नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार पर दबाव बढ़ाते हुए कई देशों के साथ भारत की चार कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। जिसके लिए अमेरिका ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ चलाया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये कंपनियां ईरान से जुड़े पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में शामिल रही हैं। कार्रवाई के दायरे में इन कंपनियों से जुड़े तीन भारतीय नागरिक भी आए हैं।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने आर्थिक दबाव अभियान को और तेज कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य ईरान की तेल आय और वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करना तथा ऐसे कारोबारी रास्तों को बंद करना है, जिनके जरिए ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं।
क्या है ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’?
इस पूरी कार्रवाई को अमेरिका के व्यापक आर्थिक दबाव अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के जरिए ईरान के वित्तीय संपर्कों और राजस्व स्रोतों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का संकेत दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान की तेल बिक्री से होने वाली आय उसके लिए महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत है। इसलिए इस आय को सीमित करने के लिए उन कंपनियों और नेटवर्क को निशाना बनाया जा रहा है जो कथित तौर पर ईरानी तेल कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित करने में मदद करते हैं।
किन भारतीय कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, जिन भारतीय कंपनियों को प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया है, उनमें पोर्टीज पार्टनर्स LLP, सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड, PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्राकृतीज इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
अमेरिका का कहना है कि ये कंपनियां अलग-अलग स्तर पर ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े लेनदेन या आयात गतिविधियों में शामिल रही हैं। इनके अलावा कुछ भारतीय नागरिकों पर भी कार्रवाई की गई है, जिन्हें संबंधित कंपनियों की गतिविधियों से जुड़ा बताया गया है।
अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई कंपनियों तक सीमित नहीं है। ईरान के तेल कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित करने में मदद करने वाले बिचौलियों, कस्टम ब्रोकर्स, समुद्री सेवा प्रदाताओं और तथाकथित शैडो-फ्लीट नेटवर्क पर भी अमेरिकी एजेंसियों की नजर है।
पोर्टीज पार्टनर्स पर क्या आरोप है?
पोर्टीज पार्टनर्स LLP को लेकर अमेरिका ने आरोप लगाया है कि इस भारत स्थित कस्टम ब्रोकर ने ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों के भारत में आयात को आसान बनाने में भूमिका निभाई। कंपनी के नामित पार्टनर बताए गए इंदरीसमियां अशरफमियां शेख और हरीश रामचंद्र रांगी को भी अमेरिकी कार्रवाई में शामिल किया गया है।
अमेरिका ने पोर्टीज पार्टनर्स को ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद, बिक्री, परिवहन या मार्केटिंग से जुड़े बड़े लेनदेन में कथित भागीदारी के आधार पर प्रतिबंधित किया है। अमेरिकी विदेश विभाग का दावा है कि कंपनी ने ईरान से आने वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई शिपमेंट को भारत पहुंचाने में सहायता की।
सदाशिव ओवरसीज पर करोड़ों डॉलर के आयात का आरोप
सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड भी अमेरिकी कार्रवाई के केंद्र में है। अमेरिका के अनुसार, कंपनी ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 6.9 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया है कि कंपनी ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद, अधिग्रहण, बिक्री, परिवहन या मार्केटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में जानबूझकर शामिल रही। इस आरोप के बाद कंपनी को अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत नामित किया गया है।
PP सॉफ्टटेक और उसके डायरेक्टर पर भी कार्रवाई
PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड पर भी ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, कंपनी ने जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। कंपनी के डायरेक्टर प्रशांत गर्ग को भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में शामिल किया गया है। इस कार्रवाई से साफ है कि अमेरिका ईरानी तेल कारोबार में बड़ी संस्थाओं के साथ उन कंपनियों और व्यक्तियों पर भी कार्रवाई कर रहा है जिनकी भूमिका सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों में बताई जा रही है।
प्राकृतीज इन्फ्रा इम्पेक्स पर भी आरोप
चौथी भारतीय कंपनी प्राकृतीज इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, कंपनी ने मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच करीब 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। अमेरिका का दावा है कि इन उत्पादों का आयात कई कंपनियों से किया गया, जिनमें अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत नामित BONJOURE COMMODITY F.Z.E. भी शामिल है। अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा के बाद इन चारों भारतीय कंपनियों की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
भारत के साथ कई देशों पर बढ़ा दबाव
अमेरिका की यह कार्रवाई भारतीय कंपनियों के साथ कई और देशों पर हुई है। ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल नेटवर्क को निशाना बनाने वाले व्यापक प्रतिबंध पैकेज में तुर्की, हांगकांग और ईरान से जुड़ी कई कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान अपने तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए शेल कंपनियों, तीसरे देशों के बिचौलियों और शैडो-फ्लीट ऑपरेटरों का इस्तेमाल करता है। इसी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए कस्टम ब्रोकर, पोर्ट एजेंट और समुद्री सेवा प्रदाता भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आ रहे हैं।
भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण
भारत की चार कंपनियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत से जुड़े कारोबारी संस्थानों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव का सवाल उठता है। ईरान के साथ तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन और अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था से जुड़े जोखिम अहम हो सकते हैं। फिलहाल अमेरिका ने अपनी कार्रवाई को ईरान के तेल और वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा बताया है।

