सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। जिला जज न्यायालय के फैसले के बाद शनिवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर की मदद से मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लाइन की पोस्ट के जरिए योगी सरकार पर निशाना साधा है।
अखिलेश यादव ने एक्स पर क्या लिखा?
अखिलेश यादव ने सहारनपुर की घटना का सीधे तौर पर नाम लिए बिना लिखा, “सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है और उपलब्धि भी।” उनकी इस टिप्पणी को सहारनपुर में हुई कार्रवाई और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश के इस बयान के बाद सपा नेताओं और विपक्षी नेताओं की ओर से भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और सहारनपुर में नेताओं के पहुंचने को लेकर भी हलचल बढ़ गई है।
इमरान मसूद ने बताया ‘संविधान पर हथौड़ा’
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे ‘संविधान पर हथौड़ा चलना’ बताया। मसूद का कहना है कि मस्जिद को सिर्फ गिराया नहीं गया, बल्कि उसे शहीद किया गया है। वहीं अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कैराना सांसद इकरा हसन को रोके जाने पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया।
सहारनपुर जाने से इकरा हसन को रोका गया
मस्जिद ध्वस्तीकरण की जानकारी मिलने के बाद कैराना की सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर के लिए रवाना हुई थीं। बताया गया कि मुजफ्फरनगर में पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस की टीम उनके आवास पर भी पहुंची और बाहर निकलने के दौरान उन्हें रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान इकरा हसन और उनकी मां की पुलिस अधिकारी से तीखी बहस का वीडियो भी सामने आया है। फिलहाल इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने की बात कही जा रही है।
कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
दरअसल, सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में बनी इस मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मार्च 2025 में मस्जिद को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में परिसर में कथित अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा था। जुलाई में कोर्ट ने मस्जिद को अवैध माना था। इसके बाद जिला जज न्यायालय में भी मामला पहुंचा, जहां तीन दिन पहले सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया।
भारी पुलिस बल के बीच चला बुलडोजर
अदालती आदेश के बाद शनिवार सुबह प्रशासन ने छह बुलडोजर की मदद से मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं मस्जिद पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि यह मस्जिद वर्ष 1911 से भी पहले की है। ऐसे में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद मामला अब कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।

