शक्ति की उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि जल्द ही शुरू होने जा रहा है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि, शांति व खुशहाली की कामना करते हैं। इस बार तिथियों के विशेष संयोग के कारण नवरात्रि का पर्व सामान्य दिनों से अलग नजर आ रहा है। इस वर्ष नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगी। वहीं, दशहरा 21 अक्टूबर को मनाया जाएगा। नवरात्रि की अवधि और व्रत पारण की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल हैं। आइए लखनऊ की ज्योतिषाचार्या आर्या मणि से जानते हैं कलश स्थापना का शुभ समय और व्रत खोलने का सही तरीका।
11 अक्टूबर को होगी कलश स्थापना
ज्योतिषाचार्या आर्या मणि के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के मुताबिक, नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर को माना जाएगा। इसी दिन सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू होगी। इसके बाद भक्त पूरे नवरात्रि में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना करेंगे।
कलश स्थापना के लिए ये हैं शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:10 बजे से 7:35 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इसके अलावा सुबह 9:05 बजे से 10:50 बजे तक भी कलश स्थापना की जा सकती है। जो श्रद्धालु इन समयों में पूजा नहीं कर पाते, उनके लिए दोपहर का अभिजीत मुहूर्त भी विकल्प है। 11 अक्टूबर को दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक कलश स्थापना कर देवी आराधना का संकल्प लिया जा सकता है।
नवरात्रि व्रत का पारण कब करें?
नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिनों तक व्रत रखने वाले भक्तों के लिए पारण की तारीख जानना जरूरी है। ज्योतिषाचार्या आर्या मणि के मुताबिक, 20 अक्टूबर को नवमी तिथि के अवसर पर हवन-पूजन और कन्या पूजन किया जाएगा। दशमी तिथि 21 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजे शुरू होने के कारण नौ दिनों का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए 21 अक्टूबर को पारण करना उचित बताया गया है। व्रत खोलने से पहले अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।
21 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा
नवरात्रि के समापन के बाद 21 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण दहन के आयोजन होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व है। कुछ परंपराओं में इस दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना जाता है। इस तरह शारदीय नवरात्रि के दस दिवसीय क्रम में भक्त मां दुर्गा की आराधना के बाद विजयादशमी के पर्व के साथ उत्सव का समापन करेंगे।

