उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और पूर्वी यूपी में इंसेफेलाइटिस की स्थिति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीते साढ़े नौ वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। गोरखपुर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस इंसेफेलाइटिस को लेकर कभी पूर्वांचल के परिवारों में डर का माहौल रहता था, अब उसकी स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि “माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है।”
कभी इंसेफेलाइटिस से जूझता था पूर्वांचल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्वी उत्तर प्रदेश की पुरानी स्वास्थ्य व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर और आसपास के इलाकों में इंसेफेलाइटिस के कारण बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएं चिंता का बड़ा कारण थीं। उस दौर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज को पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता था, लेकिन वहां संसाधनों की कमी भी थी।
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, उस समय हालात ऐसे थे कि एक बेड पर कई मरीजों को भर्ती करना पड़ता था। उन्होंने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पुराने इंसेफेलाइटिस वार्ड की स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि जरूरी सुविधाओं की कमी के बावजूद मरीजों का इलाज किया जाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आज वही संस्थान सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और इंसेफेलाइटिस समेत कई गंभीर बीमारियों के उपचार का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, गोरखपुर में एम्स शुरू हो चुका है, जबकि महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
सीएम ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 तक पहुंच गई है। प्रदेश में दो एम्स भी संचालित हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, एमबीबीएस की सीटों की संख्या करीब 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी है। पीजी सीटों में भी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज से हो रही यूपी की पहचान
स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश के कई जिलों की पहचान कुख्यात माफिया और अपराधियों के नाम से होती थी। गोरखपुर में डॉक्टरों के अपहरण, रंगदारी और धमकी जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय चिकित्सकों को भी असुरक्षा का सामना करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश में डॉक्टरों, व्यापारियों और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश की पहचान अब माफिया के बजाय ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ जैसे स्वास्थ्य क्षेत्र के लक्ष्य से बन रही है। यह मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम में किया गया राजनीतिक और प्रशासनिक दावा है।
हर जिला अस्पताल में डायलिसिस सुविधा का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने डायलिसिस सेवाओं को लेकर भी सरकार की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले गंभीर मरीजों को डायलिसिस के लिए गोरखपुर से लखनऊ या बीएचयू जैसे बड़े केंद्रों की ओर जाना पड़ता था। अब गोरखपुर में ही ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं और सरकार जिला अस्पतालों तक डायलिसिस सेवा पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।
योगी ने बताया कि प्रदेश के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट शुरू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों का रुख न करना पड़े और गंभीर बीमारियों की उपचार सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सके।
IMA के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का लोकार्पण
गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से स्थापित चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया। उन्होंने सेंटर का निरीक्षण करते हुए वहां मौजूद उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उत्तर प्रदेश के स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की सूची में भी IMA Charitable Blood Centre, गोरखपुर का उल्लेख दर्ज है।
मुख्यमंत्री ने IMA की सामाजिक पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसी चिकित्सा संस्था की भूमिका सिर्फ मरीजों का इलाज करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ समाज के जरूरतमंद वर्ग तक पहुंचाना भी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि IMA ने 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में निशुल्क ओपीडी की शुरुआत की थी। बाद में संगठन को कार्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराने में प्रशासन की ओर से सहयोग मिला और उसी जमीन पर चैरिटेबल ब्लड सेंटर विकसित किया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह केंद्र पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त उपलब्ध कराने में मददगार होगा।
‘रक्त बनाया नहीं जा सकता’, स्वैच्छिक रक्तदान की अपील
रक्तदान को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक, मशीनें, दवाएं और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जा सकते हैं, लेकिन रक्त का निर्माण नहीं किया जा सकता। ऐसे में जरूरतमंद मरीजों के लिए स्वैच्छिक रक्तदान बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने चिकित्सकों से सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों के जरिए लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्त की मांग के मुकाबले उपलब्धता पर्याप्त नहीं हो पाती, इसलिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
पेशेवर रक्तदाताओं पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने पेशेवर रक्तदान की प्रथा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने चिकित्सकों और प्रशासन से ऐसी गतिविधियों की जानकारी सामने आने पर उचित कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।
गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय चैरिटी का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उदाहरण देते हुए कहा कि इसकी शुरुआत को लेकर पहले सीमित बेड की योजना थी, लेकिन चिकित्सकों के सहयोग से इसे शुरुआत में ही 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। उनके मुताबिक, इस अस्पताल में ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
उन्होंने इसे इस बात का उदाहरण बताया कि सामाजिक सहयोग और चैरिटी के माध्यम से भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को संचालित किया जा सकता है।
मेडटेक और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। इसके तहत आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाने और एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम किए जाने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का संदेश व्यापक था – स्वास्थ्य सेवाओं को बड़े शहरों के आलावा हर जिले में स्थानीय स्तर तक पहुंचाना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करना और रक्तदान जैसी सामाजिक भागीदारी को मजबूत करना। वहीं इंसेफेलाइटिस को लेकर मुख्यमंत्री का दावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों के स्वास्थ्य प्रयासों को रेखांकित करने के तौर पर सामने आया।

