भारत में कारोबारियों के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाने वाले अमेरिकी अरबपति एलन मस्क को अब अमेरिका में ही आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने मस्क के राजनीतिक चंदे और उनकी संपत्ति में हुई बढ़ोतरी को लेकर निशाना साधा है। सैंडर्स ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव जिताने में मदद करने के बाद मस्क की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बनाए रखने के लिए मस्क के खर्च पर भी सवाल उठाए।
सैंडर्स ने क्या कहा?
सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने 12 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एलन मस्क ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत में मदद के लिए 290 मिलियन डॉलर खर्च किए थे। सैंडर्स के मुताबिक, ट्रंप के चुनाव के बाद मस्क की संपत्ति 696 अरब डॉलर बढ़ गई और वह दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन गए।
सैंडर्स ने आगे कहा कि इसके बावजूद मस्क अब अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बनाए रखने के लिए 366 मिलियन डॉलर खर्च कर रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट के अंत में राजनीतिक व्यवस्था में अरबपतियों के प्रभाव का विरोध करते हुए ‘स्टॉप मस्क, स्टॉप ओलिगार्की’ का नारा दिया। ये संपत्ति संबंधी आंकड़े सैंडर्स के दावे हैं, न कि स्वतंत्र रूप से प्रमाणित कारण-परिणाम का निष्कर्ष।
रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कितना पैसा खर्च हुआ?
रॉयटर्स की 12 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनाव चक्र में लगभग 366 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इसमें से 276 मिलियन डॉलर जुलाई के बाद खर्च किए गए। यह खर्च मुख्य रूप से रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी कांग्रेस में अपना नियंत्रण बनाए रखने में मदद देने के लिए किया गया है। मस्क के सुपर पीएसी America PAC के प्रवक्ता ने इस खर्च के आंकड़ों की पुष्टि की है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मतदान होता है। इनके नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं कि राष्ट्रपति को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में कितना राजनीतिक समर्थन मिलेगा।
भारत में स्टारलिंक को लेकर भी विवाद
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की शुरुआत में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित उनकी कंपनी की बाजार में एंट्री में बाधा डाल रहे हैं।
हालांकि, भारत के संचार मंत्रालय ने नियामकीय प्रक्रिया में भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है। स्टारलिंक को भारत में परिचालन शुरू करने के लिए जरूरी सुरक्षा मंजूरियों और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना है।
अमेरिकी राजनीति में अरबपतियों के प्रभाव पर बहस
सैंडर्स की आलोचना ने एक बार फिर अमेरिकी चुनावों में बड़े कारोबारियों और अरबपतियों के धन की भूमिका पर बहस छेड़ दी है। मस्क के राजनीतिक खर्च को लेकर उठे सवालों का केंद्र यह है कि क्या अत्यधिक संपत्ति रखने वाले लोगों का चुनावी चंदा राजनीतिक दलों और सरकारी नीतियों पर असमान प्रभाव डाल सकता है।
हालांकि, चुनावी खर्च और संपत्ति में बढ़ोतरी के बीच समय का संबंध होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि राजनीतिक समर्थन के कारण ही किसी कारोबारी की संपत्ति बढ़ी। सैंडर्स की टिप्पणी राजनीतिक आलोचना है, जबकि चुनावी खर्च का आंकड़ा मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक चंदे से जुड़े रिकॉर्ड पर आधारित है।

