उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान अब नेताओं की बयानबाजी में भी नजर आने लगी है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार जल्द सीट शेयरिंग की मांग कर रहे हैं, जबकि कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी बहस को और तेज कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही गठबंधन में चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है। इसी बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो चर्चित मुस्लिम नेताओं – इमरान मसूद और इकरा हसन के बयान चर्चा में हैं।
यह टकराव सिर्फ दो नेताओं के बीच की बयानबाजी नहीं है। इसके पीछे सपा और कांग्रेस के बीच सीटों, राजनीतिक प्रभाव और चुनावी रणनीति को लेकर चल रही बातचीत भी अहम है।
इमरान मसूद क्यों बना रहे हैं दबाव?
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पिछले कुछ समय से सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। 3 सितंबर को उन्होंने कहा था कि अगर 2027 में बीजेपी का मुकाबला करना है तो सीटों का बंटवारा जल्द तय करना होगा। उनका कहना था कि फैसला जितना देर से होगा, विपक्षी गठबंधन की तैयारियों को उतना नुकसान हो सकता है।
मसूद ने कांग्रेस की स्थिति को भी मजबूती से सामने रखा। उनका तर्क था कि 2017 में कांग्रेस कमजोर स्थिति में होने के बावजूद 107 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी। अब पार्टी की स्थिति पहले से बेहतर है, इसलिए सीटों का बंटवारा भी उसकी मौजूदा राजनीतिक ताकत को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
18 सितंबर को मसूद ने सहारनपुर की दो विधानसभा सीटों पर अपना दावा भी जताया। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र की इन दोनों सीटों पर वह पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं। साथ ही उन्होंने एक बार फिर गठबंधन को लेकर फैसला जल्द करने की बात कही।
यानी कांग्रेस की ओर से मसूद का संदेश साफ है – गठबंधन हो तो सीटों को लेकर जल्द सहमति बने और कांग्रेस को उसकी राजनीतिक स्थिति के हिसाब से हिस्सेदारी मिले।
इकरा हसन ने क्या कहा?
इमरान मसूद की बयानबाजी के बीच कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस को लेकर कड़ा बयान दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इकरा हसन ने कहा कि अगर सपा-कांग्रेस गठबंधन बना रहता है तो ठीक है, लेकिन अगर गठबंधन नहीं रहता तो इसका नुकसान कांग्रेस को ज्यादा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी का मुकाबला करने की क्षमता सपा और अखिलेश यादव के पास है। इकरा का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत और सार्वजनिक बयानबाजी दोनों जारी हैं।
पश्चिमी यूपी क्यों बना केंद्र?
इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण चेहरे हैं। मसूद सहारनपुर से कांग्रेस सांसद हैं, जबकि इकरा हसन कैराना लोकसभा सीट से सपा सांसद हैं। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ किसान, दलित और अन्य सामाजिक समूहों का चुनावी समीकरण भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र की सीटों पर सपा और कांग्रेस दोनों की दिलचस्पी स्वाभाविक है।
यही वजह है कि सहारनपुर और आसपास की सीटों को लेकर होने वाली बातचीत केवल सीटों की संख्या का मामला नहीं है। यह दोनों दलों के स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों और क्षेत्रीय प्रभाव से भी जुड़ी हुई है।
असली विवाद सीटों का है
सपा-कांग्रेस के बीच मौजूदा खींचतान की सबसे बड़ी वजह सीट शेयरिंग ही है। 21 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दल गठबंधन में चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं, लेकिन सीटों को लेकर अभी पेंच बना हुआ है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कांग्रेस जल्द सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय करना चाहती है, जबकि सपा ने गठबंधन में किसी तरह की समस्या होने की स्थिति में सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी रखने की बात कही है।
यही स्थिति इमरान मसूद के बयानों को महत्वपूर्ण बनाती है। वह लगातार जल्द फैसला लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सपा की ओर से संगठन और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्या यह इमरान मसूद बनाम इकरा हसन की सीधी लड़ाई है?
इसे फिलहाल सीधे तौर पर व्यक्तिगत राजनीतिक लड़ाई कहना जल्दबाजी होगी। दोनों नेताओं के बयान जरूर एक-दूसरे के जवाब के तौर पर देखे जा रहे हैं, लेकिन इनके पीछे सपा और कांग्रेस के बीच चल रही बड़ी राजनीतिक बातचीत है। एक तरफ कांग्रेस अपनी हिस्सेदारी और सीटों को लेकर दबाव बना रही है, तो दूसरी तरफ सपा अपने राजनीतिक आधार और संगठन के हिसाब से सीटों का समीकरण देख रही है। इसी वजह से इमरान मसूद और इकरा हसन की बयानबाजी को सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग की खींचतान के बड़े संदर्भ में देखना ज्यादा सही होगा।
2027 से पहले आगे क्या होगा?
फिलहाल सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन खत्म होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। दोनों पार्टियां चुनावी तैयारी कर रही हैं और गठबंधन की संभावना भी बनी हुई है। लेकिन सीटों का बंटवारा कब और किस फॉर्मूले पर होगा, यही सबसे बड़ा सवाल है। इमरान मसूद जल्द फैसला चाहते हैं, जबकि सपा अपनी संगठनात्मक तैयारियों के साथ आगे बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत के साथ-साथ नेताओं की बयानबाजी भी यूपी की राजनीति का अहम हिस्सा बनी रह सकती है।
पश्चिमी यूपी से सामने आए इमरान मसूद और इकरा हसन के बयान इसी बड़े राजनीतिक समीकरण की झलक हैं। असली तस्वीर तब साफ होगी, जब सपा और कांग्रेस सीटों को लेकर औपचारिक समझौते पर पहुंचेंगी।

