श्रावस्ती में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई से नकली भारतीय करेंसी तैयार करने वाले एक अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। टीम ने मल्हीपुर रोड स्थित एक राइस मिल में छापा मारकर तीन आरोपियों को कथित तौर पर नकली नोट छापते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। मौके से 100, 200 और 500 रुपये के कुल 804 जाली नोट बरामद किए गए, जिनकी कीमत 1 लाख 74 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह दीपावली के दौरान बाजार में नकली नोट खपाने की तैयारी कर रहा था।
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में नकली भारतीय मुद्रा के कारोबार के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना सोनवा पुलिस और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए जाली नोट तैयार करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से तैयार नकली नोटों के साथ नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कलर प्रिंटर, इंक रिफिल, विशेष कागज और कटिंग के उपकरण भी बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी मिलकर नकली करेंसी तैयार करते थे और फिर उसे बाजार में चलाने की योजना बना रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 5 नवंबर 2026 को मल्हीपुर रोड स्थित गिरिराज राइस मिल में की गई। मुखबिर से मिली सटीक सूचना के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मिल की घेराबंदी की। इसके बाद परिसर के एक कमरे में दबिश दी गई, जहां तीनों आरोपी कथित तौर पर नकली नोटों की छपाई और उनकी तैयारी में जुटे हुए थे। मौके से ही तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरिराज राइस मिल में चल रहा था नकली करेंसी का काम
एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ और थाना सोनवा पुलिस को श्रावस्ती तथा आसपास के जिलों में नकली नोटों की आपूर्ति करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी मिल रही थी। इसी सूचना के आधार पर निगरानी और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया था। जांच के दौरान मल्हीपुर रोड स्थित गिरिराज राइस मिल में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली।
इसके बाद संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी और बरामदगी की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी तथा फोटोग्राफी कराई गई, ताकि साक्ष्यों की पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके। बरामद नकली नोटों, प्रिंटर और अन्य उपकरणों को नियमानुसार सील कर कब्जे में लिया गया।
तीन आरोपी गिरफ्तार, अलग-अलग जिलों से जुड़ा है मामला
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निम्न रूप में की है:
गिरिजा शंकर जायसवाल पुत्र छोटे लाल जायसवाल, निवासी शिवनगर, गोंडा रोड, थाना कोतवाली देहात, जनपद बहराइच।
नरेन्द्र कुमार चौरसिया पुत्र सुखराम चौरसिया, निवासी ग्राम लालबोझी, पोस्ट भटपुरवा, थाना नवीन मॉडर्न।
वृजेन्द्र गोस्वामी पुत्र उदयराज गोस्वामी, निवासी ग्राम भगवानपुर बनकट, थाना इकौना, जनपद श्रावस्ती।
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी आपसी मिलीभगत से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे। इनमें वृजेन्द्र गोस्वामी की भूमिका मुख्य रूप से नोटों की छपाई करने की थी, जबकि गिरिजा शंकर और नरेन्द्र कुमार छपे हुए नोटों की कटाई, गड्डियां तैयार करने और पैकिंग का काम संभालते थे।
1.74 लाख रुपये की नकली करेंसी
छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से कुल 1 लाख 74 हजार रुपये मूल्य के 804 जाली भारतीय मुद्रा नोट मिले। इनमें 100 रुपये के 537 नोट, 200 रुपये के 44 नोट और 500 रुपये के 223 नोट शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की है। इसमें एक कैनन कलर प्रिंटर, प्रिंटर केबल, चार भरी हुई इंक रिफिल, जेके एक्सेल सुपर व्हाइट बॉन्ड पेपर और ए4 साइज के कागज पर दोनों तरफ छपे 156 प्रिंट शामिल हैं।
मौके से पांच पैकेट ब्लेड, तीन कैंची, दो स्टील स्केल और नोट तैयार करने के दौरान निकली कतरनें भी मिली हैं। इसके अतिरिक्त आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और 5,500 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
मुंबई से सीखी नोट छापने की जानकारी
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर नकली नोट तैयार करने के तरीके के बारे में जानकारी दी है। एसटीएफ के मुताबिक, वृजेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि उसने मुंबई में रहते हुए जाली नोट छापने के संबंध में जानकारी हासिल की थी। इसके अलावा उसने यूट्यूब वीडियो के माध्यम से भी इस काम की जानकारी प्राप्त की थी।
आरोपियों ने बताया कि नकली करेंसी तैयार करने के लिए जरूरी प्रिंटर, इंक, कागज और अन्य उपकरण तीनों ने मिलकर लखनऊ के लालबाग स्थित कैनन एजेंसी से खरीदे थे। इसके बाद गिरिराज राइस मिल में इन उपकरणों की मदद से नकली नोट तैयार करने का काम शुरू किया गया।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे काम में तीनों की जिम्मेदारियां पहले से तय थीं। वृजेन्द्र प्रिंटिंग का काम करता था, जबकि अन्य दोनों आरोपी नोटों को काटने, गड्डियां बनाने और पैकिंग करने में उसकी मदद करते थे। इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई को तीनों के बीच बराबर बांटने की सहमति बनी थी।
दीपावली पर नकली नोट खपाने की थी तैयारी
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखकर नकली करेंसी बाजार में चलाने की योजना बनाई थी। त्योहार के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ने और बड़ी संख्या में नकदी का इस्तेमाल होने की संभावना को देखते हुए वे इस मौके का फायदा उठाना चाहते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपी दुकानदारों से सामान और जेवरात खरीदने के बहाने नकली नोट चलाने की तैयारी कर रहे थे। इसके अलावा जुआ खेलने वाले लोगों के बीच भी नकली करेंसी की आपूर्ति करने की योजना बनाई गई थी।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर एक लाख रुपये के असली नोट के बदले तीन लाख रुपये के नकली नोट देने के लिए ग्राहकों को तैयार करने की बात भी बताई। इस तरह कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि गिरोह ने पहले कितनी नकली करेंसी तैयार की और क्या इससे पहले किसी अन्य स्थान पर इसकी सप्लाई की गई थी।
एक आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में गिरिजा शंकर जायसवाल और नरेन्द्र कुमार चौरसिया का आपराधिक इतिहास शून्य बताया गया है। वहीं, वृजेन्द्र गोस्वामी के खिलाफ वर्ष 2020 में थाना इकौना, जनपद श्रावस्ती में मुकदमा संख्या 0320/2020 दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इस मामले में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 352, 452, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज था।
BNS की धाराओं में मुकदमा दर्ज
इस पूरे मामले में थाना सोनवा में मुकदमा संख्या 0196/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5), 318(2), 180, 181 और 182 के तहत कार्रवाई की है।
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। मामले की आगे की विवेचना उपनिरीक्षक गौरव सिंह को सौंपी गई है।
एसटीएफ और सोनवा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस सफल कार्रवाई में एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ के अधिकारियों और थाना सोनवा पुलिस की टीम शामिल रही। अभियान का नेतृत्व थानाध्यक्ष विसुनदेव पाण्डेय ने किया। एसटीएफ की ओर से उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह, अशोक कुमार गुप्ता और राजेश मौर्या ने कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा उपनिरीक्षक चंद्रशेखर प्रजापति, हेड कांस्टेबल रुद्र नारायण उपाध्याय, कौशलेन्द्र प्रताप सिंह, रवि वर्मा और विजय वर्मा सहित थाना सोनवा के पुलिसकर्मी भी संयुक्त टीम का हिस्सा रहे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नकली करेंसी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित सप्लाई चैन की जानकारी जुटाई जा रही है। बरामद मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर गिरोह की गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

