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अंकित बालियान हत्याकांड: विदेश से जुड़े हो सकते हैं साज़िश के तार, कनाडा-अमेरिका में बैठे संदिग्धों को भारत लाने की तैयारी

अंकित बालियान हत्याकांड: विदेश से जुड़े हो सकते हैं साज़िश के तार, कनाडा-अमेरिका में बैठे संदिग्धों को भारत लाने की तैयारी

शामली। हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड की जांच अब देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंचती नजर आ रही है। मामले में पुलिस की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब कनाडा तथा अमेरिका में मौजूद बताए जा रहे दो संदिग्धों चिराग और मोंटी पर विशेष नजर है। पुलिस को शक है कि दोनों का कनेक्शन गोगी गैंग से हो सकता है। शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, दोनों को विदेश से भारत लाने के लिए डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

चिराग और मोंटी से पूछताछ पर टिकी नजर
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि यदि चिराग और मोंटी को भारत लाकर पूछताछ की जाती है तो हत्याकांड से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकते हैं। फिलहाल पुलिस उनकी कथित भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि क्या दोनों ने हत्या की योजना बनाने में कोई भूमिका निभाई थी या फिर वे केवल वारदात को अंजाम देने वालों के संपर्क में थे।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या विदेश में बैठे इन संदिग्धों ने कथित तौर पर शूटरों को निर्देश, हथियार, सुरक्षित ठिकाने या घटना के बाद फरार होने में किसी तरह की सहायता उपलब्ध कराई थी। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद हत्याकांड के पूरे नेटवर्क की तस्वीर और साफ़ हो सकती है।

आरोपियों की बदलती लोकेशन बनी चुनौती
हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती संदिग्धों की लगातार बदलती लोकेशन रही। जांच में ऐसे इनपुट सामने आए कि संदिग्ध कभी गुजरात में थे तो कभी देहरादून और दक्षिण भारत के अलग-अलग इलाकों में उनकी मौजूदगी की जानकारी मिली। एक टीम किसी संभावित ठिकाने पर कार्रवाई की तैयारी करती, उससे पहले ही संदिग्धों के वहां से निकल जाने की सूचना मिल जाती थी। इसके चलते पुलिस को अपनी रणनीति लगातार बदलनी पड़ी। अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया गया और संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ाई गई।

तकनीकी जांच से जुड़ती गईं कड़ियां
पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाने के लिए मोबाइल लोकेशन और दूसरे तकनीकी इनपुट का सहारा लिया। अलग-अलग स्थानों से मिले इनपुट को आपस में जोड़कर जांच टीम ने आरोपियों के संभावित नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की। तकनीकी निगरानी के साथ-साथ संदिग्धों के संपर्कों और उनके मूवमेंट की भी पड़ताल की जा रही है। इसी प्रक्रिया में जांच का दायरा शूटरों से आगे बढ़कर उन लोगों तक पहुंचा, जिन पर कथित तौर पर हत्या की साजिश में सहयोग करने का शक है।

शूटरों के साथ मददगारों पर भी फोकस
अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस पहले से ही शूटरों की पहचान, उनके आने-जाने और वारदात से जुड़े घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में लगी है। अब जांच एजेंसियों का ध्यान उन संभावित मददगारों पर भी है, जिन्होंने कथित तौर पर अपराध को अंजाम देने वालों को किसी तरह की मदद पहुंचाई हो। जांच का मकसद केवल यह पता लगाना नहीं है कि वारदात को किसने अंजाम दिया। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि पूरी योजना कहां तैयार हुई, निर्देश किस स्तर से दिए गए और वारदात के बाद आरोपियों के लिए भागने या छिपने की व्यवस्था किसने की।

विदेश से जुड़े हो सकते हैं साज़िश के तार
चिराग और मोंटी को भारत लाने की प्रक्रिया इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि दोनों भारत आते हैं तो पूछताछ के जरिए पुलिस उनके संपर्कों, कथित नेटवर्क और घटना से जुड़े संभावित लेन-देन या निर्देशों की जानकारी जुटा सकती है। फिलहाल जांच कई राज्यों से होते हुए विदेश तक पहुंच चुकी है। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंकित बालियान की हत्या के पीछे कथित साजिश की शुरुआत कहां से हुई और इसे जमीन पर अंजाम देने वालों तक निर्देश कैसे पहुंचे।

जांच आगे बढ़ने के साथ अब इस हत्याकांड में पुलिस उन सभी संभावित कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिनसे हत्या की पूरी साजिश और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

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