लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक संगीत सोम ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर एक गंभीर बयान दिया है। संगीत सोम ने दावा किया है कि सपा सरकार के कार्यकाल में उनकी जान को खतरा था और उनकी हत्या कराने की साजिश रची गई थी। उनके इस बयान ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, ये आरोप संगीत सोम के अपने दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जेल में बिताए दिनों का किया जिक्र
संगीत सोम ने अपने बयान में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उस समय के घटनाक्रम को याद किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सपा सरकार के दौरान एक मामले में जेल भेजे जाने के बाद उन्हें सामान्य कैदियों से अलग रखा गया था। उनके मुताबिक, जेल को खाली करा दिया गया था और वहां उनके अलावा कोई दूसरा कैदी मौजूद नहीं था।
पूर्व विधायक का दावा है कि उस समय जेल में उनकी सुरक्षा को लेकर स्थिति असामान्य थी। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों ने भी उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी थी। संगीत सोम के अनुसार, अधिकारियों की ओर से मिली इस जानकारी के बाद उन्हें अपनी जान को लेकर आशंका होने लगी थी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अपनी जिंदगी के सबसे संवेदनशील दौर में से एक बताया।
अधिकारियों की चेतावनी के बाद समर्थकों तक पहुंचाया संदेश
संगीत सोम ने दावा किया कि जेल में रहते हुए जब उन्हें संभावित खतरे की जानकारी मिली, तो उन्होंने अपने करीबियों और समर्थकों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। उनके मुताबिक, इसके बाद खेड़ा में एक महापंचायत आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोली भी चलाई गई थी। संगीत सोम के अनुसार, महापंचायत में जुटे समर्थकों ने उनके साथ किसी भी तरह की अनहोनी होने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी थी। उनका कहना है कि उस समय लोगों का समर्थन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। हालांकि, इस घटनाक्रम और कथित साजिश को लेकर संगीत सोम ने जो बातें कही हैं, वे उनके बयान पर आधारित हैं।
‘जनता न होती तो मेरी जान को खतरा था’
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए संगीत सोम ने कहा कि अगर उस समय जनता उनके साथ मजबूती से खड़ी नहीं होती, तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था। उन्होंने तत्कालीन सपा सरकार पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि उन्हें लगता है कि उस दौर में उनकी हत्या कराने की कोशिश की गई थी।
संगीत सोम के इस बयान के बाद मुजफ्फरनगर दंगों के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों, जेल में उनके साथ हुए कथित घटनाक्रम और उस समय की कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। उनके आरोपों ने बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव को एक नया मुद्दा दे दिया है।
राजनीतिक लोकप्रियता के लिए दिया बयान – सपा
संगीत सोम के बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया दी गई है। सपा के पूर्व विधायक नागेंद्र यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि संगीत सोम इस तरह के बयान देकर राजनीतिक चर्चा में बने रहना चाहते हैं।
नागेंद्र यादव ने अखिलेश यादव पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इस तरह की बयानबाजी से सपा अध्यक्ष की छवि पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने संगीत सोम के बयान पर सवाल उठाते हुए उन्हें सोच-समझकर बोलने की नसीहत भी दी।
इस तरह दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जहां संगीत सोम अपने पुराने अनुभवों के आधार पर तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी इन दावों को राजनीतिक बयानबाजी करार दे रही है।
2027 चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है। ऐसे माहौल में संगीत सोम का अखिलेश यादव पर लगाया गया आरोप चर्चा के केंद्र में आ गया है। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद के घटनाक्रम का जिक्र होने से इस मामले का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

