लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को लेकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा संगठन में छोटा या बड़ा कोई पद नहीं दिया जाएगा। मायावती के मुताबिक, भविष्य में भी उनके भतीजों को पार्टी की जिम्मेदारी सौंपने की कोई योजना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने और आगामी विधानसभा चुनावों में युवा चेहरों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
मायावती के इस ऐलान को पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन की भविष्य की दिशा से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति को पार्टी में जिम्मेदारी मिलने का फायदा उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को राजनीतिक रूप से नहीं मिलना चाहिए। उनका जोर संगठन में मेहनत, निष्ठा और क्षमता के आधार पर लोगों को आगे बढ़ाने पर है।
Gen-Z को मिलेगी संगठन में 50 फीसदी भागीदारी
बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी लंबे समय से युवाओं को संगठन में अधिक अवसर देने की दिशा में काम कर रही है। खास तौर पर Gen-Z को करीब 50 फीसदी तक संगठन में भागीदारी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मायावती के मुताबिक, नई पीढ़ी को संगठन से जोड़ने का उद्देश्य सिर्फ पार्टी की उम्र बढ़ाना नहीं, बल्कि अम्बेडकरवादी विचारधारा और संवैधानिक मूल्यों को आगे ले जाने के लिए युवाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है। उन्होंने पार्टी संगठन में युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर जोर दिया।
यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव पर भी नजर
मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी पार्टी की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में उम्मीदवारों के चयन के दौरान सर्वसमाज के कर्मठ और युवा लोगों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। पार्टी प्रमुख का कहना है कि बसपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए ऐसे चेहरों को आगे लाना जरूरी है, जो संगठन और आंदोलन से जुड़े हों तथा जनता के बीच सक्रिय रूप से काम कर रहे हों। इससे चुनावी राजनीति के साथ-साथ संगठन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
आनंद कुमार के बेटों को क्यों नहीं मिलेगी राजनीतिक जिम्मेदारी?
मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि वह लंबे समय से उनके साथ रहते हुए पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। हालांकि, अब उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ देना पार्टी और आंदोलन के हित में नहीं होगा।
इसी वजह से उन्होंने फैसला किया है कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में किसी पद पर रहकर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं, मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में उनके भतीजे बड़े होने के बाद भी उन्हें संगठन में जिम्मेदारी सौंपने का सवाल नहीं उठेगा। यह फैसला पार्टी में परिवार आधारित राजनीति को लेकर मायावती की घोषित नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
बेटी दीपिका को मिल सकती है जिम्मेदारी
हालांकि मायावती ने आनंद कुमार के परिवार के एक अन्य सदस्य के लिए भविष्य में संभावनाएं खुली रखी हैं। उन्होंने कहा कि अगर आनंद कुमार को आगे पार्टी और उनकी मदद के लिए किसी अन्य सदस्य की आवश्यकता पड़ती है, तो उनकी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ली जा सकती है। मायावती के अनुसार, दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। भविष्य में उनकी ईमानदारी, निष्ठा और कार्यक्षमता को देखते हुए पार्टी में आवश्यकता के अनुसार उन्हें जिम्मेदारी दी जा सकती है।
अगर दीपिका पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आनंद कुमार की ओर से पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
कांशीराम की नीति का भी किया जिक्र
परिवारवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए मायावती ने बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की राजनीतिक सोच का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवारवाद के खिलाफ रहे और उनकी शिष्या होने के नाते वह भी इसी नीति को आगे बढ़ा रही हैं। मायावती ने कहा कि पार्टी और आंदोलन को मजबूत रखने के लिए वह अपने रिश्तेदारों के मोह में नहीं पड़ेंगी। उन्होंने अपने अविवाहित होने और निजी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा और देखभाल से जुड़ी जरूरतों के कारण आनंद कुमार को उनके साथ रखना पड़ा, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को राजनीतिक लाभ दिया जाएगा।
सरकार बनने पर परिवार को नहीं मिलेगा अतिरिक्त लाभ
बसपा प्रमुख ने संगठन के साथ-साथ सत्ता में आने की स्थिति में भी परिवारवाद से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को सरकार या पार्टी में कोई जिम्मेदारी मिलती है, तो उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को उस पद का राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। उनका कहना है कि बसपा को परिवारवाद से मुक्त रखते हुए सर्वसमाज के लोगों को आंदोलन से जोड़ना जरूरी है। मायावती ने इसे सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के लक्ष्य से भी जोड़ा।
निष्कासित नेताओं की वापसी, फेक खबर
मायावती ने पार्टी से निष्कासित किए गए कुछ नेताओं की संभावित वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों की बसपा में दोबारा वापसी की खबरें और दावे प्रसारित किए जा रहे हैं, जिन्हें अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर किया गया था। बसपा प्रमुख ने इन खबरों को गलत और मिथ्या प्रचार बताते हुए कहा कि ऐसे नेताओं की पार्टी में वापसी नहीं होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी सूचनाओं से सावधान रहने की सलाह दी।
मायावती ने कार्यकर्ताओं को किया सतर्क
मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं से विरोधी राजनीतिक दलों, संगठनों और सोशल मीडिया पर चल रहे कथित प्रचार से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी ताकतों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में बसपा को सत्ता में आने से रोकना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अम्बेडकरवादी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया।

