• info@thevaarta.com

68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का लखनऊ में हल्ला बोल, डिप्टी CM के आवास के बाहर प्रदर्शन; पुलिस से हुई धक्का-मुक्की

68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का लखनऊ में हल्ला बोल, डिप्टी CM के आवास के बाहर प्रदर्शन; पुलिस से हुई धक्का-मुक्की

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। नियुक्ति की मांग को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर पहुंच गए। यहां अभ्यर्थियों ने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और सरकार से लंबे समय से अटके भर्ती विवाद का समाधान करने की मांग उठाई। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान मौके पर पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

डिप्टी सीएम आवास के बाहर जुटे अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने उन्हें मौके से हटाने का प्रयास किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मी उठाकर वहां से ले गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें जबरन हटाया गया और पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की। कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। हालांकि, इन आरोपों को लेकर पुलिस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी लगातार सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। मौके पर ‘ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है’, ‘पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है’ और ‘केशव चाचा न्याय करो’ जैसे नारे सुनाई दिए।

आरक्षण के नियमों में अनदेखी का आरोप
अभ्यर्थियों का मुख्य आरोप 2018 में हुई 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया से जुड़ा है। उनका कहना है कि भर्ती में आरक्षण से संबंधित नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा में 5 फीसदी अंकों की छूट का प्रावधान था, लेकिन इसका लाभ संबंधित अभ्यर्थियों को नहीं दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि परिणाम सामान्य अभ्यर्थियों के समान मानकों के आधार पर जारी किया गया, जिससे आरक्षित वर्ग के कई अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए।

60 अंक के आधार पर संशोधित परिणाम की मांग
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी अब परीक्षा के न्यूनतम अंकों में 5 फीसदी की छूट देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 150 अंकों की परीक्षा में 40 फीसदी यानी 60 अंक को आधार मानते हुए परिणाम में संशोधन किया जाए। इसके बाद संशोधित मानकों के आधार पर नई चयन सूची जारी कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए।

मंत्रियों और अधिकारियों से बैठक का भी हवाला
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी तूफान सिंह ने दावा किया कि 10 सितंबर को उनकी बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के साथ बैठक हुई थी। उनके मुताबिक, बैठक में दोनों विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। तूफान सिंह का दावा है कि बातचीत के दौरान मंत्रियों और अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की थी।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से आरक्षण से जुड़े मामले में आदेश सामने आ चुके हैं, तो सरकार को अब आगे की प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए।

आठ साल पुराने विवाद के समाधान की मांग
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद लंबे समय से अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि करीब आठ साल से चल रहे इस विवाद का अब स्थायी समाधान होना चाहिए। उनका तर्क है कि आयोगों के निर्देशों और आरक्षण संबंधी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव किए जाएं और पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ किया जाए।

शनिवार को डिप्टी सीएम आवास के बाहर हुआ प्रदर्शन इसी मांग का हिस्सा रहा। अब देखना होगा कि सरकार इस पुराने भर्ती विवाद पर क्या रुख अपनाती है और अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply