नई दिल्ली। दिल्ली में पढ़ाई और बेहतर करियर की उम्मीद लेकर आने वाले हजारों छात्रों के लिए सुरक्षित आवास का सवाल अब गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद निजी PG, गेस्ट हाउस और किराए के मकानों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने छात्रों से सीधे संवाद करने और उनके इलाके की समस्याओं को समझने की नई पहल शुरू की है।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर अब थानों के SHO और सब-डिविजन स्तर पर तैनात ACP छात्रों से नियमित बातचीत करेंगे। इस दौरान केवल कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसर ही नहीं, बल्कि वे इलाके भी पुलिस की पहुंच में होंगे जहां बड़ी संख्या में छात्र PG, गेस्ट हाउस या किराए के मकानों में रहते हैं।
सत्य निकेतन के आसपास दिखी छात्र आवास की दूसरी तस्वीर
सत्य निकेतन में MCD की कार्रवाई के दौरान सामने आई स्थिति ने आसपास के छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे वाली जगह के नजदीक स्थित मोची गांव में बड़ी संख्या में PG और गेस्ट हाउस संचालित होने की बात सामने आई है। इन जगहों पर हजारों छात्रों के रहने की जानकारी है।
स्थानीय इलाके की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। कई इमारतें पुरानी और जर्जर बताई जा रही हैं, जबकि मोची गांव की गलियां बेहद संकरी हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस या राहत-बचाव दलों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यानी सवाल सिर्फ उस इमारत तक सीमित नहीं है, जहां हादसा हुआ। आसपास मौजूद दूसरे छात्र आवास भी सुरक्षा के लिहाज से कितने तैयार हैं, अब यह सवाल भी उतनी ही गंभीरता से सामने आया है।
दोपहर में भी अंधेरी गलियां, संकरे रास्तों ने बढ़ाई चिंता
इलाके की स्थिति को वहां रहने वाले छात्र वंदन कोठारी ने करीब से दिखाया। वह हादसे वाली जगह से लगभग 100 कदम की दूरी पर स्थित एक संकरी गली में लेकर गए। खास बात यह रही कि दोपहर के वक्त भी गली में पर्याप्त रोशनी नहीं थी। रास्ता इतना संकरा बताया गया कि दो लोगों के लिए एक साथ निकलना भी आसान नहीं था। उस समय गली में ज्यादा भीड़ नहीं थी, जिसकी वजह छात्र ने यह बताई कि दिन के समय अधिकतर छात्र कॉलेज या नौकरी के सिलसिले में बाहर रहते हैं।
वंदन ने बताया कि वह खुद सामने की एक इमारत में बने PG में रहते हैं। उनके मुताबिक आसपास की कई इमारतों की हालत अच्छी नहीं है और मोची गांव की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब नजर आती है। ऐसे में हादसे के बाद केवल एक इमारत पर कार्रवाई करना पर्याप्त होगा या आसपास के पूरे छात्र आवास क्षेत्र की सुरक्षा की समीक्षा करनी होगी, यह बड़ा सवाल है।
अब छात्रों से सीधे जुड़ेगी स्थानीय पुलिस
छात्रों की इन्हीं चिंताओं के बीच पुलिस ने आउटरीच अभियान शुरू करने का फैसला किया है। LG के निर्देश के मुताबिक SHO और ACP छात्रों के साथ सीधे संवाद करेंगे और उनसे उनके इलाके से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेंगे। इस बातचीत में अपराध, उत्पीड़न, महिला सुरक्षा, मकान या PG से जुड़े विवाद और स्थानीय स्तर की दूसरी परेशानियों को शामिल किया जाएगा। पुलिस की जिम्मेदारी समस्याओं को सुनकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना भी होगा।
स्थानीय पुलिस जिन मामलों का समाधान अपने स्तर पर कर सकती है, उनमें सुधारात्मक और एहतियाती कदम उठाए जाएंगे। वहीं, जिन मामलों में MCD या किसी दूसरी नागरिक एजेंसी की भूमिका जरूरी होगी, उनके साथ समन्वय करके समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
20 सितंबर तक देनी होगी एक्शन टेकन रिपोर्ट
इस अभियान को महज औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं रखने की बात कही गई है। छात्रों से बातचीत के बाद अधिकारियों को उठाए गए कदमों की एक्शन टेकन रिपोर्ट 20 सितंबर तक जमा करनी होगी। पुलिस की कोशिश है कि छात्रों के बीच यह भरोसा मजबूत हो कि उनके आसपास की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर वे स्थानीय पुलिस से आसानी से संपर्क कर सकेंगे।
LG की ओर से पुलिस को इस पूरी कवायद को आउटरीच और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग अभियान के तौर पर आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए दिल्ली पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, सोशल मीडिया पर उन्हीं गतिविधियों को दिखाने पर जोर दिया गया है, जिनमें पुलिस अधिकारियों ने वास्तव में छात्रों से बातचीत की हो और उनकी शिकायतों या समस्याओं पर फॉलो-अप किया गया हो।
DUSU चुनाव के बीच छात्र राजनीति भी हुई तेज
सत्य निकेतन की घटना के बाद जहां छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा चर्चा में है, वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति भी सक्रिय हो गई है। DUSU चुनाव को लेकर कैंपस में गतिविधियां तेज हैं। 18 सितंबर को होने वाले चुनाव में प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी पदों के लिए नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। नामांकन पत्र 10 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नॉर्थ कैंपस स्थित चीफ इलेक्शन ऑफिसर के कार्यालय में जमा किए जाने हैं।
नामांकन की अंतिम तारीख से एक दिन पहले NSUI ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला। वहीं ABVP ने PG में रहने वाले छात्रों के बीच संपर्क अभियान चलाया। आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP ने सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए तालकटोरा स्टेडियम में प्रार्थना सभा और भजन का आयोजन किया।
सुरक्षित और सस्ते हॉस्टल का मुद्दा पहुंचा हाई कोर्ट
दिल्ली में छात्र आवास की समस्या अब केवल कैंपस या राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रही। सुरक्षित और किफायती हॉस्टल की उपलब्धता को लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या के मुकाबले हॉस्टल की उपलब्धता को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है।
यह याचिका NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ की ओर से दाखिल की गई है। याचिका 6 सितंबर को सत्य निकेतन में निजी PG की इमारत गिरने की घटना के बाद दायर की गई। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
104 साल पुरानी DU व्यवस्था पर भी सवाल
याचिका में दिल्ली यूनिवर्सिटी के आवासीय ढांचे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय की स्थापना को 104 साल से अधिक समय हो चुका है और इस दौरान छात्रों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। लेकिन छात्रों के रहने के लिए उपलब्ध रेजिडेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर उसी अनुपात में विकसित नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने इस याचिका को इमारत गिरने से जुड़े एक अन्य मामले के साथ जोड़ दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को UGC को मामले में पक्षकार के रूप में हटाने का निर्देश दिया गया है।
सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली में छात्र आवास का सवाल अब कई स्तरों पर उठ रहा है। एक तरफ पुलिस स्थानीय स्तर पर छात्रों की सुरक्षा और शिकायतों को समझने के लिए उनके बीच पहुंचने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ हॉस्टल की कमी और निजी PG की स्थिति को लेकर न्यायिक स्तर पर भी बहस शुरू हो चुकी है।

