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ब्रिटेन में युद्ध का डर या बड़े संकट की तैयारी? सरकार की चेतावनी से मची हलचल, घर में 9 लीटर पानी और 3 दिन का राशन रखने की सलाह

ब्रिटेन में युद्ध का डर या बड़े संकट की तैयारी? सरकार की चेतावनी से मची हलचल, घर में 9 लीटर पानी और 3 दिन का राशन रखने की सलाह

ब्रिटेन में इन दिनों एक ऐसी सलाह चर्चा में है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सरकार चाहती है कि देश का हर परिवार अपने घर में कम से कम 72 घंटे यानी तीन दिन तक काम आने वाला जरूरी सामान जमा करके रखे। इस सूची में भोजन, प्रति व्यक्ति 9 लीटर पानी, नकदी, प्राथमिक चिकित्सा किट, बैटरी और यहां तक कि बिना बिजली के चलने वाला रेडियो भी शामिल है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ब्रिटेन सरकार को किस तरह के खतरे की आशंका है? क्या यह रूस के साथ संभावित युद्ध की तैयारी है या फिर साइबर हमलों और दूसरी आपात स्थितियों से निपटने की रणनीति?

युद्ध से ज्यादा चिंता,जरूरी सेवाओं पर मंडराते खतरे की
ब्रिटेन सरकार की इस सलाह को अंतरराष्ट्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच देखा जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यूरोप में भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूरोपीय देशों के साथ युद्ध की संभावना को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने यूरोप की ओर से रूस के साथ भविष्य में युद्ध की आशंकाओं को राजनीतिक सिजोफ्रेनिया बताते हुए कहा था कि रूस यूरोपीय देशों के साथ युद्ध नहीं चाहता।

हालांकि, ब्रिटेन की चिंता केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। साइबर हमले, सरकारी और जरूरी सेवाओं में तकनीकी बाधाएं, बुनियादी ढांचे को नुकसान और जंगलों में आग जैसी आपात स्थितियां भी सरकार की तैयारी का हिस्सा हैं। यही वजह है कि नागरिकों को पहले से सतर्क रहने और संकट के शुरुआती दिनों के लिए अपने इंतजाम खुद करने की सलाह दी जा रही है।

9 लीटर पानी, खाना और रेडियो क्यों जरूरी?
ब्रिटेन सरकार ने कहा है – हर व्यक्ति के लिए तीन दिन तक पर्याप्त पानी रखना जरूरी है। इस हिसाब से एक व्यक्ति के लिए करीब 9 लीटर पानी की व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके अलावा ऐसा भोजन रखने की सलाह है, जिसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके और जिसे तैयार करने के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत न पड़े।

आपातकालीन किट में कुछ अन्य चीजें भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें शामिल हैं:
पीने के पानी और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन
नकदी और जरूरी दस्तावेज
प्राथमिक चिकित्सा किट और आवश्यक दवाएं
टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां और पावर बैंक
कंबल और दूसरे जरूरी घरेलू सामान
बैटरी से चलने वाला या चाभी से चलने वाला रेडियो

अब सवाल यह है कि मोबाइल और इंटरनेट के दौर में रेडियो रखने की जरूरत क्यों पड़ रही है? दरअसल, अगर बिजली गुल हो जाए, मोबाइल नेटवर्क ठप पड़ जाए या इंटरनेट सेवाएं बाधित हों, तो डिजिटल माध्यमों से जरूरी सूचनाएं हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में रेडियो सरकारी घोषणाओं और आपातकालीन निर्देशों की जानकारी पाने का वैकल्पिक साधन बन सकता है।

PHP की सुरक्षा खामी ने बढ़ाई चिंता
ब्रिटेन में आपातकालीन तैयारियों को लेकर चर्चा ऐसे समय तेज हुई, जब PHP प्रोग्रामिंग भाषा से जुड़ी गंभीर सुरक्षा खामी सामने आने की खबर आई। PHP का इस्तेमाल बड़ी संख्या में वेबसाइटों और इंटरनेट आधारित सेवाओं को चलाने के लिए किया जाता है। ऐसी प्रणालियों में सुरक्षा कमजोरियां सामने आने पर हैकर उनका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा संबंधी चिंता के बीच ब्रिटेन की 32 सरकारी वेबसाइटों को एहतियात के तौर पर ऑफलाइन किया गया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि अगर किसी बड़े साइबर हमले या तकनीकी गड़बड़ी के कारण जरूरी ऑनलाइन सेवाएं ठप हो जाएं, तो आम लोगों की जिंदगी कितनी प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, किसी सुरक्षा खामी या तकनीकी व्यवधान का सामने आना अपने आप में रूस के हमले का प्रमाण नहीं है। दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं। सरकार की व्यापक तैयारी का उद्देश्य अलग-अलग तरह के संभावित संकटों से निपटने की क्षमता बढ़ाना है।

रक्षा मंत्री की चेतावनी
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने साइबर हमलों और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल से साइबर अपराधियों के लिए सुरक्षा प्रणालियों की कमजोरियां तलाशना आसान हो सकता है। इससे सरकारी सेवाओं, सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा बढ़ सकता है।

स्ट्रीटिंग ने ऐसे खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया, जिनमें साइबर हमलों के अलावा संगठित अपराध और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपात स्थितियां शामिल हैं। उनका संदेश साफ है कि किसी बड़े संकट का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी करना जरूरी है। अगर आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है या बिजली और संचार सेवाएं बंद पड़ती हैं, तो घर में जरूरी सामान मौजूद होना शुरुआती मुश्किलों को कम कर सकता है।

जंगलों में आग से लेकर बिजली गुल होने तक की तैयारी
ब्रिटेन में जंगलों में आग और गर्मी-सूखे जैसी परिस्थितियों ने भी आपातकालीन योजनाओं की जरूरत को बढ़ाया है। सरकार की तैयारियों में ऐसी घटनाओं से तेजी से निपटने और नुकसान कम करने पर जोर दिया जा रहा है। सैन्य विमानों की तैनाती जैसी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई है।

दरअसल, प्राकृतिक आपदा, साइबर हमला और युद्ध जैसी परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन इनका एक साझा असर हो सकता है – जरूरी सेवाओं का बाधित होना। बिजली, पानी, इंटरनेट, परिवहन या दुकानों तक सामान पहुंचने की व्यवस्था प्रभावित होने पर आम परिवारों को तत्काल मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

यूरोप भी अपना रहा है यही रणनीति
ब्रिटेन की यह पहल यूरोप में पहले से चल रही तैयारियों की सोच से भी मेल खाती है। यूरोपीय आयोग ने भी नागरिकों को कम से कम 72 घंटे तक काम आने वाली आपातकालीन किट तैयार रखने की सलाह दी थी। इसका मकसद यह है कि किसी बड़े संकट के बाद शुरुआती समय में लोग भोजन, पानी और दूसरी बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह बाहरी सहायता पर निर्भर न रहें।

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