सोने और चांदी की कीमतों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने विदेशों में बेचे जाने वाले सोने-चांदी के जेवरात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद ज्वैलरी निर्यातकों को पहले के मुकाबले कम रकम वापस मिलेगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार के इस कदम से घरेलू बाजार में सोने-चांदी के भाव बढ़ेंगे या आम ग्राहकों की जेब पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा? हालांकि, इस फैसले का सीधा असर निर्यात कारोबार पर पड़ने की उम्मीद है, जबकि आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव कई दूसरे आर्थिक कारकों पर भी निर्भर करेगा।
सोने और चांदी के जेवरात पर कितनी घटाई गई दरें?
वित्त मंत्रालय की नई अधिसूचना के अनुसार, सोने के जेवरात पर ड्यूटी ड्रॉबैक की दर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई है। इस बदलाव के बाद निर्यातकों को अब हर ग्राम सोने के जेवर पर 57.88 रुपये कम रिफंड मिलेगा।
वहीं, चांदी के जेवरात और कुछ अन्य चांदी के सामान के लिए भी दरों में कटौती की गई है। टैरिफ आइटम 711302 और 711401 के तहत आने वाली संबंधित श्रेणियों की दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। यानी निर्यातकों को अब प्रति किलोग्राम 2,642.07 रुपये कम वापस मिलेंगे।
इन बदलावों का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि ज्वैलरी कारोबार में कच्चे माल की लागत काफी अहम होती है। रिफंड की रकम कम होने से निर्यातकों के खर्च और मुनाफे के समीकरण पर असर पड़ सकता है।
क्या होता है ड्यूटी ड्रॉबैक और कारोबारियों को क्यों मिलता है पैसा?
ड्यूटी ड्रॉबैक को आसान भाषा में समझें तो यह निर्यातकों को मिलने वाली शुल्क वापसी की व्यवस्था है। जब कारोबारी विदेश में बेचने के लिए सामान तैयार करते हैं, तो उसके उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले आयातित कच्चे माल पर उन्हें कुछ शुल्क चुकाना पड़ सकता है। निर्धारित सरकारी नियमों और दरों के तहत ऐसे निर्यात से जुड़े शुल्क का कुछ हिस्सा वापस किया जा सकता है।
सोने-चांदी के जेवर बनाने और उन्हें दूसरे देशों में बेचने वाले कारोबारियों के लिए यह व्यवस्था लागत को संतुलित करने में मदद करती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।
लेकिन जब ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें घटती हैं, तो निर्यातकों को मिलने वाली वापसी राशि कम हो जाती है। ऐसे में उनके सामने लागत को नियंत्रित करने, मुनाफे का संतुलन बनाए रखने और विदेशी खरीदारों के साथ प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कारोबार करने की चुनौती बढ़ सकती है।
जुलाई में सरकार ने बढ़ाई थीं दरें, अब क्यों हुई कटौती?
इस फैसले को समझने के लिए कुछ महीने पीछे जाना जरूरी है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में सरकार ने सोने और चांदी के जेवरात की कुछ श्रेणियों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में बड़ी बढ़ोतरी की थी।
उस समय सोने के जेवरात की दर 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई थी। इसी तरह, चांदी के जेवरात और उससे बने कुछ सामान की दर 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम की गई थी। इस बढ़ोतरी का उद्देश्य बढ़ती लागत के बीच निर्यातकों को राहत देना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा को समर्थन देना था।
अब दरों में दोबारा बदलाव किया गया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सचिव सुरेंद्र मेहता के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया कि सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से वास्तविक आयात शुल्क भी कम हुआ है। उनके मुताबिक, ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें प्रतिशत के बजाय निश्चित रकम के आधार पर तय थीं। ऐसे में कीमतों और शुल्क में बदलाव के बाद दरों को संशोधित करना जरूरी हो गया।
क्या आम ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा असर?
सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो सोने-चांदी के जेवरात का निर्यात करते हैं। उन्हें अब पहले की तुलना में कम रिफंड मिलेगा। इससे उनकी लागत और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस कटौती के कारण भारत में सोने-चांदी के आभूषण महंगे हो जाएंगे या सस्ते होंगे।
घरेलू बाजार में इन धातुओं की कीमतें कई कारकों से तय होती हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, स्थानीय मांग और कारोबारियों की लागत शामिल हैं। इसलिए ड्यूटी ड्रॉबैक में कटौती का घरेलू कीमतों पर असर अपने आप तय नहीं होता।
अगर निर्यातक बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन करते हैं, तो ग्राहकों पर इसका सीधा प्रभाव सीमित रह सकता है। वहीं, कारोबार की लागत और कीमतों में दूसरे बदलाव भी अंतिम दरों को प्रभावित कर सकते हैं।
सोना-चांदी खरीदने से पहले क्या समझें?
फिलहाल इस फैसले को ज्वैलरी निर्यात कारोबार से जुड़ा बदलाव समझना ज्यादा उचित होगा। आम ग्राहकों को केवल ड्यूटी ड्रॉबैक की कटौती के आधार पर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए। सोना या चांदी खरीदने से पहले उस दिन का बाजार भाव, मेकिंग चार्ज और लागू करों की जानकारी लेना बेहतर है।

