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CM योगी के शहर में बदहाली पर राज्यपाल का बड़ा खुलासा! बोलीं- ‘मैं सिर्फ राज्यपाल नहीं, मां भी हूं’

CM योगी के शहर में बदहाली पर राज्यपाल का बड़ा खुलासा! बोलीं- ‘मैं सिर्फ राज्यपाल नहीं, मां भी हूं’

गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का संबोधन केवल औपचारिक भाषण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने मंच से ऐसी बातें कहीं, जिसने पूरे कार्यक्रम का केंद्र बदल दिया। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने इस स्पष्ट संदेश के साथ की कि यदि कहीं कमियां हैं तो उन्हें छिपाने के बजाय सामने लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि “जो हमारी कमियां हैं, उन्हें बताना भी मेरी जिम्मेदारी है। यह गोरखपुर है, जहां स्वयं मुख्यमंत्री का क्षेत्र है। यदि यहां भी कमियां रहेंगी तो बाकी जगहों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।” राज्यपाल की इन टिप्पणियों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विश्वविद्यालय की सुविधाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

बिजली, पानी, सफाई और छात्र सुविधाओं पर जताई चिंता
अपने संबोधन के दौरान आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने बिजली, पानी, पंखों की व्यवस्था, साफ-सफाई और छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं से होती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि छात्रों को मूलभूत सुविधाएं ही सही तरीके से नहीं मिलेंगी तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

‘मैं सिर्फ राज्यपाल नहीं, मां भी हूं’
अपने संबोधन का सबसे भावनात्मक हिस्सा तब आया जब उन्होंने कहा कि “मैं केवल राज्यपाल नहीं, एक मां भी हूं।” उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें शुद्ध और पौष्टिक भोजन भी मिलना चाहिए। उनका मानना था कि यदि छात्र अस्वास्थ्यकर भोजन करेंगे तो इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास दोनों पर पड़ेगा।

छात्रावास की रसोई में पहुंचकर खुद की जांच
दीक्षांत समारोह से पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के छात्रावासों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने रसोई में जाकर भोजन तैयार होने की पूरी प्रक्रिया देखी। खाद्य सामग्री के डिब्बे खुलवाकर उनकी गुणवत्ता जांची और इस्तेमाल किए जा रहे खाद्य तेल के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने तेल के दो नमूने लेने के निर्देश दिए। एक नमूने की जांच स्थानीय स्तर पर और दूसरे की स्वतंत्र जांच लखनऊ में कराने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार जांच के दौरान नमूने बदल दिए जाते हैं, इसलिए पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।

बाहर से आने वाले टिफिन सिस्टम पर उठाए सवाल
राज्यपाल ने विशेष रूप से लड़कों के छात्रावासों में बाहर से टिफिन मंगाने की व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या रोजाना बाहर का भोजन छात्रों के स्वास्थ्य के लिए उचित हो सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस व्यवस्था की समीक्षा की जाए और छात्रों को छात्रावास में ही गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए।

तीन महीने में सुधार के दिए निर्देश
निरीक्षण के दौरान राज्यपाल को जानकारी दी गई कि छात्रावासों में मरम्मत का कार्य चल रहा है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अगले तीन महीनों के भीतर सभी आवश्यक सुधार पूरे किए जाएं ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर आवासीय सुविधाएं मिल सकें।

चरित्र और शिक्षा दोनों को बताया जरूरी
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आनंदीबेन पटेल ने कहा कि डिग्री केवल पहचान दिलाती है, लेकिन सम्मान व्यक्ति के चरित्र से मिलता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी शिक्षा और कौशल का उपयोग केवल करियर बनाने के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि गोरखपुर की धरती भगवान बुद्ध, गुरु गोरखनाथ, संत कबीर और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसी महान विभूतियों की कर्मभूमि रही है, इसलिए यहां से निकलने वाले विद्यार्थियों पर समाज के प्रति विशेष जिम्मेदारी भी है।

बेटियों की सफलता की सराहना
राज्यपाल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की छात्राओं की उपलब्धियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय से 74 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें दो-तिहाई से अधिक छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की बेटियां लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और यह पूरे समाज के लिए गर्व की बात है।

व्यवस्थाओं पर सवालों के बीच जिम्मेदारी का संदेश
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का यह दौरा केवल दीक्षांत समारोह तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं, छात्रावासों की स्थिति, भोजन की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं पर खुलकर अपनी चिंता व्यक्त की। साथ ही यह संदेश भी दिया कि किसी भी व्यवस्था की कमियों को छिपाने के बजाय उन्हें स्वीकार कर समय रहते सुधार करना ही सुशासन की पहचान है। उनके संबोधन ने एक ओर विद्यार्थियों को प्रेरित किया, तो दूसरी ओर संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार की स्पष्ट जिम्मेदारी भी याद दिलाई।

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