• info@thevaarta.com

इराक से आज अमेरिकी सेना की अंतिम विदाई, दो दशक बाद खत्म हुआ सैन्य मिशन

इराक से आज अमेरिकी सेना की अंतिम विदाई, दो दशक बाद खत्म हुआ सैन्य मिशन

इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का दो दशक से ज्यादा लंबा दौर आज, बुधवार 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। अमेरिकी सैनिक इराक में बचे अपने आखिरी सैन्य ठिकाने से भी हट रहे हैं। यह वापसी वर्ष 2024 में अमेरिका और इराक के बीच बनी सहमति के तहत हो रही है।

इराक में अमेरिकी सैन्य अभियान की शुरुआत 2003 में हुई थी। इसके बाद अमेरिकी सैनिक लंबे समय तक देश में तैनात रहे। वर्ष 2011 में अमेरिका ने अपनी बड़ी सैन्य मौजूदगी वापस ले ली थी, लेकिन 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के तेजी से उभरने के बाद अमेरिकी सैनिक फिर इराक लौटे। अब 30 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना की अंतिम वापसी के साथ इराक में अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य मिशन का यह अध्याय समाप्त हो रहा है।

2024 में तय हुई थी वापसी
अमेरिका और इराक ने सितंबर 2024 में अमेरिकी नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के सैन्य मिशन को समाप्त करने की समयसीमा पर सहमति बनाई थी। इस योजना के तहत अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की सैन्य भूमिका को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाना था। इस समझौते का मतलब अमेरिका और इराक के बीच सभी सुरक्षा संबंधों का अंत नहीं था। सैन्य मिशन समाप्त होने के बाद भी दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग जारी रखने की व्यवस्था रखी गई थी।

2003 से 2026 तक चला लंबा सैन्य अध्याय
अमेरिकी सेना की इराक में मौजूदगी करीब 23 साल तक अलग-अलग रूपों में रही। इस दौरान अमेरिकी सैनिकों ने इराक युद्ध, विद्रोह और बाद में ISIS के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया। इस लंबे संघर्ष में करीब 4,500 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। बड़ी संख्या में इराकी सैनिकों और आम नागरिकों ने भी जान गंवाई।

ईरान समर्थक समूह इसे अपनी उपलब्धि बता रहे
अमेरिकी सैनिकों की अंतिम वापसी को ईरान और उसके करीबी इराकी सशस्त्र समूह लंबे समय से की जा रही अपनी मांग की पूर्ति के रूप में देख रहे हैं। इन समूहों का लगातार कहना रहा है कि इराक में विदेशी सैन्य मौजूदगी खत्म होनी चाहिए। अब अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इराक में ईरान समर्थक राजनीतिक और सशस्त्र समूहों की भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

इराक के सामने सुरक्षा का सवाल
अमेरिकी सैनिकों के जाने के साथ इराक के सामने सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था का है। ISIS अब पहले की तरह इराक के बड़े हिस्से पर नियंत्रण नहीं रखता, लेकिन संगठन से जुड़े छोटे नेटवर्क और स्लीपर सेल अभी भी मौजूद हैं। अमेरिकी सेना की वापसी के बाद इराकी सुरक्षा बलों पर आतंकवाद विरोधी अभियानों और देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी। खास तौर पर खुफिया जानकारी, निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अमेरिकी सहयोग कम होने के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है।

अमेरिकी वापसी के बाद क्या बदलेगा?
30 सितंबर 2026 की वापसी सिर्फ अमेरिकी सैनिकों की इराक से विदाई नहीं है। यह उस सैन्य व्यवस्था में बदलाव का संकेत है, जिसके तहत अमेरिका दो दशक से ज्यादा समय तक इराक की सुरक्षा में प्रत्यक्ष भूमिका निभाता रहा।

अब इराक को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। साथ ही उसे ISIS के बचे नेटवर्क, ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों और क्षेत्रीय तनाव के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म होने के बाद इराक अपनी सुरक्षा चुनौतियों से किस तरह निपटता है और अमेरिका-इराक के बीच सुरक्षा सहयोग किस नए रूप में आगे बढ़ता है।

Related Articles

Leave a Reply