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इस बार रक्षाबंधन पर पंचक का प्रभाव? जानिए 27 अगस्त से 01 सितम्बर तक किन कार्यों पर रहेगी रोक

इस बार रक्षाबंधन पर पंचक का प्रभाव? जानिए 27 अगस्त से 01 सितम्बर तक किन कार्यों पर रहेगी रोक

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। हालांकि, इस वर्ष रक्षाबंधन के दौरान पंचक का संयोग भी बन रहा है जिसे लेकर सभी के मन में रक्षाबंधन मनाने को लेकर शंका है। आइये जानते हैं पंचक के बारे में और इस संयोग से रक्षाबंधन पर कितना प्रभाव पड़ेगा?

पंचक क्या है?
ज्योतिष शास्त्र में पंचक को एक विशेष अवधि माना गया है। मान्यता के अनुसार जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करता है, तब पंचक काल बनता है। इस दौरान चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के सभी चरणों से होकर गुजरता है। इन्हीं नक्षत्रों के संयोग से बनने वाली इस अवधि को पंचक कहा जाता है।

पांच नक्षत्र, पांच प्रभाव
पंचक से जुड़े पांचों नक्षत्रों को अलग-अलग प्रभावों से जोड़ा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान अग्नि से जुड़े भय की आशंका मानी जाती है। शतभिषा नक्षत्र में कलह और विवाद की स्थिति बनने की बात कही गई है। पूर्वाभाद्रपद को रोग और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जोड़ा जाता है, जबकि उत्तराभाद्रपद में धन के रूप में दंड मिलने की मान्यता है। वहीं रेवती नक्षत्र के दौरान धनहानि की संभावना बताई गई है।

पंचक के प्रभावों का उल्लेख प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ मुहूर्त चिंतामणि में भी मिलता है। इसमें कहा गया है कि पंचक के दौरान तिनके और लकड़ी जैसी वस्तुओं का संग्रह करने से अग्निभय, चोरी का भय, रोग, राजकीय परेशानी और धन की क्षति जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

पंचक में किन कामों से बचने की मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल में कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस दौरान लकड़ी इकट्ठा करना या खरीदना शुभ नहीं माना जाता। इसी तरह घर की छत डलवाने, पलंग या चारपाई बनवाने जैसे कार्यों को भी टालने की परंपरा है। पंचक के समय दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की भी मान्यता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है।

इसके अलावा पंचक के दौरान नए शुभ और मांगलिक कार्य शुरू करने से भी परहेज किया जाता है। हालांकि इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं से है, इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में इनके नियमों को लेकर मतभेद भी मिलते हैं।

पंचक में मृत्यु को लेकर क्या है मान्यता?
पंचक से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में से एक मृत्यु से संबंधित है। लोकमान्यता के अनुसार पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर इसे सामान्य मृत्यु से अलग माना जाता है और परिवार में अन्य लोगों के जीवन को लेकर भी आशंका व्यक्त की जाती है। कुछ परंपराओं में ऐसी स्थिति में पांच पुतलों या प्रतीकात्मक आकृतियों के साथ अंतिम संस्कार संबंधी विशेष विधि करने की बात कही गई है, ताकि पंचक दोष की शांति हो सके।

रक्षाबंधन पर रहेगा पंचक का साया
पंचांग के अनुसार अगस्त 2026 में पंचक की शुरुआत 27 अगस्त को दोपहर करीब 1:36 बजे होगी और इसका समापन 1 सितंबर 2026 को सुबह करीब 3:25 बजे होगा। यानी रक्षाबंधन के दिन पंचक रहेगा। पंचक का संबंध धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों की अवधि से माना जाता है। पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से धार्मिक रूप से बचने की सलाह दी जाती है। यही वजह है कि रक्षाबंधन जैसे शुभ पर्व पर पंचक पड़ने को लेकर लोगों के मन में शंका होना स्वाभाविक है।

क्या पंचक में राखी खरीदना अशुभ है?
राखी खरीदने को लेकर पंचक में कोई विशेष धार्मिक निषेध नहीं माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में पंचक के दौरान मुख्य रूप से लकड़ी से जुड़े काम, लोहे से संबंधित कुछ कार्य, पलंग या चारपाई बनवाने और कुछ विशेष निर्माण कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। राखी इन निषिद्ध कार्यों की श्रेणी में नहीं आती। इसलिए यदि आपने पंचक शुरू होने से पहले राखी नहीं खरीदी है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। पंचक के दौरान भी बाजार से राखी खरीदी जा सकती है।

पंचक में राखी भेजना कितना सही?
कई बहनें शादी, नौकरी, दूरी या अन्य कारणों से रक्षाबंधन के दिन भाई के पास नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में राखी कुरियर या डाक के जरिए भेजना आम बात है। पंचक के कारण राखी भेजने को लेकर भी कोई विशेष रोक नहीं मानी जाती।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा, ज्वलनशील वस्तुओं का संग्रह, पलंग या चारपाई बनवाने तथा घर की छत या लेंटर से जुड़े कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। राखी को कुरियर करना इन कार्यों में शामिल नहीं है। इसलिए समय पर राखी पहुंचाने के लिए पंचक के दौरान उसे कुरियर किया जा सकता है।

क्या पंचक में राखी बांधने पर रोक है?
राखी बांधने के मामले में पंचक से ज्यादा महत्वपूर्ण भद्रा काल का विचार माना जाता है। रक्षाबंधन पर राखी बांधने का समय तय करते समय पूर्णिमा और भद्रा की स्थिति देखी जाती है। इस बार पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह करीब 9:08 बजे से 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। वहीं भद्रा 27 अगस्त की रात तक समाप्त हो जाएगी। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ समय बताया गया है।

क्या पंचक से पहले ही खरीदनी होगी राखी?
ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है कि पंचक शुरू होने से पहले ही राखी खरीद ली जाए। अगर किसी कारण से राखी खरीदने में देरी हो गई है, तो पंचक के दौरान भी इसे खरीदा जा सकता है। इसी तरह ऑनलाइन राखी ऑर्डर करने या किसी ई-कॉमर्स माध्यम से भाई के लिए राखी मंगाने को लेकर भी सामान्यतः कोई धार्मिक बाधा नहीं मानी जाती। राखी प्रेम और रक्षा का प्रतीक है और इसे पंचक में निषिद्ध वस्तुओं की सूची में नहीं रखा गया है।

पंचक को लेकर न हों परेशान
रक्षाबंधन के दिन पंचक होने से चिंता करने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी खरीदना, ऑनलाइन मंगाना या कुरियर के जरिए भाई तक भेजना पंचक में वर्जित कार्य नहीं माना जाता। वहीं राखी बांधते समय पंचक की बजाय भद्रा और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए बहनें बिना अनावश्यक भ्रम के रक्षाबंधन की तैयारियां कर सकती हैं।

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