पाकिस्तान में राजनीतिक टकराव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच जारी खींचतान ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू किए जाने की खबरों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वहीं, इस्लामाबाद की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाए जाने और विरोध प्रदर्शन की तैयारियों से राजनीतिक संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल से बढ़ा विवाद
खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से PTI का प्रमुख राजनीतिक गढ़ रहा है। ऐसे में इस प्रांत में आपातकाल लागू करने का फैसला पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मंजूरी से यह कदम उठाया गया। बताया जा रहा है कि इसके तहत प्रांतीय शासन की व्यवस्था में बदलाव करते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारियां गवर्नर और सलाहकार परिषद को सौंपने की योजना है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर उठ रहे दावों और संवैधानिक प्रक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। यदि प्रांतीय सरकार की शक्तियां वास्तव में सीमित की गई हैं, तो इसका असर पाकिस्तान के संघीय ढांचे और केंद्र-राज्य संबंधों पर भी पड़ सकता है।
आतंकवाद के मुद्दे पर केंद्र और PTI में टकराव
संघीय सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान का आरोप है कि खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जाने के बीच PTI ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केंद्र ने पर्याप्त आर्थिक सहायता और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए।
PTI से जुड़े प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इस कदम को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताते हुए इसे आपातकाल की आड़ में सत्ता छीनने की कोशिश करार दिया। इस बयान से साफ है कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोलने की तैयारी में है।
सड़कों पर प्रदर्शन, राजधानी में सुरक्षा सख्त
आपातकाल के फैसले के विरोध में प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने की खबरें सामने आई हैं। बारा मार्केट और पेशावर की ओर मार्च की तैयारियों के बीच प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की गतिविधियों पर पाबंदियों और कार्यालय के आसपास रास्ते बंद किए जाने की खबरों ने भी विवाद को हवा दी है।
उधर, इस्लामाबाद की ओर संभावित PTI मार्च को देखते हुए राजधानी के प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाने और कंटेनर लगाने की जानकारी सामने आई है। इससे आम लोगों की आवाजाही और राजनीतिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
क्या पाकिस्तान में बढ़ेगा राजनीतिक संकट?
अमेरिका के पूर्व विशेष प्रतिनिधि जलमय खलीलजाद ने भी घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि निर्वाचित प्रांतीय सरकार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई अस्थिरता बढ़ा सकती है।
महंगाई, ईंधन की कीमतों और इमरान खान की सेहत को लेकर पहले से जारी असंतोष के बीच यह विवाद शहबाज शरीफ सरकार के लिए नई चुनौती बन सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि केंद्र और PTI बातचीत का रास्ता चुनेंगे या टकराव और तेज होगा। आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा काफी हद तक इसी पर निर्भर करेगी।

