जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मौजूदा जाति जनगणना की प्रश्नावली में जातियों के नाम दर्ज करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि ‘ड्रॉप-डाउन’ विकल्पों की जगह लोगों को जाति का नाम खुद लिखने की सुविधा देना पूरी प्रक्रिया में बड़ी खामी पैदा कर सकता है। कांग्रेस का कहना है कि अगर एक ही जाति के अलग-अलग नाम, उपजातियां और वर्तनी दर्ज हुईं तो आंकड़ों को एक समान करना मुश्किल होगा। पार्टी ने आशंका जताई है कि इससे जातियों की वास्तविक संख्या और सामाजिक स्थिति का सही आकलन प्रभावित हो सकता है।
‘सिर्फ गिनती नहीं, सामाजिक न्याय का सवाल’
जयराम रमेश ने कहा कि जातिगत जनगणना का उद्देश्य केवल अलग-अलग जातियों की संख्या पता करना नहीं है। उनके मुताबिक इसका संबंध सामाजिक न्याय, सही आंकड़ों और विभिन्न वर्गों की उचित हिस्सेदारी से भी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने उसकी आपत्तियों के बावजूद जाति जनगणना के मौजूदा प्रारूप में पहले से तय विकल्पों वाली सूची के बजाय ‘ओपन-एंडेड’ व्यवस्था अपनाई है। पार्टी इसे गंभीर प्रशासनिक खामी बता रही है।
ड्रॉप-डाउन और ओपन-एंडेड में क्या अंतर?
‘ड्रॉप-डाउन’ व्यवस्था में व्यक्ति को पहले से उपलब्ध विकल्पों में से अपनी जाति चुननी होती है। वहीं ‘ओपन-एंडेड’ व्यवस्था में व्यक्ति को जाति का नाम स्वयं लिखना होता है। कांग्रेस का तर्क है कि अलग-अलग लोग एक ही जाति का नाम अलग तरीके से लिख सकते हैं। इससे आंकड़ों के संकलन और वर्गीकरण के दौरान भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका है।
खरगे-राहुल ने PM मोदी को लिखा पत्र
कांग्रेस के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र भी भेजा था। पत्र में मौजूदा प्रश्नावली पर आपत्ति जताते हुए जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की गई थी। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि 20 अगस्त को भेजे गए पत्र का अब तक जवाब नहीं मिला है।
तेलंगाना और बिहार मॉडल का दिया उदाहरण
जयराम रमेश ने कहा कि जातियों की गणना के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों का उदाहरण देते हुए इसे व्यावहारिक विकल्प बताया। कांग्रेस की मांग है कि नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों, सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों और आम लोगों के साथ व्यापक चर्चा की जाए।
पार्टी ने पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में संवाददाता सम्मेलन कर जाति जनगणना को अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय तरीके से कराने की मांग भी दोहराई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के हमले के बाद जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है।

