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कैबिनेट बैठक के 22 फैसलों से यूपी को मिलेगी नई रफ्तार, 4 लिंक एक्सप्रेसवे से लेकर कैशलेस इलाज तक को मिली मंजूरी

कैबिनेट बैठक के 22 फैसलों से यूपी को मिलेगी नई रफ्तार, 4 लिंक एक्सप्रेसवे से लेकर कैशलेस इलाज तक को मिली मंजूरी

कैबिनेट बैठक: उत्तर प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, औद्योगिक निवेश, तकनीकी विकास और कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में चार लिंक एक्सप्रेसवे के विकासकर्ताओं का चयन, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को कैशलेस इलाज, साइबर सुरक्षा ऑपरेशंस सेंटर की स्थापना, रोबोटिक्स पार्क और टेक्सटाइल पार्क जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा पशुपालन को बढ़ावा देने, किसानों के लिए बीमा सहायता और शहरी क्षेत्रों में पेयजल तथा सीवरेज सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़े निर्णय भी लिए गए।

सरकार के इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में कनेक्टिविटी मजबूत करना, निवेश के नए अवसर तैयार करना, रोजगार की संभावनाएं बढ़ाना और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल और पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने दी।

कैशलेस इलाज को मंजूरी
योगी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसलों में शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी देना शामिल है। माध्यमिक शिक्षा विभाग और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत पात्र शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

इस व्यवस्था से कर्मचारियों को बीमारी या आपातकालीन चिकित्सा की स्थिति में इलाज के खर्च को लेकर राहत मिलने की उम्मीद है। कैशलेस सुविधा के तहत निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार उपचार कराया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए लागू होने वाली विस्तृत शर्तों और अस्पतालों से संबंधित जानकारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर स्पष्ट होगी।

यूपी में चार नए लिंक एक्सप्रेसवे की दिशा में बढ़े कदम
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार करने की योजना को आगे बढ़ाते हुए कैबिनेट ने चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को मौजूदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं।

इन सड़कों के विकसित होने से संबंधित क्षेत्रों में यात्रा और माल ढुलाई की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक इकाइयों, गोदामों, लॉजिस्टिक्स और दूसरे कारोबारी क्षेत्रों के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। फिलहाल विकासकर्ताओं के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने से परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ा है।

मैनपुरी में सैनिक स्कूल के लिए मुफ्त मिलेगी जमीन
कैबिनेट ने मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल के लिए 9.524 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले से स्कूल की आवश्यकताओं के अनुसार सुविधाओं के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।

सैनिक स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और रक्षा सेवाओं से जुड़ी तैयारी का अवसर मिलता है। ऐसे संस्थानों की सुविधाओं का विस्तार होने से विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

इसके अलावा झांसी और ललितपुर में भंडारगृहों के निर्माण के लिए भी निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इन भंडारगृहों का उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों में भंडारण से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना है। कृषि उत्पादों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के व्यवस्थित भंडारण के लिए ऐसी सुविधाएं महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

लखनऊ-हरदोई में 1000 एकड़ में बनेगा पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क
प्रदेश में कपड़ा उद्योग को नई गति देने के लिए लखनऊ और हरदोई में लगभग 1000 एकड़ भूमि पर पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना है। कैबिनेट बैठक में इसके मास्टर डेवलपर के चयन से जुड़े प्रस्ताव को शामिल किया गया।

इस परियोजना के तहत कपड़ा उद्योग से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को एकीकृत औद्योगिक परिसर में विकसित करने का लक्ष्य है। इसमें उत्पादन, प्रसंस्करण और अन्य सहायक औद्योगिक गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं हैं।

टेक्सटाइल पार्क का विकास होने पर कपड़ा कारोबार से जुड़ी कंपनियों को एक ही क्षेत्र में जरूरी औद्योगिक सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना से मिलने वाले वास्तविक रोजगार और निवेश का आकलन इसके विकास तथा कंपनियों की भागीदारी के बाद ही किया जा सकेगा।

साइबर सुरक्षा के लिए बनेगा ऑपरेशंस सेंटर
डिजिटल सेवाओं और सरकारी प्रणालियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रदेश में साइबर सुरक्षा ऑपरेशंस सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इस दिशा में आईआईटी कानपुर के सी3आईहब (C3iHub) के माध्यम से काम किया जाएगा।

आज सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेजों और नागरिक सुविधाओं का संचालन तेजी से डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो रहा है। ऐसे में साइबर हमलों और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी हो गया है।

प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से साइबर खतरों की निगरानी, संभावित हमलों की पहचान और उनसे निपटने की क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। तकनीकी विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग के जरिए साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने में भी मदद मिलेगी।

प्रदेश में स्थापित होगा PRAGATI रोबोटिक्स पार्क
तकनीक और औद्योगिक नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट बैठक में PRAGATI रोबोटिक्स पार्क की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। रोबोटिक्स और ऑटोमेशन का इस्तेमाल आज विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और कई अन्य क्षेत्रों में बढ़ रहा है।

ऐसे में रोबोटिक्स पार्क की स्थापना से उन्नत तकनीक से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य तकनीकी विकास, नवाचार और उद्योगों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

यदि इस परियोजना के माध्यम से कंपनियों, तकनीकी संस्थानों और नवाचार से जुड़े उद्यमों को बेहतर सुविधाएं मिलती हैं, तो प्रदेश में नए तकनीकी कारोबार विकसित होने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे कुशल युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

एफडीआई और ग्लोबल कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहन
कैबिनेट ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई और वैश्विक कंपनियों के निवेश से जुड़ी इम्पावर्ड कमेटी के फैसलों पर भी मुहर लगाई। इसके साथ उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 के अंतर्गत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी शामिल रहा।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी के माध्यम से बड़ी कंपनियां तकनीकी सेवाओं, शोध, डेटा विश्लेषण और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करती हैं। ऐसे केंद्रों की स्थापना से उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर तैयार हो सकते हैं।

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