नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट की दुनिया में UPI और RuPay का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सरकार को UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर नियम तय करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। हालांकि, फिलहाल आम यूजर्स के लिए UPI भुगतान पर जीरो MDR की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अभी UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज
इस बदलाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब UPI से भुगतान करने पर लोगों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा? फिलहाल इसका जवाब नहीं है। मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर यूजर से शुल्क नहीं ले सकते। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी संसद में स्पष्ट किया था कि आम यूजर्स के लिए UPI भुगतान को नि:शुल्क बनाए रखा जाएगा। भविष्य में MDR लागू होने की स्थिति में भी इसका दायरा कुछ निश्चित श्रेणियों के कारोबारी लेनदेन तक सीमित रहने की बात कही गई है।
सरकार तय कर सकेगी किन लेनदेन पर लगेगा MDR
नए कानून का सबसे अहम पहलू यह है कि सरकार अब अधिसूचना के जरिए यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन को MDR से छूट दी जाएगी। यानी आगे चलकर डिजिटल पेमेंट के अलग-अलग वर्गों के लिए MDR को लेकर नियम बनाने का रास्ता खुल गया है। इस संबंध में UPI और पेमेंट सिस्टम के संचालन से जुड़ी समिति की भूमिका भी अहम होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को भी मिलेगा बढ़ावा
राष्ट्रपति ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 को भी मंजूरी दी है। इस कानून का उद्देश्य भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करने, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है। विदेशी कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कराने पर मिलने वाली आयकर छूट को वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ाया गया है।
मोबाइल से लेकर सर्वर तक पर फोकस
इस टैक्स व्यवस्था के दायरे में मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और इनके प्रमुख कलपुर्जे व सहायक उपकरण शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि टैक्स प्रोत्साहनों से वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन मजबूत होगी।
विदेशी निवेश और फंड मैनेजरों के लिए भी राहत
नए कानून में विदेशी पूंजी आकर्षित करने और फंड मैनेजरों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़े प्रावधान भी हैं। इसके अलावा विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटरों का इस्तेमाल सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह कानून 5 जून 2026 को जारी अध्यादेश की जगह लेता है, जिसमें सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुछ ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट दी गई थी।
कुल मिलाकर, इन दोनों कानूनों को मंजूरी मिलने से एक तरफ डिजिटल पेमेंट के भविष्य में MDR व्यवस्था को लेकर सरकार के अधिकार स्पष्ट हुए हैं, वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

