अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच अब एक अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश के गृह विभाग की ओर से विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि रिपोर्ट में किन-किन लोगों के नाम हैं और जांच में क्या निष्कर्ष निकाला गया है, इसकी पूरी तस्वीर अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसी वजह से मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
चंपत राय को लेकर स्थिति हुई स्पष्ट?
मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम शामिल नहीं था। अब अंतिम रिपोर्ट में भी उनका नाम नहीं होने के संकेत मिलने से उनके संबंध में स्थिति काफी हद तक साफ होने की बात कही जा रही है। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने तक इस संबंध में आधिकारिक तौर पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
दूसरी ओर, प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का नाम सामने आया था। अंतिम रिपोर्ट में उनके नाम की स्थिति को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह भी सामने नहीं आया है कि जांच के दौरान कोई नया साक्ष्य मिला या किन आधारों पर नाम में बदलाव हुआ। अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
ट्रस्ट के अनुरोध पर बनी थी जांच टीम
इस पूरे मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। यह कार्रवाई श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद की गई थी। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित टीम में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था।
SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को शासन को सौंपी थी। रिपोर्ट में मामले की जांच के आधार पर कई महत्वपूर्ण और कड़ी संस्तुतियां किए जाने की बात सामने आई थी।
प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई थी FIR
जांच के शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर 25 जून को इस मामले में पहली FIR दर्ज की गई। श्रीराम जन्मभूमि थाने में दर्ज मुकदमे में आठ लोगों को नामजद किया गया था, जबकि अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया।
FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल किए गए थे।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया था। FIR ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज हुई थी।
अब सबकी नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आई, किन नामों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई और प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद क्या बदलाव हुए। फिलहाल अंतिम रिपोर्ट ने मामले में कई नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

