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अजीत डोभाल की चीन में बड़ी मुलाकात, शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले क्या हैं इसके मायने?

अजीत डोभाल की चीन में बड़ी मुलाकात, शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले क्या हैं इसके मायने?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे माहौल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का चीन दौरा काफी अहम माना जा रहा है। बीजिंग में डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत लगातार जारी है।

डोभाल की यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में भारत आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, उनके दौरे को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर यह यात्रा होती है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक दोनों देशों के रिश्तों के लिए अहम संदेश दे सकती है।

क्या हुई बात-चीत?
अजीत डोभाल और हान झेंग के बीच बातचीत में भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति के आधार पर आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किया। दरअसल, भारत और चीन के रिश्तों में सीमा विवाद सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा को लेकर मतभेद रहे हैं और 2020 के बाद इन संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था। ऐसे में उच्चस्तरीय बातचीत को रिश्तों में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

25वें दौर की Special Representatives (SR) बातचीत
डोभाल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग पहुंचे हैं। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-चीन Special Representatives (SR) वार्ता के अगले दौर में हिस्सा लेना है। यह बातचीत दोनों देशों के सीमा विवाद के समाधान के लिए बनाई गई एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक व्यवस्था है। इसकी शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक सीमा से जुड़े विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए यह प्रक्रिया शुरू की गई थी।

25वें दौर की बातचीत इसलिए अहम है क्योंकि सीमा पर तनाव कम करने और दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए लगातार संवाद जरूरी माना जाता है। डोभाल और वांग यी के बीच बातचीत में सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

पहले से ही भारत का रुख साफ़
भारत का रुख लगातार साफ रहा है कि चीन के साथ बेहतर संबंधों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि दोनों देशों के संबंधों की स्थिति काफी हद तक सीमावर्ती इलाकों में शांति पर निर्भर करती है। उनका बयान ऐसे समय आया था जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों के कथित आक्रामक रवैये को लेकर खबरें सामने आई थीं। भारत के लिए सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी तरह का तनाव सीधे दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।

जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से जुड़ा कनेक्शन
डोभाल की चीन यात्रा को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अगर शी जिनपिंग सितंबर में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात पर सबकी नजर रहेगी। ऐसे में डोभाल और चीनी नेतृत्व के बीच हुई बातचीत को केवल सीमा वार्ता तक सीमित नहीं देखा जा सकता। यह दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने और संभावित उच्चस्तरीय बैठक के लिए माहौल तैयार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद?
चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से भी हाल में सीमा की स्थिति को सामान्य और स्थिर बताया गया है। हालांकि, भारत-चीन संबंधों में भरोसा पूरी तरह बहाल होना अभी आसान नहीं माना जा सकता। सीमा विवाद, सुरक्षा चिंताएं और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच मौजूद हैं। फिर भी डोभाल की बीजिंग यात्रा और उच्चस्तरीय बातचीत यह संकेत देती है कि दोनों देश तनाव के बावजूद संवाद का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि Special Representatives वार्ता और संभावित मोदी-शी मुलाकात से सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर कोई ठोस प्रगति सामने आएगी या नहीं।

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