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LDA में विजिलेंस का बड़ा एक्शन, रिश्वत लेने के आरोप में JE समेत तीन लोग गिरफ्तार

LDA में विजिलेंस का बड़ा एक्शन, रिश्वत लेने के आरोप में JE समेत तीन लोग गिरफ्तार

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोरी के एक कथित मामले का खुलासा किया है। ट्रैप ऑपरेशन के दौरान एलडीए के एक सुपरवाइजर को 7.5 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इसके बाद पूछताछ के आधार पर एक जूनियर इंजीनियर (JE) और एक अन्य सुपरवाइजर को भी हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के बाद एलडीए में हड़कंप मच गया।

पूछताछ के बाद बढ़ा जांच का दायरा
जानकारी के अनुसार, विजिलेंस टीम ने पहले सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अवर अभियंता (JE) दिनेश कुमार वर्मा की कथित भूमिका की भी जांच शुरू की गई और उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद स्मारक शाखा से जुड़े सुपरवाइजर अश्विनी को भी जांच के दायरे में लाते हुए गिरफ्तार किया गया।

शिकायत के बाद बिछाया गया ट्रैप
सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस को इस मामले में रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी। प्रारंभिक सत्यापन के बाद टीम ने पूरी योजना के साथ ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया। जैसे ही कथित रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, विजिलेंस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को मौके पर पकड़ लिया। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ते हुए अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ शुरू की गई।

रिश्वत किस काम के लिए मांगी गई, जांच जारी
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित रिश्वत किस कार्य के बदले मांगी गई थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस मामले में केवल गिरफ्तार किए गए लोग शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था। अधिकारियों के मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।

विजिलेंस की नजर अब पूरे नेटवर्क पर
इस कार्रवाई के बाद विजिलेंस की जांच केवल एक ट्रैप तक सीमित नहीं है। टीम अब यह भी खंगाल रही है कि क्या आरोपियों का नाम पहले भी इसी तरह के मामलों में सामने आया है। यदि जांच के दौरान अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता के सबूत मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार
इस मामले में विस्तृत तस्वीर विजिलेंस की आधिकारिक रिपोर्ट और दर्ज की जाने वाली एफआईआर के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल तीनों आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है। यह कार्रवाई सरकारी विभागों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान का एक अहम हिस्सा मानी जा रही है, जिस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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