छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत विभिन्न विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का ‘चिता आंदोलन’ लगातार तेज होता जा रहा है। उचित मुआवजा, पुनर्वास और कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का भूख हड़ताल बुधवार को 12वें दिन भी जारी रहा।

आंदोलनकारियों का दावा है कि लगातार अनशन के चलते अमित भटनागर का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और उनका वजन करीब छह किलोग्राम घट चुका है। वहीं विरोध के प्रतीक के रूप में आंदोलन स्थल पर प्रभावित परिवारों ने बुधवार को भी चूल्हा नहीं जलाया, जिसके कारण करीब 500 बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भोजन से वंचित रहे। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले चार वर्षों से वे न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने न तो पारदर्शी सर्वे कराया और न ही ग्राम सभाओं, जनसुनवाई और आपत्तियों का निष्पक्ष निस्तारण किया। उनका यह भी आरोप है कि मुआवजा वितरण और पुनर्वास प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, जबकि वास्तविक पात्र परिवार आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं।

आंदोलनकारी जमीन के बदले जमीन, वर्ष 2026 तक पात्रता की कट-ऑफ तिथि बढ़ाने, कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच और परियोजना के प्रभावों पर सार्वजनिक चर्चा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच आंदोलन को समाजवादी पार्टी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों और गांधीवादी विचारकों का भी समर्थन मिला है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
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