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यूपी चुनाव से पहले BJP-सपा आमने-सामने, MLC चुनाव में काशी क्षेत्र में बढ़ी सियासी हलचल

यूपी चुनाव से पहले BJP-सपा आमने-सामने, MLC चुनाव में काशी क्षेत्र में बढ़ी सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले वाराणसी खंड शिक्षक एवं स्नातक एमएलसी चुनाव ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। एक ओर बीजेपी संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने में जुटी है, वहीं सपा ने प्रत्याशी घोषित कर चुनावी बढ़त हासिल कर ली है।

बीजेपी ने 10 जिलों के पदाधिकारियों के साथ बनाई रणनीति
बीजेपी की ओर से काशी क्षेत्र कार्यालय में वाराणसी खंड शिक्षक एवं स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें संबंधित 10 जिलों के जिला अध्यक्ष, जिला संयोजक और अन्य पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष शंकर गिरि ने मतदाता सूची को लेकर चल रहे काम की समीक्षा की। कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जुड़वाने और शिक्षकों के बीच संपर्क अभियान को प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।

बीजेपी की कोशिश है कि चुनाव से पहले संगठन का जमीनी नेटवर्क मजबूत किया जाए और शिक्षक व स्नातक मतदाताओं तक पार्टी की पहुंच बढ़ाई जाए। हालांकि, अभी पार्टी ने इस सीट के लिए अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। माना जा रहा है कि जल्द ही उम्मीदवार को लेकर फैसला हो सकता है।

सपा ने आशुतोष सिन्हा पर फिर जताया भरोसा
प्रत्याशी चयन के मामले में समाजवादी पार्टी फिलहाल बीजेपी से आगे नजर आ रही है। सपा ने वाराणसी खंड शिक्षक एवं स्नातक एमएलसी चुनाव के लिए मौजूदा एमएलसी आशुतोष सिन्हा को ही दोबारा मैदान में उतारने का फैसला किया है।

आशुतोष सिन्हा लंबे समय से चुनाव की तैयारियों में सक्रिय बताए जा रहे हैं। मतदाता सूची में नए नाम जुड़वाने के साथ-साथ वह शिक्षक मतदाताओं से लगातार संपर्क भी कर रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि मौजूदा जनाधार को बनाए रखने के साथ नए मतदाताओं को भी अपने पक्ष में जोड़ा जाए।

विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों की अहम परीक्षा
वाराणसी खंड शिक्षक एवं स्नातक एमएलसी चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच पकड़ बनाने की कोशिश दोनों प्रमुख दलों के लिए संगठनात्मक ताकत का भी संकेत दे सकती है।

फिलहाल सपा ने अपना उम्मीदवार घोषित कर चुनावी तैयारी में बढ़त बना ली है, जबकि बीजेपी संगठनात्मक स्तर पर मैदान तैयार करने में जुटी है। ऐसे में प्रत्याशी घोषित होने के बाद दोनों दलों के बीच मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।

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