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2025 में रिकॉर्ड 20,138 ऑर्गन ट्रांसप्लांट, दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा ट्रांसप्लांट देश बना भारत

2025 में रिकॉर्ड 20,138 ऑर्गन ट्रांसप्लांट, दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा ट्रांसप्लांट देश बना भारत

नई दिल्ली। भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 में पहली बार 20,000 से अधिक अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplants) का आंकड़ा पार कर लिया है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्ष 2025 के दौरान 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जो वर्ष 2024 की तुलना में 6.5 प्रतिशत अधिक हैं। इसके साथ ही भारत कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है, जबकि Living Donor Organ Transplant के मामले में भारत लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है।

यह उपलब्धि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, नीतिगत सुधारों और अंगदान के प्रति बढ़ती जनजागरूकता का परिणाम मानी जा रही है। वर्ष 2013 में जहां देश में केवल 4,990 अंग प्रत्यारोपण हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 20,138 पहुंच गई, जो चार गुना से अधिक वृद्धि दर्शाती है।

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में सबसे अधिक 4,564 अंग प्रत्यारोपण किए गए। इसके बाद तमिलनाडु (2,796), महाराष्ट्र (2,136), तेलंगाना (1,523) और केरल (1,489) का स्थान रहा। वहीं मृत अंगदाताओं (Deceased Donors) के मामले में तमिलनाडु सबसे आगे रहा, जहां 266 दान दर्ज किए गए। इसके बाद तेलंगाना (205), कर्नाटक (198), महाराष्ट्र (154) और गुजरात (152) रहे।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान पोर्टल शुरू होने के बाद अब तक पांच लाख से अधिक आधार-सत्यापित अंगदान प्रतिज्ञाएं (Organ Donation Pledges) दर्ज की जा चुकी हैं। सरकार ने ‘जुग-जुग जियो अभियान’, डिजिटल Pratyarpan प्लेटफॉर्म, NOTTO मोबाइल ऐप, नई Brain Stem Death Certification Guidelines तथा Swap Transplantation Guidelines जैसी कई पहलें भी शुरू की हैं। इसके साथ ही देश के विभिन्न AIIMS संस्थानों में किडनी, लिवर और हार्ट ट्रांसप्लांट सेवाओं का विस्तार किया गया है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्धियों के बावजूद मृत अंगदाताओं की संख्या अभी भी मांग की तुलना में काफी कम है। बेहतर जनजागरूकता, अस्पतालों की क्षमता में वृद्धि और प्रभावी अंगदान प्रणाली के जरिए इस अंतर को कम करने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र की यह उपलब्धि हजारों गंभीर मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है और भारत की ट्रांसप्लांट सेवाओं को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रही है।

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