मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। नीले ड्रम में शव छिपाए जाने के कारण देशभर में सुर्खियों में आए इस मामले में आज जिला अदालत में सजा पर सुनवाई हुई। फैसला सुनाए जाने के दौरान दोनों दोषी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश हुए। जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, सजा का ऐलान होने के बाद मुस्कान भावुक हो गई और रोने लगी, जबकि साहिल की आंखें भी नम नजर आईं।
इस मामले में अदालत का फैसला इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि सुनवाई के दौरान मुस्कान की दो बेटियों के भविष्य और उनके पालन-पोषण का मुद्दा उठाया गया था। बचाव पक्ष ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की, जबकि अभियोजन पक्ष ने वारदात की गंभीरता और शव को छिपाने के तरीके का हवाला देते हुए दोनों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया।
फैसला सुनाने से पहले अदालत ने दोनों दोषियों से पूछा सवाल
सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को सजा सुनाए जाने से पहले अपनी बात रखने का अवसर दिया। उनसे पूछा गया कि क्या वे फैसले से पहले कुछ कहना चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों ने जवाब दिया कि उन्हें कुछ नहीं कहना है।
लंच से पहले हुई इस प्रक्रिया के बाद दोनों को दोबारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश किया गया। इसके बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया। जेल प्रशासन के अनुसार, फैसला सुनाए जाने से पहले दोनों बेचैन दिखाई दे रहे थे। बताया गया कि उन्होंने रात और सुबह के भोजन में कम खाना खाया था और नींद भी ठीक से नहीं आई थी।
सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, अदालत ने सुनवाई के दौरान विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए थे। इनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट से जुड़े बिंदु भी शामिल थे। हालांकि, जेल प्रशासन की ओर से सवालों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
सजा सुनते ही मुस्कान रोने लगी, साहिल भी हुआ भावुक
जेल प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अदालत का फैसला सुनते समय मुस्कान ने हाथ जोड़ रखे थे। मृत्युदंड की सजा का ऐलान होने के बाद वह रोने लगी। वहीं, साहिल शुक्ला भी भावुक दिखाई दिया और उसकी आंखें नम हो गईं। इस घटनाक्रम की जानकारी जेल प्रशासन के हवाले से सामने आई है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ ही सौरभ राजपूत हत्याकांड में सजा को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हुआ है। हालांकि, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपील की स्थिति अलग विषय होगी।
मुस्कान की दो बेटियों का मुद्दा भी सुनवाई में उठा
सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य को लेकर भी चर्चा हुई। बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने अदालत से अपील की कि सजा तय करते समय बच्चियों के पालन-पोषण और भविष्य को ध्यान में रखा जाए। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर नरमी बरतने का अनुरोध किया था।
सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा के अनुसार, मुस्कान पिछले तीन से चार दिनों से अपनी बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा जता रही थी। बच्ची की उम्र करीब सात साल बताई गई है। हालांकि, जेल अधीक्षक के मुताबिक, बच्ची को मुलाकात के लिए जेल नहीं लाया गया था।
मुस्कान ने अदालत में भी अपनी बेटियों का ख्याल रखने की बात कही। इस घटनाक्रम ने सुनवाई को भावनात्मक पहलू भी दिया। एक ओर बचाव पक्ष ने बच्चों की परवरिश को आधार बनाया, तो दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अधिकतम सजा की मांग की।
अदालत के सामने सजा तय करने का सवाल था, जिसमें अपराध से जुड़े तथ्य, अभियोजन की दलीलें और बचाव पक्ष के तर्क रखे गए। अंततः अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
अभियोजन पक्ष ने क्यों की मृत्युदंड की मांग?
इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। अभियोजन की दलील थी कि सौरभ राजपूत की हत्या में मुस्कान और साहिल की भूमिका थी और वारदात के बाद शव को छिपाने के लिए गंभीर प्रयास किए गए। पुलिस जांच के अनुसार, शव के टुकड़े करने के बाद उसे नीले ड्रम में रखा गया और सीमेंट का इस्तेमाल कर छिपाने की कोशिश की गई।
अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अपराध की प्रकृति, शव को ठिकाने लगाने से जुड़े घटनाक्रम और जांच में सामने आए साक्ष्यों का उल्लेख किया। उसका तर्क था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों दोषियों को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।
कैसे सामने आया था नीला ड्रम हत्याकांड?
