मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच बुधवार को हालात और तनावपूर्ण हो गए। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज के समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आने के बाद डूबने की खबर सामने आई है। वहीं, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर हूती विद्रोहियों के हमले से क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दूसरी ओर, अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद ईरान ने युद्ध के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है। गाजा में इजरायली हमले में एक महिला की मौत की खबर ने भी क्षेत्र में जारी हिंसा की गंभीरता को उजागर किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज डूबने से बढ़ी चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाज के डूबने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया कि बुधवार सुबह एक मालवाहक जहाज समुद्री बारूदी सुरंग से टकराने के बाद डूब गया। ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, जहाज उस समुद्री रास्ते से गुजर रहा था, जिसे ईरान ने अवैध और खतरनाक बताया था। प्रसारण में जहाज के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि वह करीब 2,500 कंटेनर ले जा रहा था।
युद्ध शुरू होने के बाद समुद्री माइंस से टकराकर किसी जहाज के डूबने की यह पहली रिपोर्ट बताई जा रही है। हालांकि, घटना में शामिल जहाज के चालक दल की स्थिति और हादसे से जुड़ी अन्य परिस्थितियों की पूरी जानकारी तत्काल सामने नहीं आई।
इस बीच, सिंगापुर के समुद्री और बंदरगाह प्राधिकरण ने भी अपने देश में पंजीकृत दो मालवाहक जहाजों से जुड़ी घटनाओं की जानकारी दी। प्राधिकरण के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय दोनों जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आ गए। इनमें से एक जहाज समुद्र में डूब गया, जबकि दूसरा सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में कामयाब रहा। डूबे जहाज के सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। दोनों घटनाओं में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
प्राधिकरण ने इन घटनाओं को अनुचित बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि सिंगापुर में पंजीकृत डूबा हुआ जहाज वही है, जिसके समुद्री माइंस से टकराने का दावा ईरान ने किया है।
अरामको मुख्यालय पर हमले से सऊदी अरब की सुरक्षा पर सवाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब में भी हमले की खबर सामने आई है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, यमन के हूती विद्रोहियों ने रात के समय धहरान स्थित सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को निशाना बनाया। बताया गया कि हमले में इमारत की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा। इन मंजिलों पर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय मौजूद थे। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस घटना ने सऊदी अरब के अहम आर्थिक और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अरामको दुनिया की प्रमुख तेल कंपनियों में शामिल है, इसलिए उसके मुख्यालय पर हमले की खबर का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ सकती है।
इसी बीच, सऊदी राजधानी रियाद में बुधवार को नए धमाकों की आवाजें सुनाई देने की खबर आई। हाल के दिनों में संवेदनशील ठिकानों के आसपास हुई घटनाओं ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के समर्थन में संभावित अमेरिकी सैन्य भागीदारी पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिका से बातचीत के बावजूद ईरान ने दिए सख्त संकेत
एक तरफ क्षेत्र में हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के बावजूद तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के साथ वार्ता जारी रहने पर भी देश को किसी संभावित युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।
टेलीविजन पर दिए गए संबोधन में गालिबाफ ने कहा कि ईरान की सबसे बड़ी चिंता यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका भविष्य में दोबारा हमला न करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन के साथ किसी समझौते पर हस्ताक्षर हो जाना भी इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे सैन्य कार्रवाई नहीं होगी।
गालिबाफ ने अमेरिका पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान को अपने विरोधियों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने अमेरिका से अपना रवैया बदलने और ईरानी जनता के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की अपील भी की।
गाजा में इजरायली हमले से महिला की मौत
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर गाजा में भी दिखाई दे रहा है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, गाजा शहर में इजरायली हमले में एक महिला की मौत हो गई। इस घटना से क्षेत्र में जारी हिंसा और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

