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Oracle भारत ने कर दी हजारों कर्मचारियों की छंटनी, सुबह बंद हुआ एक्सेस और आया आखिरी दिन का मेल

Oracle भारत ने कर दी हजारों कर्मचारियों की छंटनी, सुबह बंद हुआ एक्सेस और आया आखिरी दिन का मेल

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की रेस में तेजी से निवेश कर रही टेक कंपनी Oracle में एक बार फिर कर्मचारियों की छंटनी शुरू हो गई है। सितंबर 2026 में अमेरिका में सामने आए नए ले-ऑफ ने कंपनी के कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि Oracle एक तरफ AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है।

पहले ही 21 हजार कर्मचारियों की जा चुकी है नौकरी
Oracle के लिए यह छंटनी कोई पहली घटना नहीं है। कंपनी के वित्त वर्ष 2026 में उसका वर्कफोर्स करीब 21,000 कर्मचारियों यानी लगभग 13 फीसदी घटा था। 31 मई 2026 तक कंपनी में करीब 1.41 लाख कर्मचारी थे। इसके बाद सितंबर में अमेरिका में छंटनी का नया दौर शुरू हुआ है। Business Insider के मुताबिक प्रभावित कर्मचारियों को कंपनी की ओर से ईमेल भेजकर बताया गया कि व्यापक संगठनात्मक बदलाव के तहत उनका पद समाप्त किया जा रहा है।

Oracle की ओर से इस ताजा दौर में कितने कर्मचारियों की नौकरी गई है, इसका कोई विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों में बताए जा रहे संभावित आंकड़ों को अंतिम संख्या मानना उचित नहीं होगा।

सिस्टम बंद होने के बाद मिलती है नौकरी जाने की सूचना
नई छंटनी से जुड़ी रिपोर्टों में कर्मचारियों के अनुभवों का एक और पहलू सामने आया है। Business Insider ने प्रभावित कर्मचारियों और कंपनी के दस्तावेजों के आधार पर बताया कि कुछ कर्मचारियों का कंप्यूटर, ईमेल और दूसरे Oracle सिस्टम का एक्सेस नौकरी खत्म होने की सूचना से पहले ही बंद किया गया। इसके बाद उन्हें व्यक्तिगत ईमेल उपलब्ध कराने और सेवरेंस से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, नए ले-ऑफ में प्रभावित कर्मचारियों को चार सप्ताह की बेस सैलरी के साथ सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह की सैलरी देने का प्रावधान बताया गया है। आंतरिक दस्तावेज के मुताबिक यह सेवरेंस अधिकतम 26 सप्ताह तक सीमित हो सकता है।

आखिर Oracle में छंटनी क्यों हो रही है?
Oracle इस समय AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर कारोबार पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर का अनुमान 90 से 95 अरब डॉलर के बीच रखा है। इसी के साथ कंपनी पुनर्गठन और लागत नियंत्रण पर भी जोर दे रही है। Reuters के मुताबिक Oracle ने अपने वित्त वर्ष 2026 के restructuring plan की अनुमानित लागत बढ़ाकर करीब 2.8 अरब डॉलर कर दी है।

यानी कंपनी के सामने एक तरफ AI और क्लाउड की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ इस विस्तार से बढ़ने वाले खर्च को संभालने की चुनौती भी है।

भारत के कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
अमेरिका में छंटनी के बाद अब Oracle के भारत स्थित कर्मचारियों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर वे टीमें ज्यादा सतर्क हैं, जिनका काम कंपनी की पारंपरिक सॉफ्टवेयर गतिविधियों, सपोर्ट और दूसरे पुराने बिजनेस क्षेत्रों से जुड़ा है। हालांकि अभी तक भारत में इस नए दौर की छंटनी से कितने कर्मचारियों पर असर पड़ेगा, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए भारत में बड़े पैमाने पर नई छंटनी की निश्चित संख्या बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

AI के साथ बदल रहा है Oracle का फोकस
Oracle की मौजूदा रणनीति से साफ है कि कंपनी AI, क्लाउड और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को कारोबार के भविष्य का अहम हिस्सा मान रही है। कंपनी के अधिकारियों ने भी हालिया बातचीत में संसाधनों को ज्यादा प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने और गैर-जरूरी प्रक्रियाओं को कम करने पर जोर दिया है। ऐसे में Oracle के कर्मचारियों के लिए आने वाला समय सिर्फ छंटनी की चिंता तक सीमित नहीं है। कंपनी के भीतर कई भूमिकाओं और काम करने के तरीकों में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। भारत में भी इसका असर कितना और किस रूप में दिखाई देगा, यह कंपनी के अगले restructuring फैसलों पर निर्भर करेगा।

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