सौरभ राजपूत के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच अधिकारी और तत्कालीन ब्रह्मपुरी थाना प्रभारी रमाकांत पचौरी के अनुसार, 18 मार्च 2025 को सौरभ के भाई बबलू ने उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में मुस्कान और साहिल पर संदेह जताया गया था।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की और मामले की जांच आगे बढ़ाई। पूछताछ और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल के दौरान पुलिस को ऐसे तथ्य मिले, जिनके आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया। इसके बाद घर में रखे नीले ड्रम से सौरभ का शव बरामद किया गया। शव की बरामदगी के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों को जोड़ने की कोशिश की। मामले में सामने आए घटनाक्रम ने जांच को कई दिशाओं में आगे बढ़ाया। पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट की भी जांच की।
नशीली दवा से लेकर शव छिपाने तक, जांच में क्या आया सामने?
पुलिस जांच के मुताबिक, वारदात वाली रात सौरभ अपनी मां रेनू देवी के घर से कोफ्ते की सब्जी लेकर आया था। आरोप था कि मुस्कान ने सब्जी में नशीली दवा मिला दी थी। पुलिस के अनुसार, सौरभ के बेसुध होने के बाद साहिल को घर बुलाया गया और इसके बाद उसकी हत्या की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि शव को वॉशरूम में टुकड़ों में काटा गया। इसके बाद उसे छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, पहले शव को ब्रीफकेस में रखने की कोशिश की गई, लेकिन उसमें दिक्कत आने के बाद शव को बेड में रखने और फिर नीले ड्रम में छिपाने से संबंधित घटनाक्रम सामने आया। ड्रम में सीमेंट का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच का हिस्सा रही।
ये विवरण पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से सामने रखे गए तथ्यों पर आधारित हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई में प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई।
कैब चालक, होटल और डिजिटल साक्ष्यों की अहम भूमिका
मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के कारण जांच में परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पुलिस ने उन लोगों से पूछताछ की, जिनके बयान घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मददगार हो सकते थे। इनमें कैब चालक से जुड़ी जानकारी भी शामिल थी। जांच के दौरान मुस्कान और साहिल के वारदात के बाद घूमने जाने से संबंधित पहलुओं की पड़ताल की गई।
इसके अतिरिक्त, जिस होटल में दोनों के ठहरने की बात सामने आई थी, वहां से संबंधित जानकारी और सीसीटीवी फुटेज जुटाए जाने का उल्लेख किया गया। पुलिस ने मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर, लोकेशन संबंधी जानकारी, होटल रजिस्टर और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसे साक्ष्यों की जांच की।
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे के अनुसार, इन साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूती देने में भूमिका निभाई। किसी मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की अहमियत इस बात पर निर्भर करती है कि वे किस तरह एक-दूसरे से जुड़ते हैं और अदालत के सामने प्रस्तुत सामग्री से घटनाक्रम की कितनी स्पष्ट तस्वीर बनती है।
सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन
24 फरवरी 2025: उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, सौरभ राजपूत लंदन से नौकरी छोड़कर मेरठ स्थित अपने घर लौटे।
3 मार्च 2025: पुलिस जांच में इसी अवधि के दौरान हत्या किए जाने की बात सामने आई।
4 मार्च 2025: शव छिपाने और नीले ड्रम में सीमेंट के इस्तेमाल से संबंधित घटनाक्रम जांच का हिस्सा बना।
18 मार्च 2025: सौरभ के भाई बबलू ने उनके लापता होने की शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
19 मार्च 2025: घर से नीले ड्रम में छिपा शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। मामले में मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
12 मई 2025: पुलिस ने अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।
30 सितंबर 2026: जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया।
14 अक्टूबर 2026: सजा पर सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
देशभर में चर्चा का विषय बना रहा मामला
सौरभ राजपूत हत्याकांड उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया, जब घर के भीतर नीले ड्रम से शव बरामद होने की जानकारी सामने आई। मामले में पुलिस जांच, शव छिपाने के आरोप, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्य तथा अदालत में चली सुनवाई ने इसे लगातार सुर्खियों में बनाए रखा।
सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देकर मृत्युदंड की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने मुस्कान की बेटियों के भविष्य को लेकर राहत की अपील की। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

