देश में टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही केंद्र सरकार अब एक और बड़े बदलाव की तैयारी में दिखाई दे रही है। कॉरपोरेट टैक्स, इनकम टैक्स और GST में कई अहम सुधारों के बाद अब सरकार का अगला फोकस कस्टम ड्यूटी को अधिक व्यावहारिक और आसान बनाने पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि आने वाले बजट में आयात शुल्क (Custom Duty) को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं, जिससे व्यापार और उद्योग जगत को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
अधिकांश वस्तुओं पर सिंगल डिजिट टैरिफ का लक्ष्य
राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से कस्टम टैरिफ ढांचे को सरल बना रही है। उनका लक्ष्य है कि वर्ष 2027-28 तक अधिकांश उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी सिंगल डिजिट यानी 10 प्रतिशत से कम के स्तर पर लाई जा सके। उन्होंने बताया कि कुछ चुनिंदा वस्तुओं को छोड़कर कई उत्पादों पर शुल्क पहले ही तर्कसंगत किया जा चुका है और सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी है।
व्यापार को आसान बनाने पर सरकार का जोर
पिछले कुछ वर्षों के बजट में सरकार ने कस्टम ड्यूटी की जटिल व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। विशेष रूप से इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने पर ध्यान दिया गया है। यह वह स्थिति होती है, जब किसी तैयार उत्पाद पर लगने वाला शुल्क उसके निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल से कम होता है, जिससे घरेलू उद्योगों को नुकसान हो सकता है। सरकार का मानना है कि संतुलित शुल्क व्यवस्था से विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और कारोबार करना अधिक आसान होगा।
सरकारी निवेश से बढ़ा निजी क्षेत्र का भरोसा
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के बाद केंद्र सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं पर किए गए बड़े पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) का सकारात्मक असर देखने को मिला है। इससे निजी कंपनियों का विश्वास मजबूत हुआ और उन्होंने नए निवेश के लिए आगे आना शुरू किया। उनका मानना है कि सरकारी निवेश अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा पैदा करता है और निजी क्षेत्र को जोखिम उठाने के लिए प्रेरित करता है।
राज्यों को कर्ज लेने में बरतनी होगी सावधानी
निर्मला सीतारमण ने राज्यों की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकास के लिए कर्ज लेना आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि उसका उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण में हो और भविष्य में उसे आसानी से चुकाया जा सके। उन्होंने बताया कि कई राज्य अपने पुराने कर्ज के पुनर्गठन (Debt Restructuring) के लिए केंद्र सरकार के साथ लगातार संवाद कर रहे हैं। उनका कहना था कि कर्ज आर्थिक विकास का माध्यम होना चाहिए, न कि आने वाली पीढ़ियों पर बोझ।
अगले बजट पर टिकी उद्योग जगत की नजर
वित्त मंत्री के ताजा संकेतों के बाद अब उद्योग जगत और व्यापारिक समुदाय की निगाहें आगामी केंद्रीय बजट पर टिकी हैं। यदि सरकार कस्टम ड्यूटी को और तर्कसंगत बनाती है, तो इससे आयात-निर्यात, घरेलू विनिर्माण और निवेश के माहौल को नई गति मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह कदम भारत को वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

