ब्रिटेन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। रूस की गुप्त गतिविधियां, ईरान से जुड़े कथित हमले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल और आतंकवाद का बदलता स्वरूप ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 के प्रमुख केन मैक्कलम ने अपने हालिया संबोधन में इन खतरों पर विस्तार से बात करते हुए आगाह किया कि अब सुरक्षा चुनौतियां केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रह गई हैं। साइबर हमले, ऑनलाइन दुष्प्रचार और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भी देश की सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं।
रूस की गतिविधियों को लेकर ब्रिटेन की चिंता बढ़ी
MI5 प्रमुख केन मैक्कलम ने रूस को पश्चिमी देशों के सामने मौजूद सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में से एक बताया। उनके मुताबिक, रूस की रणनीति केवल सीधे सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत गुप्त अभियान, साइबर गतिविधियां और दूसरे माध्यमों से विरोधी देशों पर दबाव बनाने की कोशिशें भी शामिल हैं। ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य कई बार NATO देशों के साथ सीधे युद्ध की स्थिति पैदा किए बिना उन्हें नुकसान पहुंचाना होता है।
मैक्कलम ने रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में बताया कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद ब्रिटेन और अन्य देशों ने रूसी राजनयिक मिशनों से बड़ी संख्या में अधिकारियों को निष्कासित किया। उनके अनुसार, इस कार्रवाई से रूस की कुछ गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिली। इसके बाद रूस से जुड़ी गतिविधियों में स्थानीय लोगों, स्वयंसेवकों और आपराधिक नेटवर्क के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि ऐसी गतिविधियों के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और समय रहते संभावित हमलों को रोकना पहले से अधिक जटिल होता जा रहा है।
ईरान पर भी गंभीर आरोप, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
रूस के बाद ईरान को लेकर भी ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई है। मैक्कलम के मुताबिक, ईरान से जुड़ी कथित गतिविधियों में ब्रिटेन के भीतर उसके विरोधियों, ईरानी मीडिया संगठनों और इजरायल के हितों को निशाना बनाने की कोशिशों के आरोप शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि इन गतिविधियों के लिए आपराधिक गिरोहों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
उनके अनुसार, पिछले एक साल में ईरान समर्थित गतिविधियों की जांच के सिलसिले में ब्रिटेन में 50 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कथित खतरों का दायरा किन लोगों और संस्थानों तक फैल सकता है। यहूदी समुदाय और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।
हालांकि, ईरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। ऐसे में इन मामलों को आरोपों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
AI ने बढ़ाई साइबर सुरक्षा की चुनौती
तकनीक के तेजी से विकास ने सुरक्षा के मोर्चे पर एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। MI5 प्रमुख के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साइबर हमलों और ऑनलाइन दुष्प्रचार की क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। इसके जरिए हमलावर पहले से अधिक प्रभावशाली संदेश तैयार कर सकते हैं और लोगों को भ्रमित करने वाली सामग्री बड़े पैमाने पर फैला सकते हैं।
AI की मदद से तैयार की गई नकली तस्वीरें, वीडियो और भ्रामक सूचनाएं लोगों की राय प्रभावित करने के साथ-साथ संस्थानों पर भरोसा कमजोर करने का माध्यम भी बन सकती हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब चुनौती केवल साइबर हमलों को रोकना नहीं, बल्कि वास्तविक और नकली सामग्री के बीच अंतर पहचानना भी है।
इसके अलावा, जैविक सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों को आशंका है कि AI जैसी उन्नत तकनीकों का दुरुपयोग खतरनाक जैविक एजेंटों से जुड़े अनुसंधान या आतंकवादी गतिविधियों में किया जा सकता है। हालांकि, ऐसी आशंकाओं को किसी वास्तविक हमले या विकसित जैविक हथियार का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
आतंकवाद और कट्टरपंथ का बदलता स्वरूप
ब्रिटेन में आतंकवाद का खतरा भी सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकताओं में बना हुआ है। अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे संगठन अब भी ऑनलाइन प्रचार और कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही, नस्लीय नफरत और धार्मिक समुदायों के खिलाफ बढ़ती शत्रुता को लेकर भी चिंता जताई गई है।
मैक्कलम ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिलाया कि आव्रजन विरोधी और मुस्लिम विरोधी विचार किस तरह कुछ मामलों में हिंसक कट्टरपंथ का रूप ले सकते हैं। उन्होंने एक मामले का उल्लेख किया, जिसमें महज 13 साल के एक बच्चे के दक्षिणपंथी विचारों से प्रभावित होकर कट्टरपंथ की ओर बढ़ने की बात सामने आई। बताया गया कि विदेशी एजेंसी की मदद से एक संभावित गंभीर हमले को रोकने में सफलता मिली।
ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह संकेत है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल संदिग्ध संगठनों पर नजर रखना पर्याप्त नहीं है। इंटरनेट पर फैलने वाली नफरत, युवाओं का कट्टरपंथ की ओर झुकाव और हिंसा को सही ठहराने वाली विचारधाराएं भी महत्वपूर्ण चुनौती हैं।
ब्रेक्सिट जनमत संग्रह में रूसी दखल का मुद्दा फिर चर्चा में
ब्रिटेन की राजनीति में रूस के कथित हस्तक्षेप का मामला भी एक बार फिर चर्चा में है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने हाल ही में आरोप लगाया कि रूस ने 2016 में यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने के मुद्दे पर हुए जनमत संग्रह को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
इस विषय पर मैक्कलम ने कहा कि उस समय रूसी मीडिया, विशेष रूप से ‘रूस टुडे’, ने जनमत संग्रह को लेकर आक्रामक रुख अपनाया था। सोशल मीडिया पर ट्रोल अकाउंट और बॉट्स की गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उस समय ऑनलाइन रूसी हस्तक्षेप का प्रभाव कितना व्यापक था, इसे लेकर निष्कर्ष निकालते समय सावधानी जरूरी है।
क्या ब्रिटेन के सामने सुरक्षा का नया दौर है?
MI5 प्रमुख की चेतावनियां बताती हैं कि ब्रिटेन को एक साथ कई मोर्चों पर सतर्क रहने की जरूरत है। रूस और ईरान से जुड़ी कथित गतिविधियां, AI के दुरुपयोग की आशंका, साइबर हमले और घरेलू कट्टरपंथ सुरक्षा व्यवस्था के लिए अलग-अलग तरह की चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
इन खतरों का मुकाबला करने के लिए खुफिया एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समाज में नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई भी अहम होगी। फिलहाल इन चेतावनियों का अर्थ यह नहीं है कि ब्रिटेन पर तत्काल किसी बड़े हमले का खतरा निश्चित है, बल्कि यह है कि सुरक्षा एजेंसियां बदलते जोखिमों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दे रही हैं।

