संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार कई दिनों से हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सामान्य ढंग से नहीं चल पा रही है। बुधवार को भी सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इस बीच राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू के बीच संसद भवन में मुलाकात हुई। माना जा रहा है कि यह बैठक संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने के उद्देश्य से की गई।
किन मुद्दों पर आमने-सामने हैं सरकार और विपक्ष?
विपक्ष इस समय कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और इन मामलों पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। विपक्ष का कहना है कि इतने गंभीर मामलों पर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए ताकि सभी सांसदों के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि विपक्ष लगातार हंगामा कर संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
राहुल गांधी और किरन रिजिजू की मुलाकात
लगातार बाधित हो रही संसदीय कार्यवाही के बीच राहुल गांधी और किरन रिजिजू की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने संसद में बने गतिरोध को समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा की। इस दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी की भी चर्चा रही। हालांकि बैठक के बाद किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष संवाद के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
E20 पेट्रोल को लेकर राज्यसभा में चर्चा की मांग
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर E20 पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के फैसले पर चर्चा कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि इस नीति का असर देश के करोड़ों वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब देने और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
नए दल-बदल कानून पर कांग्रेस का प्रस्ताव
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर दल-बदल विरोधी कानून में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर चर्चा की मांग की। उनका मत है कि मौजूदा कानून में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जो राजनीतिक अवसरवाद को रोक सकें, लेकिन वैचारिक असहमति और लोकतांत्रिक विचारों की अभिव्यक्ति पर अनावश्यक रोक न लगाएं। उनका सुझाव है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
विपक्ष का संसद परिसर में विरोध मार्च
संसद की कार्यवाही के समानांतर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में भी विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी सांसद गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च करते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान विपक्ष ने छात्र आंदोलन, कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और सरकार से जवाबदेही की मांग दोहराई।
सरकार और विपक्ष के तीखे बयान
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर जवाब देना सरकार का दायित्व है। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी गृह मंत्री से सदन में आकर विस्तृत बयान देने की मांग दोहराई।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने E20 पेट्रोल को लेकर आम लोगों की चिंताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वाहन मालिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
दूसरी ओर भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार विरोध प्रदर्शन कर संसदीय प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए विपक्ष की रणनीति की आलोचना की।
लगातार बाधित हो रही संसदीय कार्यवाही
मंगलवार को भी दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई थी। हालांकि शोर-शराबे के बीच लोकसभा में विनियोग (संख्यांक-3) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जबकि राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी। इसके बावजूद विपक्ष के विरोध के कारण सदन बार-बार स्थगित करना पड़ा।
क्या हो सकता है?
लगातार कई दिनों से संसद का प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण कामकाज प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार और विपक्ष के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकालते हैं, तो संसद की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि टकराव जारी रहता है, तो मानसून सत्र के शेष दिनों में भी महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संवाद के जरिए गतिरोध समाप्त होता है या राजनीतिक टकराव और गहरा होता है।

