया जाना था, लेकिन जमीन अधिग्रहण, निर्माण से पहले जरूरी मंजूरियों और कुछ ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं के कारण परियोजना लगातार पिछड़ती गई। केंद्र सरकार ने 2024 में संसद में भी परियोजना में देरी के पीछे जमीन अधिग्रहण और कुछ ठेकेदारों की आर्थिक परेशानियों को प्रमुख कारण बताया था।
440 किलोमीटर के मार्ग पर अब भी कई चुनौतियां
मुंबई-गोवा हाईवे का महाराष्ट्र वाला हिस्सा रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय जिलों से होकर गुजरता है। करीब 440 किलोमीटर लंबे हिस्से में काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, लेकिन कई स्थानों पर सड़क की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। गड्ढे, जलभराव, मरम्मत कार्य और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। हाईवे के खारपाड़ा टोल प्लाजा पर इसी साल मई में टोल वसूली भी शुरू कर दी गई। इसके बावजूद परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण और सुधार से जुड़े काम जारी हैं।
लागत बढ़ी, समय भी खिंचता गया
परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 14,106 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर लगभग 19,469 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। लंबे समय तक चल रहे निर्माण के कारण लागत में बढ़ोतरी भी परियोजना की बड़ी चुनौतियों में शामिल है। हाईवे का उद्देश्य मुंबई को कोंकण के रास्ते गोवा से बेहतर सड़क संपर्क देना है। परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई से गोवा की सड़क यात्रा का समय करीब 12 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे होने की उम्मीद है। इससे पर्यटन के साथ-साथ तटीय महाराष्ट्र के स्थानीय कारोबार और परिवहन को भी फायदा मिल सकता है।
हाईवे के किनारे पेड़ लगाने पर भी गडकरी की सलाह
उद्घाटन कार्यक्रम में गडकरी ने हाईवे के किनारे हरियाली और लैंडस्केपिंग को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सड़क के किनारे मनमाने तरीके से पेड़ लगाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से लैंडस्केपिंग की जानी चाहिए। उन्होंने ऐसी प्रजातियों के चयन पर जोर दिया, जो अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखें और ऑक्सीजन छोड़ें। गडकरी के मुताबिक, हाईवे निर्माण के साथ पर्यावरण और सड़क सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

